दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday 31 July 2008

नमक का दारोगा

आज कलम के सिपाही महान कहानी कार मुंशी प्रेमचन्द की जन्म तिथि है. उन्हें शत-शत नमन है.

आज याद आई उनकी एक कहानी 'नमक का दारोगा' की. भ्रष्टाचार के दलदल में गले तक डूबे भारतवासियों को जरूरत है उस नायक की जो दबाब के आगे नहीं झुकता और भ्रष्टाचारियों को न्याय के सामने पेश करता है. अदालत उसे ही सजा देती है और दरोगा की पट्टी उतार लेती है. पर वह निराश नहीं होता. घर आता है तो बाप की गालियाँ खाता है. फ़िर आता है वह भ्रष्टाचारी जिसे अदालत ने निर्दोष करार दिया था. बाप उस से अपने बेटे की गलती की माफ़ी मांगने लगता है. पर यहाँ तो चमत्कार होता है मुंशी जी की कलम से. वह धनी व्यक्ति उनके बेटे को अपने व्यापार को सँभालने का न्योता देता है. पिता भोंचक रह जाते हैं. पर बेटा मना कर देता है, कहता है में भ्रष्टाचार का व्यापार नहीं करता. वह धनी व्यक्ति कहता है, मुझे तुम जैसे ईमानदार इंसान की जरूरत है. तुम जैसे चाहो मेरा व्यापार चलाना.

कितने सालों पहले मुंशी जी ने ऐसे नायक की तस्वीर बनाई थी जिसकी भारत को आज सबसे ज्यादा जरूरत है. ईमानदारी का ईनाम, यह मुंशी जी ही सोच सकते थे. कोई भरेगा उनकी इस तस्वीर में रंग?

कुछ कड़वी, कुछ मीठी

उन्होंने कहा कि राम का कोई अस्तित्व नहीं है.
फ़िर बोले वह कि राम सेतु को राष्ट्रिय स्मारक नहीं माना जा सकता क्योंकि ऐसा केवल कुछ हिंदू कह रहे हैं, और ऐसा करके हम मुसलमानों को नाराज नहीं कर सकते.
फ़िर उन्होंने कहा कि राम ने १७ लाख साल पहले राम सेतु तोड़ दिया था.
कांग्रेस और कांग्रेस के वकील - कभी कुछ और कभी कुछ.
हिंदू बहुसंख्यक होकर भी अल्पसंख्यक हो गए हें.

मौलवियों ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ फतवा जारी किया और आतंकवादी हमले और बढ़ गए.
लगता है फतवे दिखाने के और छुपाने के और.

सूरत में बम पेड़ों पर उग रहे हें, बाजारों में इधर-उधर बिखरे पड़े हें. परदे के पीछे केन्द्र सरकार मुस्कुरा रही है और फुसफुसा रही है, "गुजरात के बारे में हम क्यों चिंता करें, वहां तो वीजेपी है? जो हम नहीं कर सके वह आतंकवादी कर रहे हें."

दिल्ली विश्व विद्यालय में यौन शोषण करने वाले शिक्षकों की संख्या बढ़ती जा रही है. बिचारे छात्र, बाहर भी खतरा, अन्दर भी खतरा. अब कहाँ जाएँ वह?

उन्होंने अपनी पीआइएल में कहा, "राज्य का कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों को लाइसेंसशुदा दारु पिलाए". पता नहीं दिल्ली हाईकोर्ट क्यों नाराज हो गया? नागरिक दारु पीते और अपने गम भुलाते. मंहगाई, ब्लू लाइन, वाइक सवार लुटेरे, ऑटो वाले, गड्ढे वाली सड़कें, गायब विजली, गन्दा पानी, सड़क पर वीआइपी, आतंकवादियों का खतरा, शीला जी की फोटो रोज अखबार में, वरिष्ट नागरिकों पर हमले, बीआरटी कारीडोर, न जाने कितने गम हें दिल्लीवासियों को भुलाने के लिए.

वह अपने जीजाजी से शादी करना चाहती थी. इस लिए उसने अपनी बहन की हत्या कर दी. मुसलमानों में तो चार शादियाँ जायज हें. कहते हें प्यार अँधा होता है, पर क्या वह पढ़ भी नहीं सकता?

वह अपनी एक मित्र के साथ ऑटो में बैठ कर जा रही थीं. दो वाइक सवार उनका बेग छीनकर भाग गए. ऑटो वाले ने लुटेरों का पीछा किया. एक सिग्नल पर उन्होंने देखा कि दोनों लुटेरे सड़क के किनारे धायल पड़े हें. उनकी वाइक टूटी पड़ी है और पास ही में उनका बेग पड़ा है. उन्होंने तुंरत पुलिस को फ़ोन किया और धायलों को अस्पताल पहुंचाया. खबर के अनुसार दोनों की हालत चिंता जनक है. अगर लुटेरे बच गए तो शायद वह अपराध करना छोड़ देंगे.

दिल्ली नगर निगम के सदस्यों को एक करोड़ रुपया और मिलेगा जिसे वह अंधों की तरह अपने-अपनों में बाँट सकेंगे. कुल मिलाकर अब दो करोड़ हो गया. काफ़ी है एक साल के लिए. तनख्वाह तो अलग से मिलती ही है.

दिल्ली मेट्रो १३१ नई ट्रेन्स और चलाएगा. इनमें चार की जगह छः डिब्बे होंगे. लगभग ८ लाख यात्री रोज मेट्रो से यात्रा करते हें. मेट्रो लगभग ९० लाख रुपया रोज कमाती है. यह एक अच्छी बात राजधानी में हो रही है. पर इस में शीला जी का कोई हाथ नहीं है.

सीबीआई के डाइरेक्टर रिटायर हो रहे हें. जाने से पहले उन्होंने आरुशी मर्डर केस में सफलता का दावा किया. मेरे एक मित्र ने कहा आखरी वक्त में झूट नहीं बोलना चाहिए.

सोमनाथ दा ने जिस दिन यह कहा कि लोक सभा अध्यक्ष पार्टी से अलग होता है, उसी दिन उन्होंने पार्टी का सदस्यता शुल्क और अपनी आमदनी का ५ % पार्टी कोष में किया था. लगता है उनके अध्यक्ष पद से इस्तीफा न देने के पीछे कोई जबरदस्त चक्कर है. परमाणु करार को बचाने के लिए कोई छिपा हुआ करार. दादा भी आखिरकार राजनीतिबाज हें.

प्रधान मंत्री ने राष्ट्रपति से देश की आंतरिक सुरक्षा पर विचार विमर्श किया. क्या उन्होंने यह बताया होगा कि दिल्ली पुलिस महिलाओं और बच्चों की तलाशी ले रही है, और एक अखबार के अनुसार कहीं कोई सुरक्षा नहीं हो रही? या फ़िर उन्होंने कहा होगा कि सरकार सुरक्षित है, राष्ट्रपति सुरक्षित हें, और मैडम सुरक्षित हें.

एक खबर के अनुसार रिश्वतखोरों में मंत्री पदों का बंटवारा दो बार में किया जायेगा. किसी ने कहा सही तो है, एक बार में करते तो जनता के लिए डोज शायद ज्यादा हो जाती.

सरकार को विश्वासमत मिला, इसके लिए काफ़ी क्रेडिट समाजवादी पार्टी के मध्य प्रदेश के एक विधायक को जाता है. इस विधायक ने गुवाहाटी के कामाख्या देवी मन्दिर में ३०० बकरियों और भैंसों की बलि चढ़ाई. लगता है आज कल मेनका गांधी छुट्टी पर हें.

Wednesday 30 July 2008

पढ़ो और हँसना चाहो तो हंसो

मेरे एक मित्र ने कहा, "लोग चुटकुले लिखते समय 'पढ़ो और हंसो' क्यो लिखते हैं? यह तो एक जबदस्ती हो गई कि अगर हम चुटकुला पढ़ेंगे तो हँसना भी पढ़ेगा". मुझे अपने मित्र की बात में दम नजर आया. इसलिए मैंने लिखा, 'पढ़ो और हँसना चाहो तो हंसो'

"सर जब आपने कहा कि मेरी तारीफ़ करना बंद करो और पार्टी के लिए काम करो, तब क्या आप सीरियस थे?", एक चमचे ने नेताजी से पूछा.
नेता जी ने जवाब दिया, "अरे भई ऐसा कहना पड़ता है. यह राजनीति है".
चमचा खुश हो गया, "इसका मतलब है कि हम तारीफ़ करना जारी रखें?".
"हाँ", नेता जी मुस्कुराए, "तारीफ़ जारी रखो बल्कि और ज्यादा तारीफ़ करो. कहो कि यह तुम्हारी अंतरआत्मा की आवाज है".

नेता जी ने 'आम आदमी के सिपाही कैंप' में हिस्सा लिया. एक बुजुर्ग सज्जन ने कहा कि कोई आम आदमी का नेता है, तो कोई आम आदमी की सरकार है, अब आम आदमी के सिपाही पैदा हो गए. बस नजर नहीं आता तो आम आदमी.

जिस चेनल ने 'रिश्वत लो, वोट दो' टेप बनाया था, अब उसे जनता को दिखाने से मना कर रही है. बहाना ले रही है कि लोक सभा अध्यक्ष जैसा कहेंगे बैसा करेंगे. अब न्यूज़ चेनल भी राजनीति करने लगी हैं. राजदीप कहीं एमपी बनने की तैयारी तो नहीं कर रहे?

उन्होंने कहा कि अगर केन्द्र में हमारी सरकार बनी तो हम अफज़ल को फांसी देंगे. कुछ दिन पहले अफज़ल ने कहा था कि वह भी यही चाहता है. आतंकवादियों को चाहिए के वह उनकी पार्टी को जिताने के लिए काम करे ताकि उनके नेता अफज़ल की यह इच्छा पूरी हो सके.

केन्द्र सरकार ने कहा कि वह राम सेतु को राष्ट्रिय मोनुमेंट इसलिए नहीं मान सकती कि कुछ हिंदू ऐसा कह रहे हैं. मेरे एक मित्र ने कहा कि अब मुसलमान तो ऐसा कहेंगे नहीं जिनकी बात यह सरकार आँख बंद करके, वोटों के सपने देखते हुए, मानती है.

रिश्वत देकर सरकार बचाने का रिकार्ड कांग्रेस के नाम है. मनमोहन जी ने नरसिम्हा राव द्बारा पहले बनाया रिकार्ड बहुत अच्छे मार्जिन से तोड़ दिया.

शिक्षक ने छात्र से पूछा, 'कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है कहावत को आज के सन्दर्भ में समझाओ'.
छात्र ने समझाया, 'मनमोहन जी ने पाया विश्वास मत और खोया इमानदारी, नेतिकता, व्यवहार में शुचिता और जनता का विश्वास'.

Tuesday 29 July 2008

गरम हवा का गुब्बारा, एकाउनटेनसी और मेनेजमेंट

एक आदमी गरम हवा के गुब्बारे में उड़ रहा था. कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वह भटक गया है और उसे यह भी पता नहीं है कि वह कहाँ है. जब उसने गुब्बारे को कुछ नीचे उतारा तो उसने देखा कि एक महिला अपने बगीचे में फूलों को पानी दे रही है. गुब्बारे को कुछ और नीचे उतार कर वह चिल्लाया, "क्या आप मेरी मदद कर सकती हैं? मैंने एक दोस्त को एक घंटा पहले मिलने का वायदा किया था, पर मैं यह नहीं जान पा रहा हूँ कि मैं कहाँ हूँ."
महिला ने जवाब दिया, "आप एक गरम हवा के गुब्बारे में हैं जो जमीन से लगभग ३० फीट ऊपर है. आप ४० और ४१ डिग्री नॉर्थ लेटीच्युड के और ५९ से ६० डिग्री वेस्ट लोंगिच्युड के बीच में हैं.
"आप जरूर एक एकाउन्टटेनट हैं", आदमी ने कहा.
"हां, मैं एक एकाउन्टटेनट हूँ. पर आपको कैसे पता चला?" महिला ने कहा.
उस आदमी ने जवाब दिया, "आप ने जो मुझे बताया वह तकनीकी तौर पर सही है पर इस जानकारी से मुझे यह नहीं पता चल पाया कि मैं कहाँ हूँ? मैं अभी भी भटका हुआ हूँ. सच कहूं तो आप मेरी कुछ मदद नहीं कर सकीं. हां, आपने मुझे और देर करवा दी".
महिला ने जवाब दिया, "आप जरूर मेनेजमेंट व्यवसाय में हैं".
"हाँ, आप सही हैं", उस आदमी ने कहा, "पर आपको कैसे पता चला?".
महिला ने जवाब दिया, "आपको यह नहीं पता कि आप कहाँ हैं. आप गरम हवा के सहारे गुब्बारे में उड़ रहे हैं पर कहाँ किधर जाना है यह नहीं जानते. आपने एक वायदा किया था जिसे कैसे पूरा करना है आप को पता नहीं. आप यह उम्मीद करते हैं कि जमीन पर खड़े दूसरे लोग आपकी समस्यायें दूर करेंगे. सच्चाई यह है कि आप उसी स्थिति में हैं जिसमें आप मुझसे मिलने से पहले थे, पर आपने अपनी समस्या में मुझे भी उलझा लिया है. आप के कारण अब मैं भी आपकी समस्या के लिए जिम्मेदार हो गई हूँ".

दिल्ली पुलिस और आतंकवादी

बंगलौर और उसके बाद अहमदाबाद में आतंकवादी हमलों के बाद दिल्ली में हाई अलर्ट धोषित कर दिया गया. दिल्ली पुलिस अपने काम में लग गई. तुरंत जिन दो आतंकवादियों की तलाशी ली गई उन्हें नीचे दिए फोटो में देखिये.
वाह री दिल्ली पुलिस. इन पुलिसवालों के कमिश्नर कहते हैं कि दिल्ली में अपराध कम हो गए हैं. भई अपराध तो कम होनें ही हैं, जब पुलिस ऐसे संधिग्ध आतंकवादियों की तलाशी लेगी.

Thursday 24 July 2008

अब प्रधान मंत्री के पद में भी कोई चार्म नहीं रहा.

पिछले सप्ताह उन्होंने कहा कि मंत्री पद मांग कर शर्मिंदा न करें, यह बिल्कुल सम्भव नहीं होगा. इस सप्ताह मंत्री पद की मांग स्वीकार कर उन्होंने अपनी सरकार बचाई. अगले सप्ताह वह अपना वादा पूरा करेंगे. पाँच वोट बराबर दो मंत्री पद. राजनीति का गणित है यह.

उन्होंने कहा कि वर्तमान के उनके दो दुश्मन (यूपीऐ और एनडीऐ) मिल गए और उनसे प्रधान मंत्री बनने का मौका छीन लिया. भाई दूसरों को क्यों दोष देती हैं, गणित तो आपका ग़लत हो गया? बैसे भी अपनी सरकार बचाने के लिए मनमोहन जी आपकी सरकार तो नहीं बनबा देते. मुख्य मंत्री बन कर इन का यह सोच है तो प्रधान मंत्री बन कर क्या-क्या सोचेंगी यह?

सोमनाथ दा ने यह क्या किया? जीवन भर जिस पार्टी को मजबूत बनाया उसी पार्टी से अपमानित होकर निकलना पड़ा. ऐसा क्या कारण रहा होगा? किसी ने कहा, ऐसे सवालों के जवाब समय पर छोड़ देने चाहियें.

करात के एक झटके ने भारतीय राजनीति का रूप ही बदल दिया. कैसे-कैसे नमूने प्रधान मंत्री बनने के ख्वाब देखने लगे. अब प्रधान मंत्री के पद में भी कोई चार्म नहीं रहा.

दिल्ली पुलिस ने अपनी वेबसाईट पर अपनी खूब तारीफ़ की. जनता उस से सहमत हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है. बैसे भी कौन जाता है इस वेबसाईट पर? दिल्ली निवासियों के लिए सबसे अच्छी ख़बर यह होगी कि दिल्ली पुलिस को चाँद पर भेज दिया गया.

कलावती के घर के सामने वाले घर के निवासी दिन भर खिड़की से बाहर झांकते रहे राहुल बाबा के इंतज़ार में, पर वह नहीं आए. बेचारे यह नहीं जानते कि राहुल बाबा राजनेता हैं. कलावती सिर्फ़ एक माध्यम थी वाह-वाही बटोरने के लिए.

अनुशासनहीनता के चार्ज पर पार्टी से निकाले गए स्पीकर महोदय दूसरी पार्टियों से इसी चार्ज पर निकाले गए लोक सभा सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने पर निर्णय लेंगे.

सरकार ने लोक सभा का विश्वास जीतने में जनता का विश्वास खो दिया.

Monday 21 July 2008

करात जी, आप स्वर्ग जायेंगे

मैं जानता हूँ आप धर्म और भगवान को नहीं मानते, पर मैं मानता हूँ. जो लोग दूसरों का हित करते हैं भगवान उन्हें स्वर्ग में जगह देता है. आज़ादी (आपकी पार्टी जिसके ख़िलाफ़ थी) के बाद आपसे ज्यादा दूसरों का हित किसी ने नहीं किया. आप ने सरकार से समर्थन लेने का एक महान कार्य किया, और सैंकड़ों लोक सभाईयों का भविष्य बल्ले-बल्ले हो गया. कुछ जो चुनकर जेल चले गए थे, जिन्होनें आज तक लोक सभा में एक शब्द भी नहीं बोला, करोड़ों की बात कर रहे हैं. कोई कह रहा था, आपके एक झटके से एक एमपी की कीमत ३५ करोड़ हो गई है. मेरे फ्लेट की कीमत ५० लाख भी नहीं हुई, जबकि पास में माल बन रही है और साइड से बहते गंदे नाले को पाट कर दुकानें बनाने की बात चल रही है.

मेरा एक जानकार आज फूट-फूट कर रो रहा है. उसके ऊपर दर्ज़न से ज्यादा मुकदमें चल रहे हैं. पिछले चुनाव के समय उसने कई लोगों को जान से मार डाला था. उसकी इस योग्यता को देखते हुए उसे एक पार्टी चुनाव का टिकट दे रही थी. पर वह तैयार नहीं हुआ. मान जाता तो जेल में बैठे-बैठे आज ३५ करोड़ का मालिक होता. मान्यवर कहा जाता सो अलग.

अगर आप के झटके से सरकार गिर जाती है तो आप का नाम इतिहास में अमर हो जायेगा. सोमनाथ दादा पता नहीं किस चक्कर में आप से पंगा ले रहे हैं. अगर पंगा लेना ही था तो किसी खरीदार से बात करते और ३५ करोड़ अपनी जेब में करते. वोट के बाद तो आपने उन्हें पार्टी से निकालना ही है. उनके लिए तो यह वही कहावत हो गई - न खुदा ही मिला न विसाले सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे. लगता है सठिया गए हैं सोमनाथ दादा.

मनमोहन ने आप के साथ बहुत बुरा किया. इतने सालों से आपके सामने घुटना टेके बैठे थे, पता नहीं इस बार क्या हो गया. आपको मजबूर कर दिया समर्थन वापस लेने के लिए. बरना हर बार की तरह इस बार भी आप धमकी देते और इस बार भी माफ़ करके अगली बार के लिए सावधान कर देते. भले ही आपने उन्हें सबक सिखाने के लिए ऐसा किया था पर ईश्वर का कमाल देखिये, कितने नामाकूलों की जिंदगी चमक गई. इस का काफ़ी क्रेडिट मनमोहन को भी मिलेगा. आप के साथ-साथ वाहे गुरु उन पर भी कृपा करेंगे.

Sunday 20 July 2008

वह सठिया गए हैं.........

आप सबने चुटकुले पसंद किए. धन्यवाद.

आज पहले एक चुट्कुली

सोनिया एक कपड़े की दूकान पर गई. सेल्समेन ने उसे बहुत से डिजाइन दिखाए. एक डिजाइन सोनिया को पसंद आया. उस ने सेल्समेन से उस की कीमत पूछी. सेल्समेन ने मुस्कुराते हुए कहा कि एक मीटर की कीमत है एक चुम्बन. सोनिया ने भी मुस्कुराते हुए कहा, 'दस मीटर दे दीजिये'. सेल्समेन ने दस मीटर कपड़ा काटा, पैक किया और सोनिया के हाथ में थमा दिया. सोनिया ने अपने बगल में खड़े एक बिना दांत वाले बुजुर्ग सज्जन की और ईशारा करते हुए कहा, 'पेमेंट मेरे दादा जी करेंगे'.

अब एक चुटकुला

दादा जी को रिटायर होने की पहली वर्षगाँठ पर जो गिफ्ट अपने परिवार से मिली वह था यह कमेन्ट, 'दादा जी अब सठिया गए हैं'. दादा जी को बहुत बुरा लगा. उन्होंने तय किया कि मैं सबको ग़लत साबित करके रहूँगा. रविवार को उन्होंने तय किया कि लान में पानी दिया जाए. जब उन्होंने पानी का पाइप हाथ में उठाया तो उन्हें अपनी कार नजर आई. उन्हें लगा की कार की सफाई करनी जरूरी है.
जैसे ही वह कार की तरफ़ बढ़े उन्हें बरांडे में मेज पर कुछ चिट्ठियां रखी नजर आईं. उन्हें याद आया कि वह सुबह मेल बाक्स से यह चिट्ठिया निकाल कर लाये थे और अभी तक उन्होंने चिट्ठियों को देखा नहीं था. उन्होंने सोचा पहले चिट्ठियां देख ली जाएँ.
उन्होंने चिट्ठियां देखनी शुरू कीं. कुछ बिल थे और कुछ बेकार चिट्ठियां. बेकार चिट्ठियों को मेज के नीचे रखे कूड़ादान में डालने के लिए जब वह नीचे झुके तो उन्होंने पाया कि वह पूरा भरा हुआ था. उन्होंने तय किया कि पहले कूड़ा घर के बाहर बने नगर निगम के कूड़ादान में डाल दिया जाय. जब वह कूड़ादान लेकर चलने लगे तो उन्हें ध्यान आया कि वहीँ पोस्ट बाक्स भी है. जब उधर जा ही रहे हैं तो बिलों के चेक भी पोस्ट कर देंगे.
उन्होंने मेज की दराज से चेक बुक निकाली और पाया कि उस में केवल एक चेक बचा था. उन्हें याद आया कि नई चेक बुक स्टडी रूम की मेज की दराज में रखी है. वह स्टडी रूम की तरफ़ गए तो उन्हें कोक का डिब्बा मिला जो थोड़ी देर पहले उन्होंने फ्रिज से पीने के लिए निकाला था और खाने की मेज पर रख दिया था. उन्होंने सोचा कि चेक लिखने में कुछ देर लगेगी इस लिए कोक का डिब्बा फ्रिज में रख देना चाहिए नहीं तो वह गर्म हो जायेगा. डिब्बा फ्रिज में रखने चले तो उन्हें साइड टेबल पर रखा फूलदान दिखाई दिया जिसमें पानी नहीं डाला गया था. उन्हें लगा कि अगर मैंने इस में पानी नहीं डाला तो फूल मुरझा जायेंगे. इस लिए उन्होंने कोक का डिब्बा वहीँ खाने की मेज पर रख दिया और पानी का जग लेने रसोई घर में गए. वहां उन्हें अपना चश्मा नजर आया जिसे वह सुबह से तलाश कर रहे थे. उन्होंने सोचा कि फूलदान में पानी डालने से पहले चश्मा स्टडी रूम में रख दूँ नहीं तो फ़िर पढ़ने में परेशानी होगी. फ़िर सोचा नहीं पहले फूलों में पानी डाल दूँ. पानी डालने के लिए उन्होंने जग उठाया तो देखा किसी ने टीवी रिमोट किचिन टेबल पर रख दिया है. उन्हें लगा कि पहले रिमोट टीवी के पास रख दूँ नहीं तो जब टीवी देखना होगा तो परेशानी होगी. पर फ़िर उन्होंने सोचा कि पहले फूलों में पानी दे दूँ. जग में पानी भरते समय कुछ पानी फर्श पर गिर गया. कपड़ा लाकर उसे साफ़ किया. अब वह सोच रहे थे कि उन्होंने क्या काम करने का तय किया था. उन्हें कुछ याद नहीं आ रहा था.
दिन बीत गया पर,
लान में पानी नहीं दिया गया,
कूड़ा बाहर निगम के कूड़ा घर में नहीं डाला गया,
कार साफ़ नहीं हुई,
बिल पे नहीं किए गए,
चश्मा सही जगह नहीं रखा गया,
कोक बाहर रखा गरम हो गया,
फूलदान में पानी नहीं दिया गया,
रिमोट टीवी के पास नहीं रखा गया.

अब वह सोच रहे थे कि में सारा दिन व्यस्त रहा पर काम क्या किया? अखबार पढ़ने के लिए चश्मा नहीं मिल रहा. टीवी देखने के लिए रिमोट नहीं मिल रहा. पीने के लिए ठंडा कोक नहीं है. कार गन्दी है. लान सूखा है. फूलदान में फूल मुरझा गए हैं. चेक बुक में बस एक चेक बचा है. बिल कैसे पे होंगे? कूड़ा घर के अन्दर बदबू कर रहा है. उन्हें लगा शायद बच्चे ठीक कह रहे हैं. वह सठिया गए हैं.

Saturday 19 July 2008

कुछ चुटकुले, हँसना चाहें तो हंसें

भारत से डाक्टर्स अचानक ही देश छोड़ कर जाने लगे. रामादोस ने डाक्टर्स से कहा कि उन्हें अपने देश में ही रहना चाहिए. एक डाक्टर ने कहा, 'जब तक आप स्वास्थ्य मंत्री हैं तब तक नहीं'.

भारत की 'आत्महत्या राजधानी' विधर्व के ग्राम वासियों से राहुल गांधी ने कहा, 'आशा मत छोड़िये, सपने देखते रहिये'. एक ग्रामवासी ने बुरा मुंह बनाते हुए कहा, 'यह बताने के लिए आप दिल्ली से यहाँ आयें हैं. पिछले ६० वर्षों से हम यही तो कर रहे हैं'.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी स्पीकर के चक्कर में फंस गई है. उनका एक मात्र प्रभावी स्पीकर लोक सभा के स्पीकर पद से हटने को तैयार नहीं है.

दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने कहा कि राजधानी में अपराध कम हो रहे हैं.शीला दीक्षित ने उस समय तो गर्दन हिला दी सहमति में, पर जब उन्हें पता लगा कि जनता इस बात पर नाराज है तो उन्होंने कहा कि दिल्ली में अपराध बढ़ रहे हैं. अकेले में उन्होंने बताया कि वह भूल गई थीं कि दिल्ली में चुनाव होनें है.

मेरे पड़ोसी ने पूछा क्या में आपका घास काटने का यंत्र इस्तेमाल कर सकता हूँ? मैंने कहा, 'बड़े शौक से, पर उसे मेरे बगीचे में ही इस्तेमाल करियेगा'.

उन्होंने दुकानदार से पूछा, 'यह आर्गेनिक सब्जियाँ हैं न?'
दुकानदार ने कहा, 'हाँ'.
उन्होंने पूछा, 'इन में जहरीला रसायन छिड़का है क्या. मुझे अपनी पत्नी के लिए लेनी हैं'.
'नहीं', दुकानदार ने कहा, 'यह काम आप को ख़ुद करना होगा'.

एक बहुत मालदार आदमी अपनी लम्बी कार में जा रहा था. रास्ते में उसने देखा कि एक आदमी घास खा रहा है. उसने तुंरत कार रोकी, उतरा और उस आदमी से पूछा कि वह घास क्यों खा रहा है? उस आदमी ने बताया कि वह कई दिन से भूखा है और भूख मिटाने के लिए घास खा रहा है. मालदार आदमी को उस पर बहुत दया आई. उसने कहा, 'मेरे घर चलो, में तुम्हें खूब खिलाऊँगा'.
भूखे आदमी ने कहा कि उसके साथ उस की पत्नी और ६ बच्चे हैं और वह भी भूखे हैं. मालदार आदमी ने सबको चलने के लिए कहा. सब खुशी से कार में सवार हो गए. रास्ते में भूखे आदमी ने कहा, 'आप बहुत दयालु हैं'.
'अरे ऐसी कोई बात नहीं है', मालदार आदमी बोला, 'मेरे लान की घास एक फीट लम्बी और बहुत मुलायम है'.

Friday 18 July 2008

दिल्ली में अपराध कम हो गए हैं

दिल्ली के पुलिस आयुक्त ने दिल्ली की मुख्य मंत्री को बताया कि दिल्ली में अपराध कम हो गए हैं. ऐसा उन्होंने तब कहा जब मुख्य मंत्री ने उन्हें दिल्ली में बढ़ते अपराधों पर चिंता जताने के लिए तलब किया था. यह ख़बर पढ़ कर मुझे गुस्सा भी आया और दुःख भी हुआ. गुस्सा इस बात पर कि पुलिस आयुक्त ऐसा सफ़ेद झूंट बोल रहा है, और दुःख इस बात पर कि मुख्य मंत्री ने इस सफ़ेद झूंट पर यकीन कर लिया.

अखबार में जहाँ यह ख़बर छपी है, उस से चौथे कालम में यह छपा है कि एक सरकारी स्कूल में एक १० वर्षीय छात्रा के साथ बलात्कार हुआ. उसके नीचे ख़बर छपी है कि आरुशी हत्याकांड में जांच में घोटाला करने वाले पुलिस अफसर महेश कुमार मिश्रा को पदोन्नति दी गई है. हालांकि यह ख़बर उत्तर प्रदेश पुलिस की है पर दिल्ली पुलिस भी इस मामले में कुछ कम तो नहीं है. पदोन्नति पाने के लिए दिल्ली पुलिस के आला अफसरों ने निर्दोष नागरिकों को कनाट प्लेस में दिन दहाड़े मौत के घाट उतार दिया था. मोटर साईकिल सवार लुटेरों ने कल पश्चिम दिल्ली में वारदात की. ४० साल के एक पुरूष ने नाबालिक लड़की का बलात्कार करने की कोशिश की. एक औरत ने अपने दफ्तर के मेनेजर पर बलात्कार का आरोप लगाया है. यह कुछ खबरें आज के अखबार से हैं. लगभग रोजाना ही ऐसी कितनी खबरें अखबारों में छपती हैं. ऐसी कितनी वारदाते हैं जिनके बारे कुछ नहीं छपता. पर पुलिस आयुक्त कहता है कि अपराध कम हो रहे हैं और मुख्य मंत्री यह बात मान लेती है.

मेरे एक मित्र ने कहा, "मुख्य मंत्री को तो यह बात माननी ही थी. जब प्रधान मंत्री ने उन की पीठ ठोकते हुए सफ़ेद झूट बोला था कि दिल्ली देश का सबसे खूबसूरत, हर-भरा और साफ़-सुथरा शहर है, तो भी तो मुख्य मंत्री ने सर झुका कर मान लिया था. दिल्ली वासियों को गन्दा पानी सप्लाई किया जाता है पर सरकार दिल्ली जल बोर्ड की तारीफ़ करती है. यह तो सब एक दूसरे की तारीफ़ करने का षड़यंत्र है इस देश की जनता के ख़िलाफ़." एक और मित्र बोले कि घोड़े और पुलिस के न आगे रहना चाहिए न पीछे, पता नहीं कब दुलत्ती मार दे.

मेरे घर के पास कई महीनों से दिल्ली जल बोर्ड की तरफ़ से गहरे सीवर का काम चल रहा है. देश के वायु और ध्वनि प्रदूषण कानूनों का खुलाम खुल्ला उल्लंघन हो रहा है. डीजल इंजन कान फोड़ने वाला शोर मचाते हैं और हवा में काला धुआं छोड़ते हैं. मुख्य मंत्री, जिनकी कम से कम एक फोटो रोज अखबारों में छपती है, दिल्ली वासियों को अपने कर्तव्यों की याद दिलाती रहती हैं. जनता के पैसे से छपे इन विज्ञापनों में वह इतनी व्यस्त रहती हैं कि अपने कर्तव्यों की उन्हें याद ही नहीं आती.

Wednesday 16 July 2008

रिश्वत लो कानून तुम्हारे साथ है

दिल्ली में इस साल अब तक ६० लोग ब्लू लाइन बसों के नीचे आकर जान गवां चुके हैं. सरकारी बाबुओं का कहना है कि यह पूरे सिस्टम की समस्या है, सजा देने से हल नहीं होगी. लगता है इन बाबुओं ने अखबार में वह ख़बर पढ़ ली थी जिसमें अदालत ने कहा था कि नाबालिक लड़कियों के बलात्कारियों को सजा नहीं देनी चाहिए बल्कि सुधारा जाना चाहिए.
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गुजरात में मेहसाना में स्त्री-पुरूष का अनुपात इतना गड़बड़ा गया है कि समलेंगिक पुरुषों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही हे. एहमदाबाद के समलेंगिक पुरुषों की मेहसाना में मांग बहुत बढ़ गई है. मेहसाना के धनी पुरूष इन को अपने यहाँ बुलाते हैं और खाने पीने की पार्टियाँ करते हैं. एक समलेंगिक के अनुसार उसे हर महीने में लगभग १० काल आती हैं. उस के ग्राहक उसे एहमदाबाद से पिक अप करते हैं और रास्ते में किसी गेस्ट हॉउस में टिक जाते हैं. इस समलेंगिक के अनुसार, एहमदाबाद में उस जैसे दर्ज़न समलेंगिक और भी हैं जो मेहसाना के ग्राहकों को एन्टरटेन करते हैं.
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केन्द्र में सरकार बचाने के लिए रिश्वत का बाज़ार गर्म हो रहा है. राजनितिक पार्टियां तरह तरह की रिश्वत मांग रही हैं. कुछ अकेले एमपी भी अपना रिश्वत का रेट बता रहे हैं. कानून इस काम में उनकी मदद कर रहा है. दस साल पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा केस में सुपीम कोर्ट ने जो फ़ैसला दिया था उसके अनुसार एमपी को रिश्वत लेने का संवैधानिक अधिकार है. बस शर्त यह है कि उसे, जैसे वोट डालने के लिए रिश्वत दी जा रही है, वह वोट उसे डालना होगा. उस समय भी कांग्रेस की सरकार थी और प्रधान मंत्री नरसिम्हाराव थे. आज भी कांग्रेस की सरकार है और प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह हैं.
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केन्द्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि सूचना कानून के अंतर्गत राष्ट्रपति के घर के फोन नंबर, इ-मेल और मोबाइल नंबर जनता को नहीं बताये जा सकते. यह फ़ैसला एक आम नागरिक के पेटिशन पर आया जो उसने सूचना अधिकारी द्बारा यह सूचना न देने के ख़िलाफ़ दायर किया था. आयोग के अनुसार यह सूचना व्यक्तिगत सूचना के अंतर्गत आती है. सब जानते हैं कि राष्ट्रपति को यह सुविधाएं जनता के पैसे से उपलब्द्ध कराई जाती हैं. वह व्यक्तिगत कैसे हो गई? आम आदमी अपने पैसे से मोबाइल नंबर लेता है और बैंक इत्यादि उसे रात दिन फोन करके परेशान करते रहते हैं. पर उस के पैसे से राष्ट्रपति को दिए गए फोन का नंबर उसे नहीं बताया जा सकता.
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बिल्लियाँ वही करती हैं जो वह चाहती हैं.
वह आपकी बात मुश्किल से सुनती हैं.
वह न जाने कब क्या कर बैंठे.
जब आप खेलना चाहते हैं वह अकेले रहना चाहती हैं.
जब आप अकेले होना चाहते हैं वह खेलना चाहती हैं.
वह मूडी होती हैं.
वह अपने बाल हर जगह गिराती फिरती हैं.
क्या आपको यह सब पढ़ कर किसी और की याद आती है?

एक चिट्ठी कामरेड सोमनाथ जी के नाम

कामरेड सोमनाथ जी,

आज कल लोग आपकी राजनितिक शुचिता की बात करने लगे हैं. कुछ लोगों ने तो इस पर ब्लाग पोस्ट भी लिख डाली हैं. कैसे अनजान हैं यह लोग कि यह भी नहीं जानते कि राजनितिक शुचिता कुर्सी के साए में पनपती है और जब जैसी जरूरत हो रंग बदलती है. आपको अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए कुछ तो कारण चाहिए, और बीजेपी की आड़ लेकर तो बहुतों ने अपनी कुर्सी बचाई है. यह सरकार ही बीजेपी की आड़ लेकर बनी है और इतने दिन चलती रही है. अगर आप भी बीजेपी की आड़ लेकर अपनी कुर्सी बचाते हैं तो इस में क्या बुराई है?

मैं आपको एक राय देना चाहूँगा. अगर आप बीजेपी के साथ मिल कर वोट नहीं करना चाहते तो सरकार के पक्ष में वोट दे देना. अगर आप यह कहें की इस से तो आपका वोट डील के पक्ष में हो जायेगा तब यह आपकी पार्टी को पहले से सोचना चाहिए था. मुझे लगता है कि आपसे ज्यादा समझदार तो अमर सिंह हैं. उन्होंने तो कह दिया अडवानी बुश से ज्यादा खतरनाक हैं, इस लिए उनकी पार्टी बुश का समर्थन करेगी. अब आप तो अडवानी और बुश दोनों के बराबर ख़िलाफ़ हैं. मेरी बात मानिये, सरकार को फ़िर से समर्थन की चिट्ठी दे दीजिये. परदेसी आका कुछ देर के लिए नाराज होंगे, पर आपकी कुर्सी तो बची रहेगी. मुलायम को भी धोखा देने की सजा मिल जायेगी. सोनिया जी खुश हो जायेंगीं. अडवानी का सपना पूरा होने से पहले ही टूट जायेगा. एक तीर से कई शिकार हो जायेंगे.

अगर आपको मेरी राय पसंद आए और आपकी कुर्सी बच जाए तो लोक सभा दीर्घा का एक पास भिजवा दीजियेगा.

Monday 14 July 2008

बहुत अच्छा लगता है आज कल सुबह अखबार पढ़ना

आज कल अखबार पढ़ने में बहुत मजा आ रहा है. सालों से एक दूसरे के दुश्मन गले मिल रहे हैं. अमर सिंह गले मिले कांग्रेस से. कुछ दिन पहले उन के अनुसार कांग्रेस ने उन्हें कुत्ते की तरह ट्रीट किया था. आज वह कांग्रेस की गोद में बैठे हैं. उन्होंने पिछली बार कांग्रेस का समर्थन न करने की महान भूल की माफ़ी भी मांग ली है. अब मनमोहन जी के प्रिय मित्र बुश उन्हें अच्छे लगने लगे हैं. ऐसा इसलिए भी हुआ है कि अडवानी अब उनके शत्रु हैं और वह बुश से ज्यादा खतरनाक हैं.

अमर सिंह के कांग्रेस से गले मिलने के बाद गले मिलने की प्रतियोगिता शुरू हो गई है. करात मायावती से गले मिल रहे हैं. अडवानी से लगता है वह जल्दी ही गले मिलने वाले हैं. इसके लिए अडवानी को मुसलामानों का विरोध करना बंद करना है. अडवानी ने इस बारे में पहल भी कर दी है. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तब वह मुसलामानों के साथ बैसा ही व्यवहार करेंगे जैसा हिन्दुओं के साथ करते हैं. उनकी पार्टी किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी. करात कांग्रेस से भी हमेशा के लिए गले मिलना बंद करना नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि भविष्य में भी वह कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं.

जब कोई किसी से गले मिलता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है. मुन्ना भाई एमबीबीएस मैंने इसलिए कई बार देखी कि उसमें मुन्ना भाई लोगों को प्यार की झप्पी देता है. अगर हमारे देश में सब एक दूसरे के गले मिलने लगें तो मारकाट काफी हद तक कम हो जाए. कितना अच्छा लगेगा यह देख कर कि जिधर जाइये लोग एक दूसरे के गले मिल रहे हैं. लोक सभा में फ़िर मारा मारी नहीं होगी. बस नेता लोग एक दूसरे के गले मिलेंगे. स्पीकर आर्डर-आर्डर चिल्लायेंगे पर कोई उनकी नहीं सुनेगा और बस गले मिलते रहेंगे.

Thursday 10 July 2008

भीख मांग कर पुलिस को रिश्वत दी

एक मोटा संपन्न दिखने वाला व्यक्ति नगर सेठ की पत्नी के घर पहुँचा और सेठानी से मिलने की इच्छा जाहिर की. सेठानी दान करने के लिए बहुत मशहूर थीं. यह कहा जाता था कि उनके द्वार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता.
उस व्यक्ति ने दुःख भरी आवाज में कहा, "में आपका ध्यान एक बहुत ही गरीब परिवार की और दिलाना चाहता हूँ . पिता मर चुके हैं. माता एक बहुत ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त है. उसके नौ बच्चे भूख से व्याकुल छटपटा रहे हैं. अगर उन्होंने तुंरत ही मकान का किराया नहीं दिया तो उन्हें मकान से निकाल कर सड़क पर फैंक दिया जायेगा. क्या आप किराए के पाँच सौ रुपए दान में देंगी?"
"कितने दुःख की बात है!", सेठानी ने द्रवित स्वर में कहा, "पर क्या में जान सकती हूँ कि आप कौन हैं?".
उस व्यक्ति ने आँखें पोंछते हुए कहा, "में उनका मकान मालिक हूँ".
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डेनिस के छोटे भाई का चर्च में बेपतिस्म हुआ. जब वह घर लौट रहे थे तब डेनिस सारे रास्ते रोता रहा. उसके पिता ने पूछा कि वह क्यों रो रहा है?
डेनिस ने रोते हुए जवाब दिया,"पादरी कह रहे थे कि वह चाहते हैं कि हमारी परवरिश एक अच्छे क्रिस्चियन परिवार में हो, पर में आप और मामा के साथ रहना चाहता हूँ".
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"अरे तुमने सुना, पाकिस्तान में मुस्लिम औरतें जिहाद के लिए बच्चे पैदा करेंगी", सुबह का अखबार बांचते हुए पति ने पत्नी से कहा.
पत्नी बोली, "चलो अच्छा हुआ, अब मुल्लाओं को उन्हें आतंकवादी बनाने में कोई मेहनत नहीं करनी होगी. पले पलाये आतंकवादी सप्लाई किए जायेंगे."
"मैं सोच रहा था कि अगर हर देश की मुस्लिम औरतों ने यह फ़ैसला कर लिया तो क्या होगा?", पति ब्रड़बड़ाऐ.
"तो क्या होगा?", पत्नी ने जवाब दिया, "हर मुस्लिम आतंकवादी नहीं है इस पर बहस ख़त्म हो जायेगी".
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"लालू जी मुंबई रेल आतंकवादी हमले में घायल लोगों को अदालत में खींच रहे हैं", सुबह का अखबार बांचते हुए पति ने पत्नी से फ़िर कहा, "मुआबजे पर दिए गए व्याज का पैसा वापस मांग रहे हैं".
"लालू जी और उनकी सरकार कुछ भी कर सकती है", पत्नी ने कहा, "आखिरकार आम आदमी की सरकार है यह", पत्नी ने कहा.
"ख़ाक आम आदमी की सरकार है यह, जिंदगी दूभर कर दी इस सरकार ने आम आदमी की. अरे जितना व्याज नहीं है उस से ज्यादा वकील खा जायेंगे मुकदमें में", पति गुस्से से चिल्लाये.
"चिल्ला कर अपने ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ाते हो?", पत्नी ने समझाया, "यह वकील, डाक्टर, व्यापारी, पुलिस, गुंडे ही तो हैं इस सरकार के आम आदमी".
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"अरे तुम कह रही थीं न कि हमारा बेटा बहुत बिगड़ गया है, उसे सुधारने के लिए कुछ करो", पति घर में घुसते हुए जोश में चिल्लाये,
"अरे कैसे सुधारोगे यह तो बताओ?", पत्नी ने आशाप्रद स्वर में कहा.
"आज की ख़बर है कि अदालत बच्चिओं के बलात्कारियों को सजा नहीं देगी, बल्कि सुधारेगी", पति ने समझाया.
"पर हमारे बेटे ने तो किसी बच्ची का बलात्कार नहीं किया", पत्नी ने कहा.
"अरे तो अब करेगा न, उसे समझाओ कि तुंरत किसी बच्ची का बलात्कार करे जिससे अदालत उसे सुधार सके", पति अत्यन्त उत्साहित स्वर में बोले.
माता जी ने कहा, "हाँ अभी समझाती हूँ, पर देखो तुम भी समझाना. तुम ठीक से समझा पाओगे, है भगवान् आप कितने दयालु हो, अब हमारा बेटा सुधर जायेगा".
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"देखो आज से किसी भिखारी को झिड़कना मत", पति अखबार पढ़ते हुए बोले.
"क्यों ऐसा क्या हो गया आज?", पत्नी ने पूछा.
"एक गरीब आदमी का बेटा रोड एक्सीडेंट में मारा गया. पुलिस ने ऍफ़आईआर दर्ज करने और जांच करने के लिए रिश्वत मांगी. बहुत परेशान हो कर वह आदमी अदालत के दरवाजे पर बैठ गया और भीख मांगने लगा. वह कहता था मुझे भीख दो जिस से में भ्रष्ट पुलिस वालों को रिश्वत दे सकूं. दो दिन में उसने २८० रुपए जमा किए और उनका ड्राफ्ट बनाकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजा है. यह निवेदन किया है कि वह यह पैसा अपने भ्रष्ट पुलिस वालों में बाँट दें ताकि वह उसके बेटे की मौत की जांच कर सकें", पति ने बताया.
"हाँ यह बात तो है पता नहीं कौन बेचारा पुलिस को रिश्वत देने के लिए भीख मांग रहा हो?", पत्नी ने सहमति जतायी.

Wednesday 9 July 2008

और अब अदालत भी ..........

आज एक ख़बर पढ़ी, पढ़ कर बहुत बुरा लगा. दिल्ली हाई कोर्ट उन अपराधिओं को सजा नहीं देना चाहता जो बच्चियों का बलात्कार करते हैं. अदालत चाहती है कि इन अपराधिओं को सुधारा जाए, सजा न दी जाए. जिन बच्चिओं का बलात्कार हुआ उनके बारे में किसी को चिंता नहीं है. उन पर क्या गुजरती है, उनके परिवार वालों पर क्या गुजरती है, इस के बारे में सोचने का अदालत के पास समय नहीं है या वह इसे जरूरी नहीं समझती.

एक एनजीओ के अनुसार, जितने बलात्कार भारत में होते हैं उनमें मात्र ४.८% केसों में अपराधियों को सजा मिल पाती है, अवयस्क लड़कियों के साथ हुए बलात्कार का प्रतिशत ५०% है. जरा सोचिये,पहले ही १०० बलात्कारों में पाँच अपराधियों को सजा मिल पाती है, और अब इन पाँच को भी अदालत सजा नहीं देगी. उन्हें सुधारा जायेगा. आगे क्या होगा, शायद कोई प्रगतिशील अदालत इन बलात्कारियों को ईनाम भी दे डाले.

Tuesday 8 July 2008

उनका घर बसाने में उजड़ गया अपना घर

वह गए थे उनका घर बसाने,
उन्होंने उनका घर ही उजाड़ दिया,
नेता जी ने इसे कायरता करार दिया,
और कहा,
हमारे लोग उनका घर बसाने जाते रहेंगे,
क्यों नहीं?
नेता जी का घर थोड़े ही उजड़ा है?
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'उन्होंने मुझे कुत्ते से ज्यादा बुरा ट्रीट किया है',
उन्होंने यह कहा था तब,
'देश हित में उनकी सरकार बचानी है',
यह कह रहे हैं वह अब,
जब हो रहा है करार पर करार,
जरूर बचेगी उनकी सरकार.
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'अडवानी बुश से ज्यादा खतरनाक हैं',
इसलिए हम बुश के हाथ से मिलवायेंगे,
कांग्रेस का कटा हुआ हाथ,
पायेंगे ईनाम में कुछ मंत्रिपद,
जायेंगे हमारे ख़िलाफ़ मुकदमें ठंडे बस्ते में,
फ़िर से आएगी ताकत हमारी मुट्ठी में,
पर कर रहे हैं हम यह सब,
देश और जनता के हित में.
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कम्युनिष्टों के एक भूतपूर्व प्रसंशक ने कहा,
बहुत निराश किया हमें करात ने,
ताकत की मुट्ठी खोल दी,
फिसल गई ताकत मुलायम की मुट्ठी में,
बेबकूफी की ऐसी मिसाल कहीं देखी है आपने?
'म' से मनमोहन, 'म' से मार्क्सवादी,
अब हो गए,
'म' से मनमोहन, 'म' से मुलायम.

Wednesday 2 July 2008

खोज, एक चुटकुला

एक दिन बॉस को छुट्टी के दिन अपने कम्पूटर आपरेटर को जरूरी काम के लिए आफिस बुलाना पड़ा. उसने उस के घर फ़ोन किया. फ़ोन किसी बच्चे ने उठाया. बॉस ने कहा 'हेलो, क्या आपके पापा घर में हैं?'
'हैं', बच्चे ने फुसफुसाती आवाज में कहा.
'क्या में उनसे बात कर सकता हूँ?'
'नहीं', बच्चा फ़िर फुसफुसाया.
'क्या तुम्हारी मॉम घर में हैं?'
'हाँ'
'क्या में उनसे बात कर सकता हूँ?'
'नहीं', बच्चा फ़िर फुसफुसाया.
'क्या कोई और घर में हैं?"
'हाँ, एक पुलिसवाला', बच्चा फुसफुसाया.
'क्या में पुलिसवाले से बात कर सकता हूँ?'
'नहीं, वह बिजी हैं'
'किस बात में बिजी हैं?'
'पापा और मॉम से और फायरमेन से बात कर रहे हैं', फुसफुसाती आवाज आई.
बॉस को चिंता हुई. चिंता और गहरी हो गई जब उन्होंने एक हेलीकाप्टर की आवाज सुनी. उन्होंने पूछा, 'यह आवाज कैसी है?'
'हेलीकाप्टर की' बच्चे ने फुसफुसाते हुए जवाब दिया.
'वहां क्या हो रहा है', बॉस ने पूछा. वह अब काफी परेशान हो गए थे.
फुसफुसाती आवाज में जवाब आया, 'अभी-अभी हेलीकाप्टर से सर्च टीम नीचे उतरी है'
'वह क्या खोज रहे हैं?' बॉस अब काफी चिंतित हो गए थे.
'मुझे', बच्चे ने फुसफुसाया.

दो बेटियॉ भारत की

यह कहानी नहीं है यथार्थ है,
दो बेटियॉ भारत की,
एक एक छोर की,
दूसरी दूसरे छोर की,
एक महान,
दूसरी सबके लिए अनजान,
एक को मिलती है टॉप सिक्योरिटी,
दूसरी को सिक्योरिटी से ही खतरा है,
पहली के बारे मैं क्या कहें?
दूसरी की बात करते हैं.

गरीब माँ करती है काम,
सुबह से शाम,
तब जुटा पाती है दो वक्त की रोटी,
कैसी पढ़ाई, कैसी लिखाई,
तन ढकने को पूरे कपड़े नहीं,
नोचती हैं गन्दी निगाहें,
माँ रहती है परेशान,
डर लगता है बेटी अकेली है झोपड़ी मैं,
कुछ अनहोना न हो जाए,
और एक दिन हो जाता है,
वही जिसका डर था.

घुस आते हैं झोपड़ी मैं वहशी दरिंदे,
करते हैं वलात्कार,
मार डालते हैं पीट पीट कर,
कोई नहीं सुनता उसका चीत्कार,
कोई नहीं आता बचाने को,
ख़बर छपती है अखबार मैं,
एक दिन बस एक दिन.
फ़िर दूसरे दिन दूसरी ख़बर,
एक और दूसरी बेटी की.

देश की प्रथम नागरिक महिला,
देश की कर्णधार महिला,
प्रदेश की मुखिया महिला,
और ढेर सारे कानून,
पुलिस की लम्बी कतार,
सब व्यर्थ, सब बेकार.

शास्त्र कहता है,
‘जहाँ होता है नारी का सम्मान,
वहाँ करते हैं देवता निवास’,
मनाया होगा कंचक एक दिन,
की होगी पूजा इन बेटियोँ की,
माँ, बहन, पत्नी ने,
इन वहशी दरिंदों की,
कहाँ पहुंचे हैं हम?
कहाँ पहुंचेंगे हम?