दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Friday 2 January 2009

नया साल और बिजली गायब

नए साल का नया सवेरा,
लेकर आया गहरा कोहरा, 
बिजली वालों का उपहार, 
विजली गायब हुआ अँधेरा.

फोन किया जब बिजली दफ्तर,
बिजली वाला बोला हंस कर,
कैसा लगा हमारा तोहफा?
ऐसे कई अनोखे तोहफे,
तुमको पूरे साल मिलेंगे,
दिल्ली वालों को खुश करके, 
हमारे ह्रदय कमल खिलेंगे.

गर्मी में जब बिजली जाए,
तुमको रोना न आ जाए, 
इसीलिए हम सब ने सोचा,
जाड़ों में भी बिजली जाए,
सारे साल बिना बिजली के,
रहने की आदत पड़ जाए.

विकट अँधेरा घिरा देश में,
कैसे घर में आए रौशनी?
घर और देश अंधेरे में हों,
ऐसी हमने कोशिश करनी.

आओ दिल्ली वालों आओ,
हमारे संग तुम हाथ बटाओ,
नया साल मुबारक तुमको,
मोमबत्ती से काम चलाओ. 

2 comments:

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी मन खुश हो गया आप की कविता पढ कर.
धन्यवाद

COMMON MAN said...

भाटिया साहब से सहमत, पूरे देश में यही आलम है, जब दिल्ली में यह हालत होगी तो बाकी देश का अन्दाजा लगाया जा सकता है.