दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Monday 10 November 2008

चेतावनी दी ईश्वर ने

कल रात सपने में ईश्वर आए. मैंने उन्हें प्रणाम किया, उन्होंने आशीर्वाद दिया, 'सुखी रहो और सबसे प्रेम करो'.

उन्होंने कहा, 'तुम ब्लाग लिखते हो, आज वह लिखना जो मैं तुम्हें अभी कहने जा रहा हूँ'.
मैंने कहा, 'जैसी आपकी आज्ञा'. 
वह बोलते रहे, मैं लिखता रहा.

"तुम जो करते हो वह तुम्हारे एकाउंट में जमा हो जाता है, तुम प्रेम करते हो तो प्रेम,नफरत करते हो तो नफरत. जितना प्रेम तुम्हारे एकाउंट में होगा उतना लोग तुमसे प्रेम करेंगे. इसी तरह जितनी नफरत तुम्हारे एकाउंट में होगी उतना लोग तुमसे नफरत करेंगे. अगर तुमने किसी की हत्या कर दी तो बदले में कोई तुम्हारी हत्या करेगा. जितनी बार तुम हत्या करोगे उतनी ही बार तुम्हारी हत्या होगी. जितनी बार तुम किसी की मदद करोगे उतनी ही बार लोग तुम्हारी मदद करेंगे. 

तुम जिस दुनिया में रहते हो, अपराध करके उस दुनिया के कानून से बच सकते हो, पर मेरे कानून से नहीं बचोगे. तुम्हारा जरा सा अपराध भी मुझसे छिपा नहीं रहता. तुम मन में किसी के बारे में बुरा सोचते हो, किसी के बारे में बुरा कहते हो, किसी का बुरा करते हो, यह सब अपराध हैं और इन सब अपराधों की सजा मिलेगी. मेरा नाम लेकर तुम जो अपराध करते हो, वह सबसे बड़ा अपराध है. उसकी सजा भी बहुत भयंकर है. 

संभल जाओ, मैं बार-बार समझाने नहीं आऊंगा."

ईश्वर की आज्ञानुसार मैंने यह सब ब्लाग पर लिख दिया, अब आप जानो और आपका ईश्वर जाने. 

12 comments:

mehek said...

sahi kehte hai ishwar,hum jo karte hai uska khata jama hota hai unkepaas,bahut hi achhe vichar aur post

seema gupta said...

मेरा नाम लेकर तुम जो अपराध करते हो, वह सबसे बड़ा अपराध है. उसकी सजा भी बहुत भयंकर है.
संभल जाओ, मैं बार-बार समझाने नहीं आऊंगा
" sach kha ishwar ney, or ishwar ke chaitavnee ko smejna bhut jruree hai...vo bhee smey rehte.."

Regards

संगीता पुरी said...

ईश्‍वर को उन लोगों को समझाना चाहिए , जो वास्‍तव में गुनाहगार हैं । हम गरीबों को समझाकर क्‍या होगा ?

COMMON MAN said...

सत्य वचन, सुन्दर लेखन

Suresh Chandra Gupta said...

संगीता जी, क्या कोई है ऐसा इस दुनिया में जिस ने कभी न कभी कोई न कोई गुनाह न किया हो?

Udan Tashtari said...

सही समझाईश. आपको बधाई ईश्वर के प्रवक्ता नियुक्त होने पर. मिठाई बांटी जाये. :)

शोभा said...

बहुत अच्छा लिखा है.

ab inconvenienti said...

पहला पत्थर वही मारे जो पापी न हो

Suresh Chandra Gupta said...

ईश्वर तो समय-समय पर ऐसी बातें सबसे कहता रहता है. सब इंसान ईश्वर के प्रवक्ता ही तो हैं. हम उस की बात पर अमल करें यह चाहता है वह.

makrand said...

bahut umda lekh

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी बहुत सुंदर , एक बार मेरे बेटे ने मुझ से पुछा पापा भगवान कहा है,तो मेने कहा हमारे दिल मे, बच्चा बहुत हेरान हुआ, ओर पुछा वो हमारी सब बाते सुनता है? मेने कहा हां ओर तुम्हे गलत काम से रोकता भी है? अब बच्चा ओर भी हेरान हुआ, ओर बोला केसे, मेने कहा बेटा जब भी हम कोई भी गलत काम करते है, तो एक पल के लिये हमारे अंदर से एक आवाज आती है, यह काम मत करो, लेकिन यह आवाज बहुत मधंम सी होती है, बेटा झट से बोला हां पापा आती है, तो मेने कहा बेटा यह आवाज हामारी आत्मा से आती है, ओर आत्मा ही प्र्मातमा है,
काश आप का सपना हम सब को आये, हम सब ही अपराधी है,अगर ही इतने अच्छे होते तो यही स्वर्ग होता.
धन्यवाद

अनुपम अग्रवाल said...

अगर आदमी को ये समझ आ जाए तो एक बार फ़िर वो इंसान हो जायेगा
बहुत अच्छे शब्दों में समझाया गया है .बधाई