जब कहा तिलक ने आज़ादी,
है जन्म सिद्ध अधिकार मेरा,
तब शामिल था उस कहने में,
कर्तव्य मेरा, कर्तव्य तेरा.
क्या मिलना था, क्या मिल पाया,
क्या देना था, क्या दे पाये,
आओ भारत मां के बच्चों,
कुछ लेखा-जोखा हो जाय.
आज़ादी मर कर जीने की,
आज़ादी जी कर मरने की,
आज़ादी कुछ भी कहने की,
आज़ादी कुछ भी करने की,
आज़ादी कुछ न करने की,
आज़ादी ऊंचा उठने की,
आज़ादी नीचा गिरने की.
क्या मिली है पूरी आजादी?
या अभी लड़ाई जारी है?
अधिकार माँगना सीख लिया,
कर्तव्य निभाना बाकी है.
नफरत छोड़ो और प्रेम करो,
सब हैं समान, सब हैं भाई,
कर्तव्य निभाओ सुख पाओ,
यह बात कृष्ण ने समझाई.