दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday, 20 March, 2008

एक लड़ाई अभी जारी है

एक लड़ाई अभी जारी है,
कब शुरू हुई कोई नहीं जानता,
किसने शुरू की पता नहीं,
पर शायद हम सब जानते हैं,
बस अपनी जिद मैं मानते नहीं,

और यही जिद इस लड़ाई का कारण है.

यह लड़ाई शुरू हुई तब,
इंसान इस जमीन पर आया जब,
जमाने को अपना अधिकार,
किया उसने प्रकृति का बलात्कार,
हवा, पानी, सूर्य की रौशनी,
चन्दा की चांदनी, जंगल, जानवर,
नदी, नाले, पर्वत, घाटियाँ,
सब बने उस का शिकार,
मचा दिया उसने हाहाकार.

प्रकृति दर्द से कसमसाई,

सूखा पड़ा या वाढ आई,
पर्वतों ने लावा उगला,
मौसम बदले, ऋतुएं बदलीं,
सूनामी ने कहर बरपाया,
इंसान फ़िर भी समझ न पाया,
प्रकृति तो माँ है,
उससे लड़ते नहीं,
उसकी गोद मैं आराम करते हैं.

भगवान् की सबसे अच्छी रचना,
दुश्मन बन गई अपनी,
मानव स्रष्टि समाप्त होने की तैयारी है,
पर यह लड़ाई अभी भी जारी है.


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