दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Tuesday 14 October 2008

ब्लाग 'मोहल्ला' - हिंदू और हिंदू धर्म को गालियाँ

जब मैं पहली बार मोहल्ले पर गया था तो मुझे इस ब्लाग के सूत्रधार से एक बैचारिक स्नेह सा हो गया था. पर अब तो उस ने मेरे उस स्नेह की धज्जियाँ उड़ा दी हैं. अब तो इस सूत्रधार का काम केवल हिन्दुओं और उन के धर्म को गाली देना ही रह गया है. एक और ब्लाग्कारा ने अपने ब्लाग पर लिखा था कि कुछ हिन्दुओं का काम ही पानी पीकर मुसलामानों को कोसना है. अब वह इस ब्लाग के सूत्रधार से मिल कर ख़ुद पानी पीकर हिन्दुओं को कोसा करती हैं.

पिछले कुछ दिनों से इस ब्लाग पर जो भी लेख छपता है उस में केवल हिन्दुओ और उनके धर्म को गालियाँ दी जाती हें। मैंने इस बात पर ऐतज़ार दर्ज किया। आज जब में इस ब्लाग पर गया तो मैंने पाया कि मेरी कोई टिपण्णी इस ब्लाग पर छप नहीं पा रही है। कारण मैं नहीं जानता। हो सकता है ब्लाग सूत्रधार ने कोई बंदिश लगा दी हो। ब्लाग के नए लेख में पुलिस की बर्बरता को भी मजहबी जामा पहना कर हिन्दुओं और हिंदू धर्म की निंदा की गई है। मेरी टिपण्णी है -

"पुलिस क्या है, यह सब जानते हैं. पुलिस द्बारा नागरिकों पर क्या अत्त्याचार किए जाते हैं, यह भी सब जानते हैं. इन अत्त्याचारों में से वह चुन कर लाना जो मुसलमानों से सम्बंधित हैं तो इस ब्लाग और इस के सूत्रधार को क्या कहें? पुलिस का इन अत्त्याचारों के पीछे एक ही मकसद होता है, पैसा. हर मामले में जिस पार्टी की और से पुलिस को ज्यादा फायदा मिलता है, वह उस की तरफ़ रहती है. इस बारे में पुलिस किसी का धर्म नहीं देखती. वह देखती है केवल पैसा. अब इस अत्त्याचार को मजहबी जामा पहना दिया जाना तो बहुत ग़लत बात है. ऐसे ब्लाग लेख समाज में वैमनस्य को और हवा देते हैं. नेता तो यह करते ही हैं, पिछले कुछ दिनों से कुछ ब्लागकार भी यह करने लगे हैं. मोहल्ला इस का एक जीता-जागता उदहारण है.

इस ब्लाग के सूत्रधार और हिन्दुओं और उन के धर्म के लिए गाली-गलौज की भाषा प्रयोग करने बालों से मैं यही पूछना चाहूँगा कि ऐसा करके वह किस का फायदा कर रहे हैं? क्या वह ब्लाग रचना इस लिए करते हैं कि समाज में नफरत का और ज्यादा प्रचार करें? नफरत से कभी किसी को कुछ नहीं मिला, और न ही इन्हें कुछ मिलेगा। इंसानियत को मजहबी जामा पहनाने से केवल नुकसान होगा फायदा नहीं. मुद्दों को एक तरफा नजर से देखने से मुद्दे सुलझते नहीं और उलझ जाते हैं. प्रेम की बात करो, नफरत की बात मत करो. प्रेम से आप किसी का दिल जीत सकते हैं, नफरत से नहीं. इस लिए हिन्दी ब्लाग जगत के ब्लाग्कारों, प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से."

अब तो मोहल्ले पर केवल गाली-गलौज ही नजर आती है। एक अच्छे ब्लाग का यह पतन दुःख का कारण है।

6 comments:

COMMON MAN said...

hinduon ka udaarvadi hona hi iska kaaran hai, muslimon ke khilaf kuchh likenge to sar kalam ho jaayega, isiliye main kahta hoon ki muslimon se nahi aise hinduon se jyada khatra hai.

श्रीकांत पाराशर said...

Aapne theek kaha hai. lekhkon par samaj ki bhi badi jimmedari hoti hai, phir chahe vah blog lekhak hi kyon na hon. samaj men nafrat failane walon ne hi desh ka bantadhar kiya hai. hinduon ko gali dena aasan hai, isliye koi bhi de sakta hai. hindu khud hi dete hain.koi bhi musalman muslimon ki khilafat nahin karta, chahe kitna hi udarwadi lekhak ho, buddhijeevi ho. sare path hinduon ko padhaye jate hain.aisa vatavaran hi un logon ke man men bhi vaimanashyata ke beej bota hai jo muslimon ka bhi aadar karte hain unke dharm ki ijjat karte hain.asali dushman yahi log hain jo bair-bhav paida karte hain. khair, aapto achhe kam karte jayeeye.aapke man ki peeda ko samjha ja sakta hai.

फ़िरदौस ख़ान said...

आपकी एक बात की मैं क़ायल हूं...आप मेरी किसी पोस्ट पर जमकर अपनी भड़ास निकालते हैं, तो पोस्ट अच्छी लगने पर प्रशंसा भी करते हैं...वरना कुछ लोग ऐसे हैं की जब उन्हें अपनी भड़ास निकालनी होती है तभी कमेंट्स करते हैं...वरना नहीं...इससे ज़ाहिर होता है उनका एकमात्र मक़सद मुझे कोसना ही है...ख़ैर...

मैंने 'सरस्वती को धरती पर लाने की कवायद' स्टोरी पोस्ट की तो मुझे कोसने वाले लोगों ने प्रशंसा के दो शब्द भी नहीं लिखे...लेकिन आपने इस स्टोरी को सराहा...जब मैं ब्लॉग की दुनिया में नई थी तब मैंने मोडरेशन लगाया हुआ था...आपके बहुत से कमेंट्स मैंने प्रकाशित नहीं किए थे...उससे आपको तकलीफ़ हुई थी...उसका मुझे बेहद अफ़सोस है...मैंने फ़ौरन मोडरेशन हटा लिया...मैं नहीं चाहती की मेरी वजह से किसी को ज़रा भी दुख हो...मैं कट्टरपंथ की घोर विरोधी हूं...मैंने कट्टरपंथी मुस्लिम रहनुमाओं का हमेशा विरोध किया है...इसी तरह कट्टरपंथी ईसाइयों और हिन्दुओं का भी विरोध करती हूं...

मैं मज़हब में नहीं...इंसानियत में यक़ीन रखने वाली लड़की हूं...आप मेरी पोस्ट पर जो भी भला-बुरा लिखना चाहें आपका इस्तक़्बाल करती हूं...आपका हर शब्द मेरे लिए आपका आशीष ही होगा...

जय हिंद...

कमलेश मदान said...

लगता है आप अविनाश के मोहल्ले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं, अगर जानना है तो क्रपया करके मेरे इन ब्लॉग्स को और इसमें दी गयी टिप्पणियों को एक बार गौर फ़रमायें

http://sunobhai.blogspot.com/2008/04/blog-post_16.html

http://sunobhai.blogspot.com/2008/04/blog-post_17.html

Suresh Chandra Gupta said...

मोहल्ला पर जो हो रहा है वह उचित नहीं है. इस सब का क्या उद्देश्य है मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ. सूत्रधार को चाहिए अपने ब्लाग को संभालें. इसे धर्म को गाली-गलौज का माध्यम न बनने दें. मैंने कहीं पढ़ा कि मोहल्ला के सूत्रधार ने अपने ब्लाग पर हिंदू कट्टरवादियों के ख़िलाफ़ जिहाद छेड़ा हुआ है. क्या यह सच है? अगर सच है तो यह किस प्रकार का जिहाद है? कट्टरवादियों के ख़िलाफ़ बोलिए. हम भी उस में सहयोग करेंगे. पर कट्टरवादी तो हर धर्म के अनुयाइयों में हैं. लेकिन हर धर्म में उदारवादी भी हैं, और इन की संख्या कट्टरवादियों से कहीं ज्यादा है. कट्टरवादी जो कर रहे हैं उस के आधार पर धर्म को गाली देना ग़लत है. यहाँ यह जिहाद नहीं रह जाता. जो गाली-गलौज मोहल्ला पर हो रही है वह शर्मनाक है. उसे रोका जाना चाहिए. मोहल्ला के सूत्रधार को अपनी जिम्मेदारी समझकर इसे रोकना चाहिए.

नारदमुनि said...

sir jee aisa hee kuchh bhadas par ho raha hai. us gandagi se alag ho gya. blog ko ek sanskriti,sanskar hamare parv tayohar or hamare ek dusare ke vicharon ka aadan pradan ka sadhan hai magar usme shabdon ki garima to honi chahiye.