अख़बार मैं ख़बर आई,
प्रधानमंत्री का अरुणाचल दौरा,
दौरे मैं घोषड़ा अनुदान की,
आठ हजार करोड़ रुपये,
अरुणाचल के विकास के लिए,
देगी केन्द्र सरकार.
पर क्या सरकार ने गणित बिठाया है?
राहुल ने कहा रुपया पाँच पैसे का है,
क्या इस पर विचार फ़रमाया है?
क्या पाँच पैसे मैं हो पायेगा विकास?
या हर बार की तरह,
विकास होगा कुछ और लोगो का,
रह जाएगा प्रदेश अविकसित.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Saturday, 2 February 2008
Friday, 1 February 2008
जनता का एक रुपया
जनता का एक रुपया,
जनता तक पहुँचते पहुँचते,
पाँच पैसे रह गया,
उन्होंने इस मैं भी राजनीति खेल डाली,
इल्जाम रख दिया दूसरों पर.
हमने पूछा आपको कैसे पता?
अरे आख़िर तक जाकर देखा हमनें,
और बीच मैं क्या देखा,
यह विरोधी पार्टी से पूछिये.
जनता बेचारी क्या करे पूछा हमने,
वह हमें वोट दे उन्होंने कहा,
तब रुपया पहुँच जाएगा जनता तक?
यह भी विरोधी पार्टी से पूछिये.
फ़िर आप क्या करेंगे?
पाँच पैसे की बात फ़िर नहीं कहेंगे.
जनता तक पहुँचते पहुँचते,
पाँच पैसे रह गया,
उन्होंने इस मैं भी राजनीति खेल डाली,
इल्जाम रख दिया दूसरों पर.
हमने पूछा आपको कैसे पता?
अरे आख़िर तक जाकर देखा हमनें,
और बीच मैं क्या देखा,
यह विरोधी पार्टी से पूछिये.
जनता बेचारी क्या करे पूछा हमने,
वह हमें वोट दे उन्होंने कहा,
तब रुपया पहुँच जाएगा जनता तक?
यह भी विरोधी पार्टी से पूछिये.
फ़िर आप क्या करेंगे?
पाँच पैसे की बात फ़िर नहीं कहेंगे.
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मैं और वह
उन्होंने कहा,
हम चुनाव लड़ रहे हैं,
मैंने कहा,
चुनाव कोई लड़ाई नहीं है,
चुनाव एक प्रक्रिया है,
जन प्रतिनिधि चुनने की.
उन्होंने कहा,
प्रदेश मैं हमारा शासन है,
मैंने कहा,
प्रदेश को शासन की नहीं,
प्रबंध की जरूरत है.
उन्होंने कहा,
अरे आप हमें पहचाने नहीं!
मैंने कहा,
लगता है आपको कहीं देखा है,
भाई हम वोट मांगने आए थे आपसे,
और अब किसलिए आयें हैं मैंने पूछा,
फ़िर से वोट मांगने,
पाँच वर्ष हो गए हैं न.
उन्होंने कहा,
हमारी सरकार आम आदमी की सरकार है,
मैंने कहा,
बहुत अच्छी बात है,
पर क्या आप जानते या पहचानते हैं,
आम आदमी को?
उन्होंने कहा,
हम धर्म-निर्पेक्क्ष हैं,
मैंने कहा,
बहुत अच्छी बात है,
पर कथनी को करनी भी बनाइये.
उन्होंने कहा,
देश को खतरा है नक्सलवादियों से,
मैंने कहा,
और धर्म पर आतंक मचाने वाले?
अरे वह तो अपने हैं.
हम चुनाव लड़ रहे हैं,
मैंने कहा,
चुनाव कोई लड़ाई नहीं है,
चुनाव एक प्रक्रिया है,
जन प्रतिनिधि चुनने की.
उन्होंने कहा,
प्रदेश मैं हमारा शासन है,
मैंने कहा,
प्रदेश को शासन की नहीं,
प्रबंध की जरूरत है.
उन्होंने कहा,
अरे आप हमें पहचाने नहीं!
मैंने कहा,
लगता है आपको कहीं देखा है,
भाई हम वोट मांगने आए थे आपसे,
और अब किसलिए आयें हैं मैंने पूछा,
फ़िर से वोट मांगने,
पाँच वर्ष हो गए हैं न.
उन्होंने कहा,
हमारी सरकार आम आदमी की सरकार है,
मैंने कहा,
बहुत अच्छी बात है,
पर क्या आप जानते या पहचानते हैं,
आम आदमी को?
उन्होंने कहा,
हम धर्म-निर्पेक्क्ष हैं,
मैंने कहा,
बहुत अच्छी बात है,
पर कथनी को करनी भी बनाइये.
उन्होंने कहा,
देश को खतरा है नक्सलवादियों से,
मैंने कहा,
और धर्म पर आतंक मचाने वाले?
अरे वह तो अपने हैं.
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Wednesday, 30 January 2008
अँधा बांटे रेबड़ी अपने अपनों को दे
अँधा बांटे रेबड़ी अपने अपनों को दे,
बचपन मैं सुनी थी कहाबत,
चरितार्थ की नेताओं ने,
अटल जी रहे ६ वर्ष प्रधान मंत्री,
विरोधी भी करते रहे तारीफ़,
पर सरकार ने कहा अपने नहीं हैं न
इसलिए नहीं दे सकते भारत रत्न,
प्रणब को कैसे दे दिया पद्म विभूषण?
वह अपने हैं न.
बचपन मैं सुनी थी कहाबत,
चरितार्थ की नेताओं ने,
अटल जी रहे ६ वर्ष प्रधान मंत्री,
विरोधी भी करते रहे तारीफ़,
पर सरकार ने कहा अपने नहीं हैं न
इसलिए नहीं दे सकते भारत रत्न,
प्रणब को कैसे दे दिया पद्म विभूषण?
वह अपने हैं न.
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