होली आई, होली आई,
रंग बिरंगी होली आई,
किशिता की तैयारी पूरी,
सिया की तैयारी पूरी,
नया रंग और नई पिचकारी,
गुब्बारे और लाल गुलाल,
होली आई, होली आई.
दही बड़े, आलू की चाट,
कचरी, पापड़ और समोसे,
सबने मिलकर दादी के संग,
मावे की गुझिया बनबाई,
गन्ने और गेहूं की बालें,
होली आई, होली आई,
लकड़ी उपले घास फूस से,
चौराहे पर बनी होलिका,
नफरत और बुराई को सब,
आओ मिल कर साथ जलाएं,
नाचे गांए ख़ुशी मनाएं,
होली आई, होली आई,
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Friday, 26 February 2010
Monday, 22 February 2010
क्या जलाओगे इस होली पर?
वर्मा जी ने पत्रकारिता शुरू की,
पहला प्रोजेक्ट होली पर,
लोगों से एक सवाल पुछा,
क्या जलाओगे इस होली पर?
जो जवाब मिले देखिये,
आतकंवादी - लोगों के बीच प्रेम,
सास - छोटे बेटे की बहू,
राजनीतिबाज - जनता का धन,
अध्यापक - बच्चों का भविष्य,
पत्नी - पति का बटुआ,
पति - पत्नी के गले का हार,
वकील - क्लाइंट के घर की ख़ुशी,
मैं - लोगों के बीच नफरत.
पहला प्रोजेक्ट होली पर,
लोगों से एक सवाल पुछा,
क्या जलाओगे इस होली पर?
जो जवाब मिले देखिये,
आतकंवादी - लोगों के बीच प्रेम,
सास - छोटे बेटे की बहू,
राजनीतिबाज - जनता का धन,
अध्यापक - बच्चों का भविष्य,
पत्नी - पति का बटुआ,
पति - पत्नी के गले का हार,
वकील - क्लाइंट के घर की ख़ुशी,
मैं - लोगों के बीच नफरत.
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Tuesday, 10 March 2009
बुरा न मानो होली है - शब्दों के रंग
प्रदेश के नेता के रूप में शपथ लेकर,
उन्होंने कहा,
मैं एक सीधा-सच्चा आदमी हूँ,
उनका पहला आदेश था,
पिछले मुख्यमंत्री के खिलाफ,
चार्जशीट दाखिल करवाना.
लोहे को लोहा काटता है,
इस कहावत को चरितार्थ किया,
उनकी सरकार ने,
बीड़ा उठाया है उन्होंने,
भ्रष्टाचार ख़त्म करने का,
भ्रष्टाचारियों को मंत्री बना कर.
'सेकुलरिज्म' की तरह,
खो बैठा है अर्थ आज,
'जनादेश' भी.
जरूरत है एक राजनीतिक दुभाषिये की,
विचारों के आदान-प्रदान के लिए,
जनता और उसके प्रतिनिधियों के बीच.
लोक सभा चुनाव के बाद,
डाकुओं पर बनी एक फिल्म में,
डायलाग बदल दिया उन्होंने,
'तुम जिस रास्ते पर जा रहे हो,
वह पुलिस स्टेशन जाता है,
या फिर शम्शान,
या फिर लोक सभा'.
एक दलित महिला पर हुआ,
अमानवीय अत्याचार,
पर चुप रही दलित सरकार,
मेरे एक मित्र ने कहा,
शायद महिला के दलित होने की,
खबर झूटी थी.
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Thursday, 20 March 2008
होली आई रे
होली के रंग गुझिया के संग,भांग पी कर होली का हुड़दंग,
आओ मिलें गले,
भुला दें शिकवे गिले,
करें एक नई शुरुआत,
अब चलेंगे साथ साथ.
कल रात जलाई हम नें होली,
भस्म हो गई होलिका,
होलिका जो जलाती है दूसरों को,
पर जल जाती है स्वयं,
हर साल यह नाटक करते हैं हम,
पर सीखते नहीं कुछ भी,
पालते हैं अपने अन्तर मैं एक होलिका,
जलाने को दूसरों को,
पर जो जला डालती है हमें.
इस बार आई है होली,
ईद की खुशिओं के संग,
गुड फ़्राईडे का लेकर रंग,
त्यौहार मिल गए हैं जब,
क्यों न मिला लें अपने मन,
प्यार करें सब को,
नफरत न करें किसी को.
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