दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Sunday 20 July 2008

वह सठिया गए हैं.........

आप सबने चुटकुले पसंद किए. धन्यवाद.

आज पहले एक चुट्कुली

सोनिया एक कपड़े की दूकान पर गई. सेल्समेन ने उसे बहुत से डिजाइन दिखाए. एक डिजाइन सोनिया को पसंद आया. उस ने सेल्समेन से उस की कीमत पूछी. सेल्समेन ने मुस्कुराते हुए कहा कि एक मीटर की कीमत है एक चुम्बन. सोनिया ने भी मुस्कुराते हुए कहा, 'दस मीटर दे दीजिये'. सेल्समेन ने दस मीटर कपड़ा काटा, पैक किया और सोनिया के हाथ में थमा दिया. सोनिया ने अपने बगल में खड़े एक बिना दांत वाले बुजुर्ग सज्जन की और ईशारा करते हुए कहा, 'पेमेंट मेरे दादा जी करेंगे'.

अब एक चुटकुला

दादा जी को रिटायर होने की पहली वर्षगाँठ पर जो गिफ्ट अपने परिवार से मिली वह था यह कमेन्ट, 'दादा जी अब सठिया गए हैं'. दादा जी को बहुत बुरा लगा. उन्होंने तय किया कि मैं सबको ग़लत साबित करके रहूँगा. रविवार को उन्होंने तय किया कि लान में पानी दिया जाए. जब उन्होंने पानी का पाइप हाथ में उठाया तो उन्हें अपनी कार नजर आई. उन्हें लगा की कार की सफाई करनी जरूरी है.
जैसे ही वह कार की तरफ़ बढ़े उन्हें बरांडे में मेज पर कुछ चिट्ठियां रखी नजर आईं. उन्हें याद आया कि वह सुबह मेल बाक्स से यह चिट्ठिया निकाल कर लाये थे और अभी तक उन्होंने चिट्ठियों को देखा नहीं था. उन्होंने सोचा पहले चिट्ठियां देख ली जाएँ.
उन्होंने चिट्ठियां देखनी शुरू कीं. कुछ बिल थे और कुछ बेकार चिट्ठियां. बेकार चिट्ठियों को मेज के नीचे रखे कूड़ादान में डालने के लिए जब वह नीचे झुके तो उन्होंने पाया कि वह पूरा भरा हुआ था. उन्होंने तय किया कि पहले कूड़ा घर के बाहर बने नगर निगम के कूड़ादान में डाल दिया जाय. जब वह कूड़ादान लेकर चलने लगे तो उन्हें ध्यान आया कि वहीँ पोस्ट बाक्स भी है. जब उधर जा ही रहे हैं तो बिलों के चेक भी पोस्ट कर देंगे.
उन्होंने मेज की दराज से चेक बुक निकाली और पाया कि उस में केवल एक चेक बचा था. उन्हें याद आया कि नई चेक बुक स्टडी रूम की मेज की दराज में रखी है. वह स्टडी रूम की तरफ़ गए तो उन्हें कोक का डिब्बा मिला जो थोड़ी देर पहले उन्होंने फ्रिज से पीने के लिए निकाला था और खाने की मेज पर रख दिया था. उन्होंने सोचा कि चेक लिखने में कुछ देर लगेगी इस लिए कोक का डिब्बा फ्रिज में रख देना चाहिए नहीं तो वह गर्म हो जायेगा. डिब्बा फ्रिज में रखने चले तो उन्हें साइड टेबल पर रखा फूलदान दिखाई दिया जिसमें पानी नहीं डाला गया था. उन्हें लगा कि अगर मैंने इस में पानी नहीं डाला तो फूल मुरझा जायेंगे. इस लिए उन्होंने कोक का डिब्बा वहीँ खाने की मेज पर रख दिया और पानी का जग लेने रसोई घर में गए. वहां उन्हें अपना चश्मा नजर आया जिसे वह सुबह से तलाश कर रहे थे. उन्होंने सोचा कि फूलदान में पानी डालने से पहले चश्मा स्टडी रूम में रख दूँ नहीं तो फ़िर पढ़ने में परेशानी होगी. फ़िर सोचा नहीं पहले फूलों में पानी डाल दूँ. पानी डालने के लिए उन्होंने जग उठाया तो देखा किसी ने टीवी रिमोट किचिन टेबल पर रख दिया है. उन्हें लगा कि पहले रिमोट टीवी के पास रख दूँ नहीं तो जब टीवी देखना होगा तो परेशानी होगी. पर फ़िर उन्होंने सोचा कि पहले फूलों में पानी दे दूँ. जग में पानी भरते समय कुछ पानी फर्श पर गिर गया. कपड़ा लाकर उसे साफ़ किया. अब वह सोच रहे थे कि उन्होंने क्या काम करने का तय किया था. उन्हें कुछ याद नहीं आ रहा था.
दिन बीत गया पर,
लान में पानी नहीं दिया गया,
कूड़ा बाहर निगम के कूड़ा घर में नहीं डाला गया,
कार साफ़ नहीं हुई,
बिल पे नहीं किए गए,
चश्मा सही जगह नहीं रखा गया,
कोक बाहर रखा गरम हो गया,
फूलदान में पानी नहीं दिया गया,
रिमोट टीवी के पास नहीं रखा गया.

अब वह सोच रहे थे कि में सारा दिन व्यस्त रहा पर काम क्या किया? अखबार पढ़ने के लिए चश्मा नहीं मिल रहा. टीवी देखने के लिए रिमोट नहीं मिल रहा. पीने के लिए ठंडा कोक नहीं है. कार गन्दी है. लान सूखा है. फूलदान में फूल मुरझा गए हैं. चेक बुक में बस एक चेक बचा है. बिल कैसे पे होंगे? कूड़ा घर के अन्दर बदबू कर रहा है. उन्हें लगा शायद बच्चे ठीक कह रहे हैं. वह सठिया गए हैं.

6 comments:

ऑफ मूड said...

सुरेश जी आपको अच्छे चुटकलों के लिए बधाई.आपके चुटकले बहुत ही रसीले और चुटीले होते हैं.उम्मीद है ऐसे ही आप ब्लॉगर्स का मनोरंजन करते रहे हैं.

महेंद्र मिश्रा said...

अच्छे चुटकलों के लिए बधाई.

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी, आप के लेखो की तरह आप के चुटकले भी गर्म गर्म हे, बहुर अच्छे लगे धन्यवाद

P. C. Rampuria said...

भाई गुप्ताजी थारा इरादा के सै ? थारे दुसरे चुटकले नै तो म्हारा आण आला कल दिखा दिया ! बड़ी गहरी चोट कर गए आप तो चुटकले कै नाम् पर ! सीधा भविष्य का आइना सामने कर दिया यो तो !
चुट्कली का सारा आनंद चुटकला ले डूब्या !
बात भी सही सै ! फीमेल पै मेल ही भारी पडै सै !

Advocate Rashmi saurana said...

suresh ji, Dadaji to bhut badhiya hai. kaam bhut karte hai. ha ha ha.............

Udan Tashtari said...

मजेदार-आनन्द आया.