दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Monday 27 October 2008

क्या आमिर अली आतंकवादी है?

मीडिया ने उसे आतंकवादी कहा. उसे 'मानव बम' नाम दिया. लेकिन यह सब हुआ इसलिए कि मीडिया के पास पूरी जानकारी नहीं थी, और न ही मीडिया ने कोई जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश की. बस तुंरत आमिर पर अपना फ़ैसला सुना दिया. 
 
आमिर एक डाक्टर था, लन्दन में रहता था, अपने परिवार से मिलने भारत आता है. एअरपोर्ट पर एक मवाली दिखने वाला एक अफसर उसके सामान की चार बार तलाशी लेता है और कुछ न मिलने पर बहुत निराश होता है. आमिर उस से पूछता है कि अगर उस का नाम अमर होता तो क्या वह इतनी बार उस की भी तलाशी लेता? मवाली अफसर और मवाली नजर आने लगता है.

आमिर एअरपोर्ट से बाहर आता है. फ़िर उसके साथ शुरू होता एक दिल देहला देने वाला चक्कर - कैसे शिक्षित मुसलमान आतंकवादी बनाए जाते हैं? कौम के नाम पर उसे आतंकवादी बनने पर मजबूर किया जाता है. उस के परिवार का अपहरण कर लिया गया है, उसे धमकी दी जाती है कि अगर उस ने उनके कहने के अनुसार काम नहीं किया तो उन्हें मार डाला जायेगा. मां के दिल का सकून, तीन बहनों और एक भाई का प्यारा भाई, आमिर मजबूर हो जाता है उन की बात मानने को. 

उसे एक सूटकेस किसी को पहुंचाने का काम सौंपा जाता है. बस में बैठ जाने पर उसे पता चलता है कि सूटकेस मैं बम है. उसे बताया जाता है कि पाँच मिनट में बम फट जायेगा, इस लिए वह तुंरत बस से उतर जाय. वह बस से उतर जाता है, पर बस में से एक बच्चा उसे देख कर मुस्कुराता है और हाथ हिलाता है. आमिर फ़िर बस में चढ़ जाता है, सूटकेस उठाता है और बस से उतर कर खुली जगह की तरफ़ भागता है. उधर कुछ मजदूर सड़क पर गड्ढा खोद रहे हैं. वह चिल्लाता है, 'सूटकेस में बम है, जल्दी से भाग जाओ'. सब दूर भाग जाते हैं. आमिर के हाथों में सूटकेस है, जिसमें बम है, बम फटता है, आमिर मर जाता है. 

मीडिया को बस इतना मालूम था. उन्होंने उसे मानव बम कहा. यह भी कहा कि वह बम लेकर बस से उतर गया और खाली जगह की तरफ़ भागा,पर इसका कारण उन के अनुसार यह था कि आमिर आखिरी वक्त पर डर गया. अगर बम बस में फट जाता तो सैकड़ों लोग मारे जाते. आमिर ने अपनी जान दे दी पर आतंकवादियों की नापाक साजिश को कामयाब नहीं होने दिया. उसने अपनी जान दे कर सैकड़ों लोगों की जान बच ली. 

क्या आप आमिर को आतंकवादी कहेंगे? मैं तो नहीं कहूँगा. आमिर मेरा हीरो है. मैं उसे सलाम करता हूँ. ऐसे बहुत से आमिर होंगे इस देश में, जिन्हें आतंकवादी बनाने की कोशिशें की जा रही हैं. बहुत से बन भी गए होंगे. पर यह आमिर नहीं बना. आज देश को ऐसे आमिरों की जरूरत है. 

नोट - आप सोच रहे होंगे कि यह क्या कहानी लिखी है मैंने. यह कहानी मैंने नहीं लिखी. मैंने इसे देखा टीवी पर. अगर आप भी देखना चाहते हैं तो उस फ़िल्म का नाम है 'आमिर'.  

7 comments:

COMMON MAN said...

media ke saath-saath neta bhi inhen aatankvadion se jod rahe hain, aatankvadion ko pakde jaane par is tarah se dikhaya jaata hai jaise ki inhe pakdne ka matlab poori kaum ko pakdana hai.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
दीवाली आप के और आप के परिवार के लिए सर्वांग समृद्धि लाए!

संजय बेंगाणी said...

आमीर फिल्म देखी और पसन्द भी आयी.

Anonymous said...

आमिर का तो पता नही पर हाँ फिरदौस जरूर लगती है...पिछले कई दिनों से वे अपने ब्लॉग पर आग उगल रही है,ब्लोग्वानी ओर चिटठा जगत से अपील है ,उनके ब्लॉग को हटाया जाये

मिहिरभोज said...

ये तो बहुत ही बुरा हुआ

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

सुन्दर और सकारात्मक पोस्ट। मैं आपकी कलम को सलाम करता हूं।
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Manish Dixit said...

Gupta ji,
Aap to film ki baat kar rahe hain.
Main jald hi aapko kuchh asal logo ke bayan bataunga aur unka detail jahan par uplabdh hai, uska pata bhi doonga. Rahi baat mere lekh par likhe samanya naagrik ki to ye hamare aapke sochne ki baat hai ki jin manhanubhavon ke naam maine apne blog par diye hai, wo log samanya naagrikon ki shreni me nahi aate hain. Wo sab vishist person hain. Wo khud kah rahe hain. Jab unhe nahi chhoda ja raha hai to samanya nagrik ke liye koi aashcharya nahi. Agar use kai baar check kiya jata hai to kya galat hai. Mera kahne ka abhipray yahi hai ki aakhir kyon Aamir ki jagah Amar hota to itni checking nahi hoti. Sirf isliye ki aajtak jitne bom-cases hue hai, sab kisi na kisi aamir, taushib ya fir anwar se jude rahe hain na ki kaushal, kishor ye fir Janmejay se. aur aise samay bhi in visist persons ke muh se ek baar bhi jor ki awaj me nahi nikalta ki in aatankwadiyon ko sareaam faansi par latka dena chahiye. Mere agle lekh me aapko kuchh aur vivran milenge.