दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday, 31 December, 2009

ऎसी पुलिस न होना ज्यादा बेहतर है

पुलिस वालों की डाइनिंग टेबल पर,
जो पकवान परोसे जाते हैं,
जिस पैसे से पुलिस वाले ऐयाशी करते हैं,
वह पैसा उस जनता की जेब से आता है,
जिस पर वह रात दिन अत्याचार करते हैं,
रुचिका की कहानी है,
इस बेशर्म पुलिस की कहानी,
पुलिस की जरूरत है,
पर,
ऎसी पुलिस न होना ज्यादा बेहतर है.

3 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

Principal Organisation of Legislatively Incorporation Criminal Elements - बकौल खुद.

परमजीत बाली said...

जब तक पुलिस राजनेता और अफसरो की जी हजूरी करती रहेगी.उन के दबाव मे रहेगी....उस से कोई उम्मीद करनी बेकार है।

परमजीत बाली said...

आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।