दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Friday, 20 February 2009

यही बचा है हमारा परिचय!

आजकल हम बात बहुत करते हैं,
पर सिर्फ़ अधिकारों की,
कर्तव्य की बात बेमानी हो गई है,
क्यों लेते हैं हम जिम्मेदारी?
जब उसे निभा नहीं पाते,
वह सब करते हैं हम, 
जो हमें नहीं करना चाहिए,
और जो हमें करना चाहिए,
वह नहीं करते,
क्यों आख़िर क्यों?

धन और मान मिलने पर नम्र नहीं रह पाते,
अधिकार मिलने पर न्याय नहीं कर पाते,
स्वयं के लिए आदर की अपेक्षा,
दूसरों के लिए अनादर और उपेक्षा,
जो मन में है, वह वचन नहीं,
जो वचन दिया वह किया नहीं,
दो चेहरे दो बातें,
मुख में मिश्री, मन में घातें,
बस यही बचा है हमारा परिचय. 

Sunday, 2 March 2008

चुनाव का मौसम


आखिरी बजट के साथ,
फ़िर आ गया चुनाव का मौसम,
फ़िर नजर आयेंगे नेता,
फ़िर आ गया वादों का मौसम,
आम आदमी के खास बनने का मौसम,
सड़कों के गड्ढे भरने का मौसम,
अकड़ी गर्दन झुकने का मौसम,
हाथ जोड़ कर मिलने का मौसम,
पुराने वादे भुलाने का मौसम,
नए वादे करने का मौसम,
अच्छे काम भुनाने का मौसम,
बुरे काम नकारने का मौसम,
दूसरों पर इल्जाम लगाने का मौसम,
गुंडों को जेल से छुड़ाने का मौसम,
पार्टी मैं भरती कराने का मौसम,
मन्दिर के चक्कर लगाने का मौसम,
ज्योतिषी के घर आने जाने का मौसम,
हर चुनाव क्षेत्र को कुरुक्षेत्र बनाने का मौसम,
पाण्डवों के हार जाने का मौसम,
कौरवों के जीत जाने का मौसम,
जिस जनता के कपड़े उतारे थे सबने,
उस जनता को कपड़े पहनाने का मौसम,
पार्टी के दफ्तर मैं बोली लगेगी,
किसी भी तरह टिकट पाने का मौसम,
चलो आओ हम भी लड़ें अब चुनाव,
यह है खूब खाने कमाने का मौसम.