दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Wednesday 29 October 2008

एक आंसू बहाओ उन के लिए

आज हमारे देश में हर तरफ़ गरीबी और बीमारी दिखाई देती है, पर हम अपना अधिकाँश समय और सामर्थ्य आपस में लड़ने में व्यर्थ गवां देते हैं. क्या कभी हमने अपने गरीब और बीमार देशवासियों दर्द महसूस किया है? क्या कभी  हमने उनके लिए एक आंसू बहाया है? 

स्वामी विवेकानंद ने कहा था 

"क्या तुम तैयार हो अपनी मात्रभूमि के लिए हर बलिदान करने को? अगर हाँ, तब तुम इस देश को गरीबी और बीमारी से मुक्ति दिला सकते हो. क्या तुम जानते हो कि हमारे करोड़ों देशवासी भूखे और बीमार हैं? क्या तुम उन का दर्द महसूस  करते हो? क्या कभी तुम उन के लिए एक आंसू बहाते हो?" 


On the photo, Vivekananda has written in Bengali, and in English: 
“One infinite pure and holy—beyond thought beyond qualities I bow down to thee” - Swami Vivekananda

3 comments:

श्रीकांत पाराशर said...

Kahan bache hain swami vivekanand ke updeshon ko mannewale? jab tak aadmi khud mushibat men nahi fansta tab tak vah hath pair nahi marta. agar har vyakti thoda thoda bhi rashtra ke prati apne dayeetva ko nibhane lag jaye to phir samsyayen rahengi hi nahi.

COMMON MAN said...

theek likha hai, baat yah hai ki yahan koi sochna hi nahi chahta, sochega to kuchh karne ki ichcha hogi aur karne ke liye haath pairo ko kasht dena padega.

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी मै श्रीकांत पाराशर जी की बात से सहमत हुं आप ने बहुत ही सुन्दर ढग से बात कही है.
धन्यवाद