दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Saturday 3 May 2008

पागल कौन है?

आज एक फ़िल्म देखी, "Crazy 4". चार पागलों की कहानी है. देख कर मन में एक सवाल उठा, वास्तव में पागल कौन है, वह जो पागलखाने के अन्दर हैं या वह जो पागलखाने के बाहर हैं? अगर आप यह फ़िल्म देखेंगे तब आप भी इसी सवाल से रूबरू होंगे. कहानी के अंत में एक पागल कहता है अपने डाक्टर से, 'हमें वापस पागलखाने ले चलिए, हम इस समाज के लायक नहीं है'. डाक्टर कहती है, 'नहीं, यह समाज तुम्हारे लायक नहीं है. यहाँ हर आदमी अपने लिए जीता है और दूसरों को मारता है'. कितनी सही बात है यह.

फ़िल्म की बात करें तो यह एक अच्छी फ़िल्म है. और भी अच्छी हो जाती अगर राखी सावंत और शाहरुख़ के आईटम नंबर फ़िल्म से निकाल दिए जाते. उनका कहानी से कुछ लेना देना नहीं. राखी ने एक भद्दा नाच प्रस्तुत किया. बच्चों के साथ फ़िल्म देख रहे थे. वह कुछ मिनट बहुत शर्मिंदगी में बीते.

कहानी की प्रश्ठभूमि में राजनीतिबाजों की छत्र छाया में पलता आतंक है. एक राजनीतिबाज अपनी निजी स्वार्थसिद्धि के लिए अपनी पत्नी का अपहरण करवाता है. पर उस के रास्ते में यह चार पागल आ जाते हैं. घटनाक्रम ऐसे चलता है कि राजनीतिबाज और उसे मदद करने वाला एक भ्रष्ट पुलिस अफसर गिरफ्तार हो जाते हैं. छोटी सी कहानी है पर उसमें पागलखाने से बाहर रहने वाले नंगे हो जाते हैं.

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