दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Friday 13 February 2009

क्या फर्क है मुझमें और तुममें?

"ईश्वर की सत्ता है",
आस्तिक विश्वास करता है,
नास्तिक अविश्वास करता है,
पर क्या वास्तव में,
दोनों ईश्वर की ही बात नहीं करते? 

"प्रेम ईश्वर है"'
स्रष्टि का आधार है,
एक अटूट बंधन है हम सबके बीच,
हमसे यदि कुछ सम्भव है अकारण ही,
वह है प्रेम करना,
या तो हम प्रेम करते हैं,
या हम प्रेम नहीं करते, 
पर क्या वास्तव में,
हम सब प्रेम की ही बात नहीं कहते? 

"हम सब समान हैं"'
हम रावण है किसी के लिए,
कोई कंस है हमारे लिए,
क्या फर्क है मुझमें और तुममें?

1 comment:

COMMON MAN said...

सत्य वचन.