दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Wednesday 19 November 2008

मुफ्त हज यात्रा - क्या इस्लाम इस की इजाजत देता है?

पिछले दिनों अखबार में एक ख़बर पढ़ी - हज पेनल की पाँच सितारा मांगें. केन्द्रीय हज कमेटी के १०० अधिकारी अपने परिवार के सदस्यों के साथ मुफ्त हज यात्रा पर चले गए हैं या जाने वाले हैं. यह लोग मुफ्त में हज यात्रा कर के पुन्य कमाएंगे, और सरकार को ८ करोड़ का चूना लगेगा. हकीकत में तो यह चूना जनता को लगेगा क्योंकि सरकार के पास तो जनता का ही पैसा है. 

हज कमेटी ने रियाध और जेद्दाह में भारतीय मिशनों को पत्र लिख कर मांग की कि इन अधिकारिओं और उनके परिवारों को अलग से पाँच सितारा सुविधाएं मुहैया कराई जाएँ. भारतीय मिशनों ने तुंरत नई दिल्ली सरकार से सलाह मांगी, क्योंकि उन्हें प्रधानमंत्री की और से यह हिदायतें दी गई हैं कि वह खर्च में कटौती करें. सरकार ने क्या सलाह दी, ख़बर में इसका कोई जिक्र नहीं है. जाहिर है हरी झंडी दिखाई गई होगी. 

आपने मोहम्मद ओवाईस का नाम तो सुना होगा. यह सज्जन हज कमेटी के सीईओ हैं. इन्होने मांग की कि अधिकारिओं और उनके परिवारों के रूतवे के अनुसार उन्हें अलग से पाँच सितारा रहने की जगह दी जाय जिसमे रसोई और गुसलखाने अलग से हों. अब किनसे अलग रहने की बात हो रही है यहाँ? जाहिर है उन आम मुसलामानों से जो अपने पैसे से हज यात्रा कर रहे हैं. यह अधिकारी इन आम मुसलमानों को सुविधा से यात्रा करवाने के लिए जाते हैं. इस साल इन्होनें पाँच सितारा सुवुधायें मिलें  इस की मांग की है. यह एक धर्म-निरपेक्ष राज्य की पहचान है. 

अब सवाल यह उठता है कि क्या इस्लाम मुफ्त में (यानि दूसरों के पैसे से) हज करने की इजाजत देता है? मैंने कहीं पढ़ा था कि किराए पर जो सब्सिडी दी जाती है वह भी इस्लाम के अनुसार नहीं है. इस तरह की हज यात्रा से कोई पुन्य नहीं मिलता. लेकिन जहाँ फायदा हो रहा हो वहां ऐसा क्यों सोचा जाय या माना जाय? 

3 comments:

विष्णु बैरागी said...

ऐसी मुफ्त यात्राओं से पुण्‍य मिलता या नहीं यह तो पता नहीं लेकिन इसे बनाए रखने में सब समान रूप से लगे हुए हैं । मुसलमानो की नेतागिरी करने वाले तो इसे बनाए रखना चाहते ही हैं, सरकारे भी बनाए रखना चाहती हैं । सारा मामला वोट केन्द्रित है । मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली कांग्रेस सरकार हो या भारत को हिन्‍दू राष्‍ट्र् में बदलने का सपना देखने वाली, संघ संरक्षित भाजपा सरकार हो । कोई भी वोट खोना नहीं चाहता ।
अब तो यह तब ही समाप्‍त होगा जब मुस्लिम समुदाय खुद इसका विरोध करे ।

COMMON MAN said...

आप भी धर्म-निरपेक्ष नेताओं तथा सरकारों के निशाने पर आने वाले हैं, हो सकता है कल ए टी एस आपके यहां आ जाये.अमरनाथ और मानसरोवर पर लगान-हज पर सब्सिडी यह भारत में ही हो सकता है.

राज भाटिय़ा said...

पहले आप वोट दे, अगर हम सब भी पक्के वोटर बन जाये तो हमे भी यह सब मिल सकता है.......क्योकि वोट वेक बहुत मायने रखता है ,
मेने कही पढा था की सही हज एक मुसलमान को तभी करना चाहिये जब उस के पास अपने हक हलाल की कमाई उस हज पर खर्च करने के लिये हो, ओर हज पर जाने वाले मुसलमान को दुनिया के ऎसोआराम इन दिनो त्यागने चाहिये,
धन्यवाद