दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Tuesday 23 December 2008

एक नेता चाहिए

मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत का हर नागरिक एक स्वर में बोल रहा है आतंकवाद के ख़िलाफ़ (उनको छोड़ कर जिनके ईमान में देश के लिए बफादारी नहीं). इस अप्रत्याशित एकता को संजोये रखने के लिए और इस विचारधारा को सही दिशा देने के लिए आज देश को एक नेता की जरूरत है. 

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के बाद इस देश में कोई नेता पैदा नहीं हुआ. कहते तो बहुत हैं ख़ुद को नेता पर कहने से क्या होता है, हकीकत में तो यह सब मात्र राजनीतिबाज हैं जो राजनीति का व्यवसाय करते हैं. चुनाव में पैसा लगाते हैं और जीत जाने पर हजारों गुना नफा कमाते हैं. इनका मजहब पैसा है. इनका ईमान पैसा है. 

देश को एक ऐसा नेता चाहिए जिसका धर्म, ईमान सब कुछ देश हो, जिसके मन, वचन और कर्म में जनता की सेवा ही एकमात्र उद्देश्य हो. जो शासक नहीं सेवक हो. काश एक ऐसा नेता मिले इस देश को. 

3 comments:

COMMON MAN said...

सही लिखा है आपने, ये सब लेता हैं, नेता एक भी नहीं.

Alag sa said...

आपने सही कहा कि आजादी के बाद कोई नेता पैदा नहीं हुआ। अब जो चीज देश में नहीं होती उसे बाहर से मंगाना पड़ता है तो--------

Suresh Chandra Gupta said...

राजेश्वरी तोमर ने अपनी टिपण्णी ऐ-मेल द्वारा मुझे भेजी है. उनकी टिपण्णी यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ.

"हमारे देश में चुनाव एक व्यवसाय का रूप ले चुका है. जो एक बार जीत जाता है, वो पूरे ५ साल तक इसे वसूल कर लेना चाहता है. हम आम लोगों में भी जागरूकता की कमी है, ज़ाहिर है हम आम लोगों का भी ऐसा मंच होना चाहिए जहाँ हम देश और समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठा सकें और ऐसा भी नहीं है कि कोई भी नेता बनने लायक न हो. उदाहरण के लिए कुछ वर्ष पहले हमारे चुनाव आयुक्त श्री लिंगदोह हुआ करते थे जो अपने कार्यकाल के बाद सिर्फ़ अपने पालतू कुत्तों के साथ वापस चले गए थे. ऐसे ही और भी इमानदार लोग हैं. ज़रूरत है कि हम ऐसे लोगों को पहचानकर उनसे प्रार्थना करें कि वो भारत को वही वापस शीर्ष पर ले जाने में मदद करें."