दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Thursday, 13 March 2008

प्रेम, प्यार, लव, मोहब्बत


प्रेम रूप है एक ईश्वर का
प्रेम प्रभु की पूजा है,
पाना है यदि ईश्वर को तब
मार्ग नहीं कोई दूजा है.

प्रेम मार्ग पर चले चलो तुम
सब जीवों से प्रेम करो तुम,
नफरत की आंधी आए तब
प्रेम मार्ग से नहीं डिगो तुम,
उधर छोर पर प्रभु खड़े हैं
जल्दी जल्दी कदम बढ़ाओ,
जीवन का उद्देश्य यही है
प्रभु से एक रूप हो जाओ.


'मानहु एक प्रेम का नाता'
कहा राम ने था शबरी से,
झूठे बेर प्रेम से खाए
ख़ुद चल कर उसके घर आए,
तुम भी प्रेम करो शबरी सा
मानो एक प्रेम का नाता,
जीवन प्रेम-प्रेम हो जाए
घर मैं आए जगत-विधाता.