दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday, 4 August, 2011

१५ अगस्त १९४७

क्या हुआ था १५ अगस्त १९४७ को?
क्या देश आजाद हुआ था उस दिन?
या यह एक भ्रम था जो फैलाया गया,
भारत की जनता को झूट बताया गया,
कुर्सी के लालची दावेदारों द्वारा,
बापू ने भी सत्य का साथ छोड़ दिया,
नेहरु को गद्दी दिलाने के लिए,
देश आजाद नहीं हुआ था,
मात्र अदला-बदली थी सत्ता की,
आजादी आई २६ जनवरी को,
जब देश एक गणराज्य बना,
इस बीच आजादी का मुखौटा पहन,
देश बना रहा एक डोमिनियन,
ब्रिटिश राज्य की,
सत्ता के भूखे देते रहे धोखा,
जनता को.

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