दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Friday 16 May 2008

सोनिया जी, क्यों जाते हैं आप लोग वहाँ?

सोनिया गाँधी और उनका ग्रह मंत्री पहुँच गए जयपुर. अरे भाई आप क्या करेंगे वहाँ? सिवाय लोगों को और परेशान करने के आप क्या कर पाएंगे वहाँ? अगर आपने कुछ किया होता तो यह सब कुछ हुआ ही न होता. हजारों नागरिक मर चुके हैं अब तक हुए ऐसे कातिलाना हमलों में. न तो आप इन हमलों को रोक पाये हैं और न ही कातिलों को सजा दे पाये हैं. अदालतों ने कुछ कातिलों को सजा दी भी तो आपने उन्हें सरकारी दामाद बना दिया. हर जगह राजनीति करने क्यों पहुँच जाते हैं आप लोग? क्या आप भारत के आम निर्दोष नागरिकों को चैन से नहीं रहने दे सकते? क्या बिगाड़ा है इन्होनें आपका? वोट देकर इन्होनें आपको सत्ता दे दी. आपने क्या दिया इन्हें? केवल आतंकवादियों के हाथ मौत.

आपके हिसाब से हर हिन्दुस्तानी मुसलमान आतंकवादी है. इसलिए आपको डर है कि अगर किसी आतंकवादी को सजा मिल गई तो हिन्दुस्तान के मुसलमान आपसे और आपकी पार्टी से नाराज हो जायेंगे और आपकी सत्ता छिन जायेगी. कितना ग़लत सोच है आपका? कितनी ग़लत नीतियाँ हैं आपकी? आतंकवादी का कोई मजहब नहीं होता. वह सिर्फ़ कातिल होता है. समाज के शरीर में आप जैसे राजनीतिबाजों के कर्मों से बना नासूर. जिसका का एक ही ईलाज है कि उसे काट कर फैंक दिया जाए. पर क्या आप ऐसा कर पाएंगे? नहीं, यह सोचना भी बेबकूफी होगी.

आपको आने वाले चुनाव जीतने हैं. इसलिए आपने लोगों के जख्मों पर ही राजनीति शुरू कर दी. जिन के प्रियजन मारे गए हैं उन्हें शान्ति से उनका दुःख मनाने दीजिये. जिन के प्रियजन घायल हुए हैं इन्हें उनकी तीमारदारी करने दीजिये. आप घड़ियाली आंसू बहाकर उन्हें और तकलीफ मत दीजिये. यह आप भी जानती है और सारे हिन्दुस्तानी भी जानते हैं कि आप के दिल में उनके लिए कोई प्यार नहीं है. आप के लिए तो वह सिर्फ़ एक वोट हैं. यह हमदर्दी का नाटक बंद कीजिये और उन्हें अपने गम से बाहर आने दीजिये.

2 comments:

जितेन्द्र दवे said...

AAP NE BILKOOL SAHI FARMAYA HAI. BHAI AAJ SECULARISM KE NAAM PE DESH ME KAAFII NANARTH HO RAHAA HAI. BADHAAI AAPOKO.

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

ये नेता, चाहे किसी भी दल के हों, आम आदमी की ज़िन्दगी दूभर ही करते हैं. मन्नू भण्डारी का उपन्यास 'महाभोज' जिन्होंने पढा है, उन्हें इनके व्यवहार से कोई अचरज नहीं होगा. जैसे ही कुछ अघटनीय घटित होता है, ये लोग अपनी रोटियां सेकने पहुंच जाते हैं. जयपुर में भी ऐसा ही हो रहा है. अस्पताल में मंत्री गण भी अपनी दुकानें सजाए बैठे हैं, भले ही इससे मरीज़ों को असुविधा होती हो तो हो. मैंने कहा न, इस मामले में सारे दलों के नेताओं का चरित्र एक-सा है.