दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Wednesday, 30 January 2008

अँधा बांटे रेबड़ी अपने अपनों को दे

अँधा बांटे रेबड़ी अपने अपनों को दे,
बचपन मैं सुनी थी कहाबत,
चरितार्थ की नेताओं ने,
अटल जी रहे ६ वर्ष प्रधान मंत्री,
विरोधी भी करते रहे तारीफ़,
पर सरकार ने कहा अपने नहीं हैं न
इसलिए नहीं दे सकते भारत रत्न,
प्रणब को कैसे दे दिया पद्म विभूषण?
वह अपने हैं न.