दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday 17 April 2008

मक्खनी सतह पर दलित नेता

वह नेता हैं दलितों के,
जब से नेता बने संघर्षरत हैं,
दलितों के उत्थान के लिए,
ऊंची जाति, नीची जाति,
नीची जाति में ऊंची-नीची जाति,
हर दलित बन गया एक अलग जाति,
यह महान योगदान है उनका,
भारतीय समाज को, राष्ट्र को.

वह ख़ुद भी दलित हैं,
शुरुआत उन्होंने ख़ुद से की,
खूब उत्थान किया अपना,
अब भी कर रहे हैं, करते रहेंगे,
'मक्खनी सतह' का नाम मिला उन्हें,
मक्खन खाया और चिल्लाया,
दलितों को यह दो, दलितों को वह दो,
पर अपनी जेब से उन्होंने,
किसी दलित को कुछ नहीं दिया.

एक ऐसे दलित नेता भी हैं,
जिन्होनें दलितों से ही उपहार लेकर,
अपनी तिजौरी मैं भर लिया,
जिस दलित के सर पर छत नहीं,
उस ने नेताजी को महल उपहार में दिया,
वाह रे भारत के दलित,
और वाह रे दलितों के नेता.

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