दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Saturday, 15 January, 2011

डरो धर्मनिरपेक्ष लोगों से

मुझे डर लगता है उन लोगों से,
जो कहते हैं स्वयं को धर्मनिरपेक्ष,
धर्म आधारित है जिन सिद्धांतों पर,
हैं सत्य, अहिंसा, ईमानदारी,
और अर्थ है धर्मनिरपेक्ष होने का,
धर्म से निरपेक्ष होना,
यानि धर्म से न कुछ लेना, न कुछ देना,
क्या अर्थ हुआ इस का?
सत्य, अहिंसा, ईमानदारी से,
न कुछ लेना, न कुछ देना,
इस लिए मुझे डर लगता है उन लोगों से,
जो कहते हैं स्वयं को धर्मनिरपेक्ष,
सब को डरना चाहिए,
इन धर्मनिरपेक्ष लोगों से
आपको भी.

2 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

सही कहा... लेकिन इतनी दूरी न बनायें..ब्लाग से.

Anonymous said...

सत्य-असत्य, न्याय-अन्याय, धर्म-अधर्म एक दूसरे के विलोम है । जब सत्यनिरपेक्षता व न्यायनिरपेक्षता शब्द व्यावहारिक नहीं है तब धर्मनिरपेक्ष शब्द व्यावहारिक कैसे हो सकता है । इसलिए भारत पंथ निरपेक्ष देश है ।