दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Wednesday 23 September 2009

कब तमीज सीखोगे तुम?

अरे ओ दिल्ली वालों,
कब तमीज सीखोगे तुम?
शीला दीक्षित, तेजिंदर खन्ना,
और अब पी चिदंबरम,
सबका मन दुखता हे,
तुम्हारे असभ्य व्यवहार से,
पर तुम निकाल देते हो,
इस कान से सुन कर उस कान से,
कब बदलोगे अपना असभ्य सोच?

कामनवेल्थ खेलों में,
आयेंगे बड़े-बड़े मेहमान,
जिनके थे तुम गुलाम,
जिनके लिए बना रही हैं शीला जी,
सात सितारा मूत्रालय,
क्या सोचेंगे वह?
जब देखेंगे तुम्हारा असभ्य व्यवहार,
कितनी शर्म आयेगी,
सरकार को, सोनिया जी को,
पर तुम नहीं सुधरोगे,
बदतमीज कहीं के.

मैं लिख रहा था जब यह अकविता,
मेरी पोती ने पूछा,
बाबा क्यों करते हैं हम आयोजित यह खेल?
कौन सी है यह कामनवेल्थ?
कहाँ हे यह वेल्थ?
किस किस में कामन हे यह वेल्थ?
पता नहीं बेटी,
शायद मालूम हो देश के तहजीबदारों को,
उसने कहा, 'अब तो हम आजाद हैं',
मैंने कहा, 'कहते तो यही हैं,
पर शायद हैं नहीं'.

1 comment:

पी.सी.गोदियाल said...

अरे ओ दिल्ली वालों,
कब तमीज सीखोगे तुम?
शीला दीक्षित, तेजिंदर खन्ना,
और अब पी चिदंबरम,
सबका मन दुखता हे,

पहले इन्ही महानुभावों से पूछ लेते कि इन्होने सीखी है कभी ? हमारे देश की जनता अपने नेतावो का ही तो अनुशरण करती है !