दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

Sunday 18 October 2009

दीवाली बाद की पहली सुबह

दीवाली आई, दीवाली गई,
कुछ बदला क्या?
नहीं, कुछ नहीं बदला,
फिर कर दी बेकार,
एक और दीवाली.

खूब पटाखे बजाये,
खूब शोर मचाया,
पर जगे नहीं, सोते रहे,
प्रगाढ़ निद्रा में,
झूट, चोरी, बेईमानी,
नफरत, हिंसा, अन्याय की.

खूब दिए जलाए,
मोमबत्तियां जलाईं,
विजली की रंग-बिरंगी,
झालरें जलाईं,
पर मिटा नहीं अँधेरा,
मन, कर्म, वचन का.

Friday 16 October 2009

आई दीवाली, आई दीवाली

आई दीवाली, आई दीवाली,
खुशियाँ लेकर आई दीवाली.

चाची ने घर खूब सजाया,
मम्मी ने भी हाथ बटाया,
मैंने और सिया ने मिल कर,
उनकी हिम्मत खूब बढ़ाई.
आई दीवाली, आई दीवाली,
धन धान्य ले आई दीवाली.

चाचा लाये अनार, फुलझडी,
पापा लाये बिस्कुट मेवे,
दादी लाई मिठाई बताशे,
खील, खिलोने, दीया-बाती,
आई दीवाली, आई दीवाली,
मुहं मीठा कर आई दीवाली.

जय लक्ष्मी माता की जय हो,
जय गणपति वापा की जय हो,
जय सरस्वती माता की जय हो,
जय हो, जय हो, सब की जय हो.
आई दीवाली, आई दीवाली,
रंग-बिरंगी आई दीवाली.

Saturday 3 October 2009

आराम हलाल है

एक मंत्री ने ट्विटर पर ट्वीट किया,
बापू के जन्मदिन पर सब काम करें,
पढ़ कर अच्छा लगा,
कोई है तो है काम करने वाला,
यह और बात है कि कुछ दिन पहले,
यही मंत्री जी शिकायत कर रहे थे,
काम बहुत ज्यादा है दफ्तर में.

बापू ने कहा कर्म पूजा है,
बापू ने तो सिर्फ दोहराया था,
अर्जुन को कुरुशेत्र में,
कृष्ण ने यही समझाया था,
पर आज़ाद भारत में,
बहाने ढूँढ़ते हैं सब काम से बचने के,
सरस्वती पूजा पर न पढेंगे, न लिखेंगे,
विश्वकर्मा पूजा पर मशीनें बंद रखेंगे,
आजादी क्या आई सोच उलट गया,
आराम हराम से हलाल हो गया.

Friday 2 October 2009

कब तक कुप्रयोग करोगे बापू के नाम का?

बापू का नाम भुनाया तुमने,
आज़ादी से पहले,
आज़ादी के बाद,
अपनी निजी स्वार्थसिद्धि के लिए,
सिर्फ नाम ही भुनाया,
बापू का कोई गुण नहीं अपनाया,
आज भी लगे हो,
बापू का नाम भुनाने में,
करोडों रुपये के विज्ञापन,
अपनी तस्वीरों के साथ,
जरा नहीं शरमाये शामिल करने में,
अपने भ्रष्ट आचार में बापू का नाम,
भ्रष्टाचार में डूबी नरेगा योजना को,
देने चले हो बापू का नाम.

Monday 28 September 2009

क्या इस बार भी सिर्फ रावण ही जलेगा?

हर साल जलाते हो तुम रावण को,
क्या इस बार भी सिर्फ रावण ही जलेगा?
रावण से जुड़ी बुराई कब जलेगी?
कभी सोचा है तुमने?
तुम राम की पूजा करते हो,
पर करते हो प्रतिनिधित्व रावण का,
राम का कोई आदर्श नहीं अपनाया,
रावण की हर बुराई अपना ली,
किसे धोखा देते हो जला कर रावण?
खुद को, रावण को, राम को?
क्यों नहीं जला देते उस नफरत को?
जो तुम्हें इंसानियत का दुश्मन बनाती है,
जो तुम्हें राम से दूर ले जाती है.

Saturday 26 September 2009

चाँद खतरे में है

कल टीवी पर खबर देखी,
चाँद पर पानी मिला है,
देखते देखते सो गया,
आँख खुली तो देखा,
चाँद पर मीटिंग चल रही है,
बहुत चितित हैं चाँद वाले,
अब क्या होगा?
इंसान ने पहले धरती खराब की,
अब चाँद को खराब करेगा,
चाँद पर पहले से गड्ढे हैं,
पर इंसान आकर सड़क बनाएगा,
फिर उसमें गड्ढे करेगा,
चाँद पर साफ़ पानी है,
पर इंसान पहले उसे गन्दा करेगा,
फिर साफ़ करने के यंत्र लगायेगा,
ठीक करने के नाम पर,
सब गड़बड़ कर देगा,
छुपा लो पानी,
बचा लो चाँद को,
वर्ना पानी के चक्कर में इंसान,
चाँद को धरती बना देगा.

Wednesday 23 September 2009

कब तमीज सीखोगे तुम?

अरे ओ दिल्ली वालों,
कब तमीज सीखोगे तुम?
शीला दीक्षित, तेजिंदर खन्ना,
और अब पी चिदंबरम,
सबका मन दुखता हे,
तुम्हारे असभ्य व्यवहार से,
पर तुम निकाल देते हो,
इस कान से सुन कर उस कान से,
कब बदलोगे अपना असभ्य सोच?

कामनवेल्थ खेलों में,
आयेंगे बड़े-बड़े मेहमान,
जिनके थे तुम गुलाम,
जिनके लिए बना रही हैं शीला जी,
सात सितारा मूत्रालय,
क्या सोचेंगे वह?
जब देखेंगे तुम्हारा असभ्य व्यवहार,
कितनी शर्म आयेगी,
सरकार को, सोनिया जी को,
पर तुम नहीं सुधरोगे,
बदतमीज कहीं के.

मैं लिख रहा था जब यह अकविता,
मेरी पोती ने पूछा,
बाबा क्यों करते हैं हम आयोजित यह खेल?
कौन सी है यह कामनवेल्थ?
कहाँ हे यह वेल्थ?
किस किस में कामन हे यह वेल्थ?
पता नहीं बेटी,
शायद मालूम हो देश के तहजीबदारों को,
उसने कहा, 'अब तो हम आजाद हैं',
मैंने कहा, 'कहते तो यही हैं,
पर शायद हैं नहीं'.

Sunday 20 September 2009

आओ मजाक करें

मनमोहन जी ने कहा,
जो थरूर ने कहा,
मजाक में कहा.
शर्मा जी को अच्छा नहीं लगा,
वर्मा जी ने समझाया,
क्या गलत कहा?
बाबू और राजनीतिबाज,
मजाक ही तो करते हैं जनता से,
साठ साल हो गए यह मजाक होते,
पर आप अभी भी नहीं समझ पाए.
थरूर पहले बाबू थे,
अब राजनीतिबाज हो गए हैं,
सो मजाक कर रहे हैं जनता से,
यही हाल मनमोहन जी का है,
मजाक को समझा करो,
क्या हर समय बुरा मान जाते हो?
शर्मा जी बोले,
ठीक है भाई,
अब तुम भी मजाक कर लो.
देखें कितने दिन चलता है यह तमाशा,
खर्चा बचाने का,
और एक बात बताऊँ?
कल काली भेंस गोरी गाय से कह रही थी,
अब बर्दाश्त नहीं होतीं,
इंसान की यह हरकतें,
खुद को हमसे मिलाते हैं,
थरूर और मनमोहन
कभी मिल गए तो,
ऐसा सींग मारूंगी,
सब मजाक भूल जायेंगे.

Friday 11 September 2009

मीठा-मीठा मैं, कड़वा-कड़वा तू


रोज सुबह दिल्ली के अखवारों में,
छपते हैं अनेक विज्ञापन,
सरकार का हर अच्छा काम,
दर्शाते हैं यह विज्ञापन,
और छपती है इन विज्ञापनों में,
मुख्य मंत्री की तस्वीर.

अखवार में निकला एक समाचार,
सरकार के एक स्कूल में,
भगदड़ मच गई,
पांच लड़कियां मर गईं,
चौतीस घायल हो गईं,
छह गंभीर रूप से,
कारण अवव्यवस्था, कुप्रशासन,
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना,
मतलब सरकार की गलती,
भुगती बच्चों ने.

नहीं छपा कोई विज्ञापन,
सरकार के इस बुरे काम पर,
मुख्य मंत्री की तस्वीर के साथ,
मात्र उन्होंने दुःख प्रकट किया,
और ज्यादा महान हो गईं.

और महान हो जायेंगी,
अगर जांच कराई तो,
बाबुओं को हो जायेगी सजा,
जनता को दिखाने को,
मीठा-मीठा मैं, कड़वा-कड़वा तू .


Monday 24 August 2009

ईश्वर की सच्ची पूजा

मानवीय संबंधों का आदर करो,
परिवार के प्रति कर्तव्यों का पालन करो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

बड़ों का आदर करो,
उनके सुख दुःख का ध्यान रखो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

बच्चों से प्रेम करो,
उन्हें सही शिक्षा दो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

पड़ोसियों से प्रेम करो,
उनके लिए परेशानी का कारण मत बनो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

समाज, राष्ट्र के प्रति बफादार रहो,
उन पर वोझ नहीं, सहायक बनो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

किसी से नफरत नहीं, सबसे प्रेम करो,
हर जीव में ईश्वर का दर्शन करो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

ईश्वर प्रेम है, प्रेम ईश्वर है,
प्रेम ईश्वर की सच्ची पूजा है.

Sunday 16 August 2009

राष्ट्रपति ने चाय पिलाई

राष्ट्र ने मनाया स्वतंत्रता दिवस,
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री,
राज्यपाल और मुख्यमंत्री,
सबने औपचारिकता निभाई,
आम आदमी को भाषण सुना कर,
आम आदमी ने भी निभाई,
यह सारे भाषण सुन कर.

भाषण सुनने का और सुनाने का,
सुन सुना कर तुरत भूल जाने का,
अनवरत चल रहा है,
सिलसिला इस राष्ट्रीय बीमारी का,
अजीब सी बीमारी है,
क्या भाषण दिया भूल जाते हैं,
पर भाषण देना नहीं भूलते.

शाम को राष्ट्रपति ने चाय पिलाई,
देश के गणमान्य लोगों को,
हर बार की तरह इस बार भी,
हमें नहीं बुलाया,
इंतज़ार करते करते हो गए हम,
आम आदमी से वारिष्ट आम आदमी,
पर गणमान्य नहीं बन पाए,
कल्लू मवाली गया था चाय पीने,
पिछला लोक सभा चुनाव जीत कर,
बन गया था वह गणमान्य.

Friday 14 August 2009

पंद्रह अगस्त - क्या भूल गए क्या याद रहा

मैं बच्चा था एक वर्ष का,
जब पंद्रह अगस्त आया था,
आधी रात सूरज निकला था,
माँ ने मुझको बतलाया था,
आजादी के रंग में रंग कर,
नया तिरंगा फहराया था,
कई सदियों के बाद आज फिर,
भारत माता मुस्काई थी,
कितने बच्चों की कुरबानी
देकर यह शुभ घडी आई थी.

रंग-बिरंगे वस्त्र पहन कर,
हम सब विद्यालय जाते थे,
झंडा फहरा, राष्ट्र गान गा,
सब मिल कर लड्डू खाते थे,
दिन भर हा-हा-हू-हू करते,
रंग-बिरंगी पतंग उडाते,
मौज मनाते, ख़ुशी मनाते,
थक जाते, जल्दी सो जाते.

अब सोते हैं सुबह देर तक,
छुट्टी का आनंद लूटते,
लाल किले की प्राचीरों से,
कुछ न कुछ हर साल भूलते,
बना दिया बाज़ार राष्ट्र को,
भूल गए अपना इतिहास,
बने नकलची बन्दर हम सब,
अपना नहीं बचा कुछ पास.

राष्ट्र मंच पर कहाँ खड़े हैं,
नायक हैं या खलनायक है,
हैं सपूत भारत माता के,
या उसके दुःख का कारण हैं?
छह दशकों के दीर्घ सफ़र में,
कितने कष्ट दिए हैं माँ को,
माँ की आँखें फिर गीली हैं,
जागो अरे अभागों जागो.

Wednesday 5 August 2009

वर्ल्ड क्लास शहर का वर्ल्ड क्लास पार्क





समझ नहीं पाता हूँ मैं,
शिकायत करुँ या करुँ धन्यवाद?
दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार,
कौन है धन्यवाद का हकदार?
सांसद, एम्एलए, पार्षद,
किसे पहनाऊं प्रशंसा का हार?
उपराज्यपाल, डीडीए उपाध्यक्ष,
किस की प्रशंसा का हूँ मैं कर्जदार?
डीडीए डिस्ट्रिक्ट पार्क पश्चिम पुरी,
गढ़ रहा है नए मानक लगातार,
इंसान करते हैं योग, प्राणायाम,
पास मैं सूअर करते हैं विहार,
गाय चरती हैं कूड़ा पार्क में,
कुतिया करती है बच्चों से दुलार,
युवा चलाते हैं वाइक पार्क में,
बच्चे रहते हैं साइकिल पर सवार,
अम्मा फेंकती हैं कूड़ा पार्क में,
बाबा बीड़ी पी कर करते हैं हवा में सुधार,
भैया टहलाते हैं कुत्ता पार्क में,
भाभी की आँखों से छलकता है प्यार,
बच्चे दौड़ते हैं क्यारियों में,
फूल तोड़ता है परिवार,
क्रिकेट और फुटबाल खेलकर,
घास का करते जीर्णोद्दार
खाली बोतल खोजते बीपीएल बच्चे,
दारू पीकर फेंक गए थे छोटे सरकार,
कल मनाई थी पिकनिक पार्क में,
कूडादान करता रहा इंतज़ार,
वर्ल्ड क्लास शहर है दिल्ली,
बारी जाऊं मैं बारम्बार,
क्लिक करो यदि निम्न लिंक पर,
खुल जायेंगे चित्र हज़ार.

Sunday 19 July 2009

बलात्कार एक दलित महिला का

एक दलित महिला का बलात्कार हुआ,
राजनीतिबाज सक्रिए हो उठे,
मीडिया ने खबर तोड़नी शुरू कर दी,
जिसको जिसमें जैसा फायदा लगा,
उसने वही बात कहनी शुरू कर दी.

बल्लात्कार बन गया एक बिजनेस,
नेता वोट कमाने लगे,
मीडिया रीडरशिप रेटिंग, 
सरकार ने कर दी घोषणा,
आर्थिक सहायता की,
सामजिक कार्यकर्त्ता दौड़ पड़े,
कमाने को अपना कमीशन,
मिल कर सरकारी बाबुओं के साथ. 

खंडित तन, खंडित मन,
खुद पर ही शर्मसार,
लुटी-पिटी दलित महिला,
बहाती रही आंसू,
अँधेरे कमरे के एक कोने में,
बलात्कारी घूमते रहे सड़कों पर,
सीना ताने, बिना किसी डर के,
किसी और शिकार की तलाश में.

देश की मुखिया एक महिला,
सरकार के मुखिया की मुखिया एक महिला,
प्रदेश की मुखिया एक महिला,
बलात्कार का शिकार एक महिला,
रोती हुई बोली अपने पिता से,
बाबू सरकार ने भी किया बलात्कार मेरा,
कीमत लगा दी मेरी इज्जत की,
कोई फर्क नहीं दिखाई दिया,
मुझमें और एक वैश्या में. 

Friday 3 July 2009

कचरादान

कचरा ही कचरा हर तरफ़,

घर मे कचरा, घर के बाहर कचरा,

सड़क पर कचरा, पार्क मे कचरा,

मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च,

सब जगह कचरा ही कचरा,

दिमाग मे कचरा, जुबान पर कचरा,

जो काम किया वह भी कचरा,

मानवीय सम्बन्ध हो गये कचरा,

बेटे ने माँ बाप का किया कचरा,

पत्नी ने पति का, पति ने पत्नी का,

प्रेमी के साथ मिल कर किया कचरा,

बेटी को बाप से खतरा,

बहन को भाई से खतरा,

पवित्र प्यार का कर दिया कचरा,

गुरु-शिश्य का सम्बन्ध हुआ कचरा,

सरकार कचरा, सरकारी बाबू कचरा,

वकील कचरा, जज कचरा,

पुलिस ओर अदालत कचरा।

 

एक कहानी पढी थी ''थूकदान',

सड़क पर चलता हर आदमी,

लेखक को दिखता था थूकदान,

आदमी बात करे आपस मे,

लेखक को दिखाई दे,

थूक रहे हे एक दूसरे मे,

कहानी वही हे, बस नाम बदला हे,

मेरी रचना का नाम है 'कचरादान'

 

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