दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Saturday 29 November 2008

क्या कभी मनमोहन कह पायेंगे - मैं हूँ न!!!

मुंबई में आतंकवादियों ने हमले किए. जब इन हमलों का फैलाव और न्रशंसता सामने आए तो सरकार को लगा कि कुछ करना चाहिए. अब यह सरकार कहने के अलाबा क्या कर सकती है, तो उस ने तय किया कि प्रधानमन्त्री राष्ट्र के नाम संदेश प्रसारित करें. प्रधानमन्त्री ने ऐसा किया भी. लेकिन उनके संबोधन से पहले जनता के मन में जो डर और आशंकाएं थी, शासन के प्रति जो अविश्वास था,  उस में कोई परिवर्तन नहीं हुआ.  मेरे एक जानकार ने उनका भाषण सुनने के बाद कमेन्ट किया - 'He does not inspire confidence'. 

एक नेता जो जनता के मन में अपने और अपनी सरकार के प्रति विश्वास पैदा नहीं कर सकता, वह देश को आतंकवाद से क्या बचायेगा? जब-तब आतंकी आते रहेंगे और यहाँ-वहां आतंकी हमले करते रहेंगे. इस देश में नागरिक इतनी स्वतंत्रता के साथ इधर-उधर नहीं घूम सकते, जितनी आसानी से आतंकवादी घूमते हैं. सरकार के हर कदम से आतंकवादी संगठनों और आतंकवादियों के मन में इस सरकार के प्रति यह विश्वास और पक्का हो जाता है कि यह सरकार उनके ख़िलाफ़ कभी कोई सख्त कदम नहीं उठाएगी. 

सारा देश चाहता है कि आतंकवादियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्यवाही की जाय, पर यह सरकार ऐसा कोई काम नहीं करना चाहती जिस से उसे वोटों का नुक्सान हो. इस सरकार का हर सोच, हर एक्शन इस से प्रभावित है. इस सबके चलते क्या मनमोहन जी कभी यह कह पायेंगे, 'हे मेरे देशवासियों, घबराओ मत, में हूँ न?' 

8 comments:

सौरभ कुदेशिया said...

kahene ki kya baat hai..agar hote to yeh naubat thode hi aati..

खरी-खरी said...

सत्ताधीशो को अपने बिलो से बाहर निकालने के लिये जरुरी है कि देशवासी दिल्ली की ओर कूच करे और इन कायरो को बिलो से बाहर निकाले। आप शांत हो गये तो इन बेशर्मो को चमडी बदलने मे जरा भी समय न लगेगा।

MANVINDER BHIMBER said...

मैं नमन करती हूं उन सभी शहीदों को जिन्होंने हमारी सुख शान्ति के लिये अपनी जान की बाजी लगायी है।

नारदमुनि said...

soniya mam ijajat dengi to kah dengen. narayan narayan

COMMON MAN said...

main hoon na logon ko shaheed ka darja dilane ke liye, yah to kah hi sakte hain

Pt. D.K.Sharma "Vatsa" said...

हमारा देश राजनीतिक ईच्छाशक्ति मे सचमुच नपुंसक ही साबित हुआ है

Alag sa said...

जिस देश की सत्ता पिछले दरवाजों से थोपे गये जनाधारहीन रोबोटों के बेजान हाथों में भाग्यवश आ पड़ी हो वहां कुछ भी अप्रत्याशित घटना असंभव नहीं है।

राज भाटिय़ा said...

अजी यह कहने के लिये शेर का दिल चाहिये,