दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Thursday, 20 March 2008

घुट्टी मैं मिली राजनीति


नेताजी बहुत जल्दी राजनीति सीख गए,
अभी-अभी तो आए थे वह राजनीति मैं,
और अभी से बातें करने लगे पंडितों सी.

क्या कहना है आज?
और कैसे मुकर जाना है कल?
राजनीति के यह दो मुख्य दांव,
सीख लिए उन्होंने आनन फानन मैं.

पार्टी मैं हाई कमान को आज दोषी ठहराया,
कल कह दिया दोषी कोई और है,
दोनों बयानों पर तारीफ़ मिली,
हाई कमान ने तालियाँ बजाईं,
अखबारों ने मुख्य प्रष्ठ पर छापा,
चम्चो नें उनकी बलैयां लीं,
राजनीति तो घुट्टी मैं मिली है उन्हें.

और भी आए थे उनके कुछ हम उम्र,
उनके साथ राजनीति मैं,
पर वह कुछ न सीख पाये,
या सीख कर भी चुप रहे,
हिम्मत न जुटा पाये कुछ कहने की,
पार्टी और हाई कमान के बारे मैं.

धन्य हैं ऐसे नेताजी को पा कर,
हम और हमारा देश.

एक लड़ाई अभी जारी है

एक लड़ाई अभी जारी है,
कब शुरू हुई कोई नहीं जानता,
किसने शुरू की पता नहीं,
पर शायद हम सब जानते हैं,
बस अपनी जिद मैं मानते नहीं,

और यही जिद इस लड़ाई का कारण है.

यह लड़ाई शुरू हुई तब,
इंसान इस जमीन पर आया जब,
जमाने को अपना अधिकार,
किया उसने प्रकृति का बलात्कार,
हवा, पानी, सूर्य की रौशनी,
चन्दा की चांदनी, जंगल, जानवर,
नदी, नाले, पर्वत, घाटियाँ,
सब बने उस का शिकार,
मचा दिया उसने हाहाकार.

प्रकृति दर्द से कसमसाई,

सूखा पड़ा या वाढ आई,
पर्वतों ने लावा उगला,
मौसम बदले, ऋतुएं बदलीं,
सूनामी ने कहर बरपाया,
इंसान फ़िर भी समझ न पाया,
प्रकृति तो माँ है,
उससे लड़ते नहीं,
उसकी गोद मैं आराम करते हैं.

भगवान् की सबसे अच्छी रचना,
दुश्मन बन गई अपनी,
मानव स्रष्टि समाप्त होने की तैयारी है,
पर यह लड़ाई अभी भी जारी है.


होली आई रे

होली के रंग गुझिया के संग,
भांग पी कर होली का हुड़दंग,
आओ मिलें गले,
भुला दें शिकवे गिले,
करें एक नई शुरुआत,
अब चलेंगे साथ साथ.

कल रात जलाई हम नें होली,
भस्म हो गई होलिका,
होलिका जो जलाती है दूसरों को,
पर जल जाती है स्वयं,
हर साल यह नाटक करते हैं हम,
पर सीखते नहीं कुछ भी,
पालते हैं अपने अन्तर मैं एक होलिका,
जलाने को दूसरों को,
पर जो जला डालती है हमें.

इस बार आई है होली,
ईद की खुशिओं के संग,
गुड फ़्राईडे का लेकर रंग,
त्यौहार मिल गए हैं जब,
क्यों न मिला लें अपने मन,
प्यार करें सब को,
नफरत न करें किसी को.

Friday, 14 March 2008

यथा राजा तथा प्रजा


रघुकुल रीति सदा चली आई,
प्राण जाए पर वचन न जाई.
ऐसे होते थे राजा,
और ऐसी ही होती थी प्रजा,
अब न राजा ऐसे रहे, न प्रजा,
जो जितना बेईमान वह उतना अच्छा राजा,
जो जितनी बेईमान वह उतनी अच्छी प्रजा,
कहावत फ़िर चरितार्थ हुई,
यथा राजा तथा प्रजा.

प्रजा ने लिया उधार बैंक से,
राजा ने कहा वापस मत करना,
समझना वोट की कीमत है,
मदद के नाम पर रिश्वत,
देता है राजा प्रजा को,
प्रगति की नई परिभाषा है यह.

पहले राजा मानते थे प्रजा को पुत्रवत,
अब मानते हैं एक वोट वत,
बाँटते हैं नफरत, मांगते हैं वोट,
सच्चाई इमानदारी पर करते हैं चोट.

प्रजा ने टेक्स दिया राजा को,
राजा ने खर्च किया ख़ुद पर,
विकास कार्यों मैं पाँच पैसे,
पंचान्वें अपनी जेब मैं.

बना दिया बाज़ार राष्ट्र को,
भूल गए अपना इतिहास,
खेतों मैं फक्ट्री लगाईं,
फसलों को करके बरबाद.

जब बच्चे थे तब पढ़ते थे,
कृषि प्रधान देश है भारत,
अब बूढ़े हो कर पढ़ते हैं,
कंक्रीट का जंगल भारत.

Thursday, 13 March 2008

जल और जीवन एक हैं


जल और जीवन एक हैं,
जल संचय तब जीवन संचय,
जब नभ देते जल उपहार,
नहीं संजोते, व्यर्थ गवांते,
और वाद मैं फ़िर पछताते.

जल का क्षय है जीवन का क्षय,
पानी का घटता जल स्तर,
सूखी नदियाँ, सूखी नहरें,
पानी किया प्रदूषित हमने,
हर घर मैं वीमार भरे हैं,
फ़िर भी नहीं बाज आते हम.
किसे बताएं, क्या समझायें?
सब हैं जानकार पर फ़िर भी,
अपने ही शत्रु बन बैठे,
काट रहें उस डाली को,
जिस पर बना बसेरा अपना.

तृतीय विश्व युद्ध जब होगा,
पानी उस का कारण होगा,
लिखते हैं और पढ़ते हैं हम,
एक दूजे से कहते हैं हम,
पर ख़ुद नहीं समझते हैं हम,
सर्वश्रेष्ठ रचना ईश्वर की,
मानव क्या से क्या बन बैठा,
जागो अभी समय है थोड़ा,
जल का संचय यदि करोगे,
तभी बचेगा मानव जीवन.

प्रेम, प्यार, लव, मोहब्बत


प्रेम रूप है एक ईश्वर का
प्रेम प्रभु की पूजा है,
पाना है यदि ईश्वर को तब
मार्ग नहीं कोई दूजा है.

प्रेम मार्ग पर चले चलो तुम
सब जीवों से प्रेम करो तुम,
नफरत की आंधी आए तब
प्रेम मार्ग से नहीं डिगो तुम,
उधर छोर पर प्रभु खड़े हैं
जल्दी जल्दी कदम बढ़ाओ,
जीवन का उद्देश्य यही है
प्रभु से एक रूप हो जाओ.


'मानहु एक प्रेम का नाता'
कहा राम ने था शबरी से,
झूठे बेर प्रेम से खाए
ख़ुद चल कर उसके घर आए,
तुम भी प्रेम करो शबरी सा
मानो एक प्रेम का नाता,
जीवन प्रेम-प्रेम हो जाए
घर मैं आए जगत-विधाता.

Sunday, 2 March 2008

जनता का तंत्र या जनता पर तंत्र???


स्पीकर महोदय ने कहा,
जनता के प्रतिनिधि कर रहे हैं ओवरटाईम,
मिटाने को जनता का तंत्र भारत मैं,
कुछ अजीब लगी मुझे यह बात,
कहाँ देखा उन्होंने जनता का तंत्र?

कहते हैं पहले गुलाम था भारत,
चलता था विदेशी राजा का तंत्र,
अब कहते हैं आजाद है भारत,
क्योंकि चलता है देश मैं जनता का तंत्र,
सब जानते हैं यह एक किताबी बात है,
ग़लत है कहना 'जनता का तंत्र',
सही है कहना 'जनता पर तंत्र',
पहले था विदेशी राजा का तंत्र,
अब है देसी राजा का तंत्र,
या कहें,
देसी बनी विदेशी रानी का तंत्र,

जनता पहले भी जनता थी,
जनता आज वही जनता है,
पिटने को, मरने को,
भूख से, गोली से,
विजली और पानी का संकट,
कमर तोड़ वढ़ती महंगाई,
घर और वाहर नहीं सुरक्षित,
जुल्म पुलिस का, महंगा न्याय,
सब जनता के लिए समर्पित.

स्पीकर महोदय ने कुछ कहना था,
स्पीकर महोदय ने कुछ कह दिया,
अखबारों ने छाप दिया,
टी वी ने दिखा दिया,
बात ख़त्म हो गई.
मेरी कविता भी ख़त्म हो गई.

चुनाव का मौसम


आखिरी बजट के साथ,
फ़िर आ गया चुनाव का मौसम,
फ़िर नजर आयेंगे नेता,
फ़िर आ गया वादों का मौसम,
आम आदमी के खास बनने का मौसम,
सड़कों के गड्ढे भरने का मौसम,
अकड़ी गर्दन झुकने का मौसम,
हाथ जोड़ कर मिलने का मौसम,
पुराने वादे भुलाने का मौसम,
नए वादे करने का मौसम,
अच्छे काम भुनाने का मौसम,
बुरे काम नकारने का मौसम,
दूसरों पर इल्जाम लगाने का मौसम,
गुंडों को जेल से छुड़ाने का मौसम,
पार्टी मैं भरती कराने का मौसम,
मन्दिर के चक्कर लगाने का मौसम,
ज्योतिषी के घर आने जाने का मौसम,
हर चुनाव क्षेत्र को कुरुक्षेत्र बनाने का मौसम,
पाण्डवों के हार जाने का मौसम,
कौरवों के जीत जाने का मौसम,
जिस जनता के कपड़े उतारे थे सबने,
उस जनता को कपड़े पहनाने का मौसम,
पार्टी के दफ्तर मैं बोली लगेगी,
किसी भी तरह टिकट पाने का मौसम,
चलो आओ हम भी लड़ें अब चुनाव,
यह है खूब खाने कमाने का मौसम.