हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
Sunday, 25 January 2009
नेताजी महिमा
Tuesday, 6 January 2009
भारत गावों में बसता है!!!
Friday, 20 June 2008
नेताजी ज्ञान यज्ञ
हिन्दी ब्लाग जगत में ही देखिये कितने नेता है? गिनती करेंगे तो दंग रह जायेंगे. पार्टियां बना रखी हैं सबने. कभी कभी जूतम-पैजार भी हो जाती है. देखी होंगी आप सबने. बात सही है पर विरोध करना है क्योंकि दूसरी पार्टी वाले ने लिखी है.
भारत नेताओं का देश है. जंगली घास की तरह उगते हैं नेता इस देश में. जो पत्थर उठाएंगे, उसके नीचे दो चार नेता धंदे की बात करते नजर आयेंगे. अगर आप से किसी का यह कह कर परिचय कराया जाए कि बहुत पढ़े-लिखे हैं, समझदार हैं, ईमानदार है, परोपकारी हैं, तो क्या कोई असर होगा आप पर? अगर मात्र इतना कह दिया जाए कि इनकी मंत्री जी से जान पहचान है तो आप आधे झुक जायेंगे उन्हें दंडवत करने में. मन ही मन गाली देंगे ख़ुद को कि फोटो खींचने का बंदोवस्त क्यों नहीं कराया.
नेता जी से ज्यादा बड़ा नेता उन का सचिव होता है. नेता जी के ड्राइवर की नेतागिरी के तो क्या कहने. बड़े-बड़े तीसमारखां उन्हें सलाम करते हैं. जो काम नेताजी नहीं करवा पाते वह यह लोग करा लेते हैं. कभी-कभी तो नेताजी ख़ुद इन की मदद लेते हैं. नेताओं में आपस में रंजिश हो सकती है, पर उनके सचिवों और ड्राइवरों में कभी रंजिश नहीं होती. नेताजी हर दरवाजा खुला रखते हैं.
लालू जी इतने सालों से असली नेतागिरी कर रहे हैं पर अब शाहरुख के साथ उस की ऐक्टिंग करना चाहते हैं. उनके आने से ब्लाग जगत में भी प्रजातंत्र आ गया है. उन्हें सेलिब्रिटी ब्लॉगर कहा जा रहा है. लिखता कोई और है पर नेताजी तो लालू हैं, इसलिए ब्लॉगर तो उन्हें ही कहा जायेगा, और क्योंकि वह एक सेलिब्रिटी हैं इस लिए मात्र ब्लॉगर कहना उनकी तौहीन होगी. उनके आने से ब्लाग जगत में चमचागिरी का प्रवेश हो गया है.
नेता पर जितना लिखा जाए उतना कम है. बहुत कठिन विषय है यह. पर एक कोशिश की है मैंने.
Thursday, 20 March 2008
घुट्टी मैं मिली राजनीति

नेताजी बहुत जल्दी राजनीति सीख गए,
अभी-अभी तो आए थे वह राजनीति मैं,
और अभी से बातें करने लगे पंडितों सी.
क्या कहना है आज?
और कैसे मुकर जाना है कल?
राजनीति के यह दो मुख्य दांव,
सीख लिए उन्होंने आनन फानन मैं.
पार्टी मैं हाई कमान को आज दोषी ठहराया,
कल कह दिया दोषी कोई और है,
दोनों बयानों पर तारीफ़ मिली,
हाई कमान ने तालियाँ बजाईं,
अखबारों ने मुख्य प्रष्ठ पर छापा,
चम्चो नें उनकी बलैयां लीं,
राजनीति तो घुट्टी मैं मिली है उन्हें.
और भी आए थे उनके कुछ हम उम्र,
उनके साथ राजनीति मैं,
पर वह कुछ न सीख पाये,
या सीख कर भी चुप रहे,
हिम्मत न जुटा पाये कुछ कहने की,
पार्टी और हाई कमान के बारे मैं.
धन्य हैं ऐसे नेताजी को पा कर,
हम और हमारा देश.