दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Saturday 3 October 2009

आराम हलाल है

एक मंत्री ने ट्विटर पर ट्वीट किया,
बापू के जन्मदिन पर सब काम करें,
पढ़ कर अच्छा लगा,
कोई है तो है काम करने वाला,
यह और बात है कि कुछ दिन पहले,
यही मंत्री जी शिकायत कर रहे थे,
काम बहुत ज्यादा है दफ्तर में.

बापू ने कहा कर्म पूजा है,
बापू ने तो सिर्फ दोहराया था,
अर्जुन को कुरुशेत्र में,
कृष्ण ने यही समझाया था,
पर आज़ाद भारत में,
बहाने ढूँढ़ते हैं सब काम से बचने के,
सरस्वती पूजा पर न पढेंगे, न लिखेंगे,
विश्वकर्मा पूजा पर मशीनें बंद रखेंगे,
आजादी क्या आई सोच उलट गया,
आराम हराम से हलाल हो गया.

3 comments:

खुर्शीद अहमद said...

आराम हराम भी नहीं है और हलाल भी नहीं. यह तो वक़्त के हिसाब से तय होता है.

हमारी अन्‍जुमन (विश्व का प्रथम एवम् एकमात्र हिंदी इस्लामी सामुदायिक चिट्ठा)
hamarianjuman.blogspot.com

Suresh Gupta said...

मौजूदा वक्त के हिसाब से लोगों ने आराम को हलाल तय किया है.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

माफी चाहूँगा, आज आपकी रचना पर कोई कमेन्ट नहीं, सिर्फ एक निवेदन करने आया हूँ. आशा है, हालात को समझेंगे. ब्लागिंग को बचाने के लिए कृपया इस मुहिम में सहयोग दें.
क्या ब्लागिंग को बचाने के लिए कानून का सहारा लेना होगा?