दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Tuesday, 6 January 2009

भारत गावों में बसता है!!!

कौन गया था सबसे पहले गाँव छोड़ कर?
वह नेता जी जिन्हें चुना था 
भोले भाले ग्रामीणों ने, 
नेता जी ने हाथ जोड़ कर,
मत मांगे थे और कहा था,
यह कर दूँगा, वह कर दूँगा,
गाँव बनेगा स्वर्ग हमारा,
सब पायेंगे सुख समृद्धि,
जगा गया था कई आशाएं,
प्यारे-प्यारे मीठे सपने,
उनका महानगर प्रस्थान.

कुछ दिन बाद ख़बर यह आई,
नेता जी ने गाँव छोड़ कर,
स्वर्ग बनाया महानगर में, 
धीरे-धीरे चले गए सब गाँव छोड़कर,
स्वर्ग खोजने महानगर में,
और गाँव में देव आ गए,
फार्म हाउस के स्वर्ग बनाने,
माल बना कर माल कमाने. 

सुना था मैंने, पढ़ा था मैंने,
परीक्षाओं में लिखा था मैंने, 
भारत गावों में बसता था,
अब बसते हैं शहर गाँव में.

Wednesday, 30 January 2008

एक गाँव मैं एक आदमी आया,

एक गाँव मैं एक आदमी आया,
गाँव के बाहर पेढ़ के नीचे बने चबूतरे पर बैठ गया,
हिन्दुओं ने समझा कोई संत हैं,
मुसलमानो ने समझा कोई फकीर हैं,
पंडितजी आए, मौलाना आए,
'आप गाँव के मेहमान हैं',
'क्या सेवा करे आपकी',
'प्यासा हूं पानी पिला दो, भूखा हूं खाना खिला दो',
पंडितजी बोले अभी लाये,
मौलाना बोले अभी लाये,

मेहमान ने कहा 'एक बात का ध्यान रखना,
जो पानी और खाना हिंदू लाये उसमे न लगा हो हाथ गैर हिन्दू का,
ऐसे ही ध्यान रखे मुसलमान,
जो पानी और खाना वह लाये उसमे न लगा हो हाथ गैर मुसलमान का,
लोग चकरा गए,
ऐसे कैसे हो सकता है,
यह गारंटी कैसे दी जा सकती है,
पानी एक है, धूप एक है, हवा एक है,
खेतो मैं हाथ लगा है सब का,
किसने बनाये बर्तन भांडे,
किसने आटा पीसा,
हाथ जोढ़ कर बोले दोनों,
शर्त कठिन है इसे हटाओ.

मेहमान ने कहा या तो मेरी शर्त मानो,
या मैं तुम्हारे गाँव से भूखा जाऊंगा,
पंडितजी ने कहा हमे छमा करो,
मौलाना ने कहा हमे माफ़ करो,
मेहमान ने कहा,
जब सब कुछ एक है तो तुम कैसे अलग हो,
तुम हिन्दू, यह मुसलमान,
क्या नहीं रहे तुम इंसान?
धरम पर करो बंद हिंसा,
दोनों मिलकर पानी लाओ,
दोनों मिलकर खाना लाओ,
यही हुआ,
मेहमान ने खुशी से खाना खाया और पानी पिया,
सबके लिए दुआ की और अगले गाँव चला गया.

कहानी कहती है,
उस गाँव मैं फिर धरम के ऊपर फसाद नहीं हुआ.