दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Monday, 31 January, 2011

भ्रष्टाचार मुक्त भारत राष्ट्र

एक, सौ, हजार, लाख,
क़दमों का मार्च,
भ्रष्टाचार के खिलाफ,
जनता ने बनाया वोट बेंक,
भ्रष्टाचार के खिलाफ,
नागरिकों ने बनाया कानून,
भ्रष्टाचार के खिलाफ,
शपथ ली वोट करेंगे,
भ्रष्टाचार के खिलाफ,
हाथ से हाथ मिलाया,
भ्रष्टाचार के खिलाफ,
खड़ा हो रहा है भारत राष्ट्र,
भ्रष्टाचार के खिलाफ.

Tuesday, 25 January, 2011

फांसी पर लटका गणतंत्र !!!

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दूं,
या शोक प्रकट करूं?
राजतन्त्र और परिवारतंत्र,
धकेल रहा है गणतंत्र को,
एक गहरी, अँधेरी खाई में,
छटपटा रहा है गणतंत्र,
सांस रुक गई है उस की,
भ्रष्टाचार का पोषण,
ईमानदारी का शोषण,
हिंसा का तांडव,
अहिंसा सर छुपाये डरी-डरी,
चंद वोटों के लिए,
नफरत फैलाते राक्षस,
पुलिस की छत्रछाया में,
नारी को अपमानित करते लम्पट,
टूटते परिवार, सामजिक मर्यादाएं,
प्रदूषित होते मानवीय सम्बन्ध,
हे मेरे देशवासियों,
तुम ही मार्ग दर्शन करो,
किस बात की वधाई दूं,
इस २६ जनवरी को?

Thursday, 20 January, 2011

अधिकार और जवाबदेही

ऐसा क्यों होता है?
जिस के अधिकार जितने ज्यादा,
उतनी ही कम जवाबदेही,
प्रधानमंत्री अधिकार का मूर्तरूप हैं,
पर जवाबदेही में निराकार हैं,
कीमतें कम नहीं कर पाए,
कह दिया मैं ज्योतिषी नहीं हूँ,
बात ख़त्म हो गई,
आतंक समाप्त नहीं कर पाए,
कह दिया कुछ समस्याएं हैं,
बात ख़त्म हो गई,
भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि,
आम आदमी की जिंदगी नर्क हो गई है,
प्रधानमंत्री चाहते हैं,
लोग उन्हें सीजर की पत्नी मान लें.

Monday, 17 January, 2011

मुस्लिम वोटों की दुल्हन

सरकारी जमीन पर,
जहाँ बनना था सामुदायिक केंद्र,
वहाँ बना दी मस्जिद,
अवैध तरीके अपना कर,
कुछ लोग गए अदालत में,
'गिरा दो', अदालत ने आदेश दिया,
डीडीए ने अवैध मस्जिद गिरा दी.

ईमाम साहब भड़क उठे,
लोगों को भड़का दिया,
वह दंगे पर उतर आये,
कारों, बसों, की तोड़-फोड़ हुई,
मुख्य मंत्री दौड़ी गईं इमाम के पास,
वचन दिया, फिर बनेगी मस्जिद,
नमाज पढो वहां, इजाजत दी,
अदालत, यह क्या होती है?
अदालत का आदेश, यह क्या होता है?
मैं, मेरी पार्टी, मेरी सरकार,
सब धर्म निरपेक्ष हैं.

मेला लग गया,
इमाम के दरबार में,
पहले मुलायम हाजिर हुए,
फिर अमर और जयप्रदा,
गृह मंत्री, नगर विकास मंत्री,
उन्होंने भेजे नुमाइंदे,
एक बेचारी अकेली,
मुस्लिम वोटों की दुल्हन,
किस के गले में डाले,
वोटों की वरमाला?

Saturday, 15 January, 2011

डरो धर्मनिरपेक्ष लोगों से

मुझे डर लगता है उन लोगों से,
जो कहते हैं स्वयं को धर्मनिरपेक्ष,
धर्म आधारित है जिन सिद्धांतों पर,
हैं सत्य, अहिंसा, ईमानदारी,
और अर्थ है धर्मनिरपेक्ष होने का,
धर्म से निरपेक्ष होना,
यानि धर्म से न कुछ लेना, न कुछ देना,
क्या अर्थ हुआ इस का?
सत्य, अहिंसा, ईमानदारी से,
न कुछ लेना, न कुछ देना,
इस लिए मुझे डर लगता है उन लोगों से,
जो कहते हैं स्वयं को धर्मनिरपेक्ष,
सब को डरना चाहिए,
इन धर्मनिरपेक्ष लोगों से
आपको भी.