दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday 20 November 2008

अल्पसंख्यक : बहुसंख्यक

शब्दार्थ की द्रष्टि से अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक - दोनों शब्द सार्थक हैं किंतु राजनीतिक सन्दर्भ में दोनों त्रुटिपूर्ण हैं. राजनीति के छेत्र में इन शब्दों का सदुपयोग कम हुआ है, अधिकांशतः दुरूपयोग हुआ है. उत्तेजना फैलाने और हिंसा भड़काने में ये शब्द बाहक बने हैं. 

राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक नागरिकता की द्रष्टि से समान होता है. जब हम अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का प्रयोग करते हैं, तब राष्ट्र को गौण, जातीयता और प्रांतीयता को प्रधान बना देते हैं. मुसलमान इस्लाम के अनुयाई हैं. हिन्दुस्तान में इस्लाम के अनुयाई अल्पसंख्या में हैं और उसे न मानने वाले अधिक संख्या में. इस अल्प्संखयकता  और बहुसंख्यकता का आधार धर्म-सम्प्रदाय है, राष्ट्रीयता नहीं. राष्ट्रीयता की द्रष्टि से न कोई अल्पसंख्यक है और न कोई कोई बहुसंख्यक. अल्पसंख्यक को वही अधिकार प्राप्त हैं जो बहुसंख्यक को है, और बहुसंख्यक को वही अधिकार प्राप्त हैं जो अल्पसंख्यक को है. धार्मिक विश्वासके आधार पर जैन और बोद्ध भी अल्पसंख्यक हैं. वैदिक धर्म भी अनेक सम्प्रदायों में विभक्त है. बहुसंख्यक कौन है, यह निष्कर्ष निकालना सरल नहीं है. 

राष्ट्रीय मंच पर अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का प्रयोग न हो, यह राष्ट्र के हित में है. 

(लोकतंत्र : नया व्यक्ति नया समाज से साभार) 

7 comments:

COMMON MAN said...

अगडा-पिछडा, दलित-सवर्ण, अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक सभी कुटिल राजनीतिग्यों के बुने हुये जाल हैं, वोटरों को फांसने के लिये.

seema gupta said...

राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक नागरिकता की द्रष्टि से समान होता है.
" yes very well said, its true .."

Regards

रौशन said...

हिज्जे की त्रुटियां पाठ्य को पढने में बाधक होती हैं . आपसे गुजारिश है इसपर विशेष ध्यान दें.
अल्पसंख्यक - बहुसंख्यक शब्द हमें भी नापसंद है
यह समाज में भेदमूलक स्थिति का प्रतीक है और अलगाव बढाता है

Suresh Chandra Gupta said...

अच्छा लगा यह पढ़ कर कि आप को भी अल्पसंख्यक - बहुसंख्यक शब्द नापसंद है. यह शब्द वास्तव में भेदमूलक स्थिति के प्रतीक हैं और समाज में अलगाव बढाते है. राष्ट्रीय मंच पर इन शब्दों का प्रयोग बंद होना चाहिए. इस के लिए अल्पसंख्यक - बहुसंख्यक दोनों वर्गों को प्रयत्न करने होंगे.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

धर्म को विशुद्ध वैयक्तिक मामला बना दें, जो वह वास्तव में है तो न कोई अल्पसंख्यक रहेगा और न ही कोई बहुसंख्यक।

Suresh Chandra Gupta said...

द्विवेदी जी आपने बिल्कुल सही कहा. धर्म एक विशुद्ध वैयक्तिक मामला है. अगर सब ऐसा मानने लगें तो न कोई अल्पसंख्यक रहेगा और न ही कोई बहुसंख्यक.

राज भाटिय़ा said...

सब गोलमाल है जी, वरना तो सभी नगरिक एक समान है, फ़िर भी ....
धन्यवाद हमेशा की तरह से एक अच्छा विचार