दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Tuesday 20 January 2009

क्या इन्हें भारतीय कहा जा सकता है?

मुंबई हमले के बाद सारा भारत आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक हो गया (कांग्रेस के अंतुले और कुछ राजनीतिबाजों को छोड़ कर). शुरू में अंतर्राष्ट्रीय विचारधारा भी भारत के पक्ष में बहुत मजबूत नजर आई पर समय के साथ उस में कुछ नरमी नजर आने लगी. कुछ देश पाकिस्तान के पक्ष में भी दलील देने लगे. अमरीकी भारत में कुछ और पाकिस्तान में कुछ और बयान देते. फ़िर आए ब्रिटेन के विदेश सचिव. इन महाशय ने तो भारत के पक्ष की धज्जियाँ उड़ा दीं. 

भारत - मुंबई हमले में पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों का हाथ है.
ब्रिटेन के विदेश सचिव - नहीं यह ग़लत है, मैं ऐसा नहीं मानता.
भारत - पाकिस्तान मुंबई हमलों के दोषियों को भारत के सौंपे.
ब्रिटेन के विदेश सचिव - नहीं, पाकिस्तान मुंबई हमलों के दोषियों को भारत नहीं सौपेंगा. उन पर पाकिस्तान में ही मुकदमा चलाया जायेगा. 
भारत - पाकिस्तान की जमीन से आतंकवाद पनप रहा है.
ब्रिटेन के विदेश सचिव - नहीं, मुंबई हमलों का सम्बन्ध कश्मीर से है.

कोई भी भारतीय नागरिक इन महोदय को बर्दाश्त नहीं करेगा. मगर कांग्रेस का व्यवहार बहुत ही अजीब रहा. कांग्रेस जिसे भारत के प्रधान मंत्री के रूप में इस देश पर थोपने की कवायद कर रही है, वह ब्रिटेन के विदेश सचिव को अपने चुनाव छेत्र में पिकनिक पर ले जाता है और उसकी खूब खातिर करता है. 

न तो कांग्रेस को, न कांग्रेस सरकार को, न ही इस व्यक्ति को ब्रिटेन के विदेश सचिव के इन भारत विरोधी बयानों में कोई ग़लत बात नजर आती है, न ही कोई अपमान अनुभव होता है. वह देश का अपमान करता है और यह उसे घुमाने ले जाता है और उसकी खातिर करता है. क्या ऐसे लोगों को भारतीय कहा जा सकता है? 

3 comments:

COMMON MAN said...

ab kya kahen, videshi ghuspathion se jyada khatarnak hain yah

राज भाटिय़ा said...

भाई यह देश यह घर इनका होता तो फ़र्क पडता, हम वेबेकुफ़ है जो इन्हे सर पर बिठा रखा है.

विनय said...

राज जी ठीक फ़रमा रहे हैं, सहमत हूँ।

सुरेश जी independence day की जगह गणतंत्र दिवस का नया झंडे का कोड साइट से ले लें।

---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम