दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Monday, 23 February 2009

स्वान्तः सुखाय प्रेम

मानव स्वभाव से होता है स्वान्तः सुखाय,
करता है हर कार्य अपने सुख के लिए,
मैं भी कोई अपवाद नहीं हूँ,
मेरे मन में तुम्हारे प्रति यह प्रेम भावः,
मुझे निरंतर सुख देता है,
मुझे अच्छा लगता है तुम्हारे बारे में सोचना,
उससे अच्छा लगता है तुम्हारी बातें करना,
उससे भी अच्छा लगता है तुमसे तुम्हारी बातें करना.

प्रेम की यह भावना,
मुझे मुक्त करती है वांधती   नहीं,
मेरा प्रेम प्रत्युत्तर की कामना नहीं करता,
कोई शर्त नहीं है मेरे प्रेम में,
मैं प्रेम करता हूँ,
क्योंकि मुझे प्रेम करना है,
बस यही आता है मुझे,
ईश्वर ने मुझे इसीलिए भेजा है यहाँ, 
जाओ प्रेम करो सबसे,
नफरत न करना किसी से. 

Thursday, 20 March 2008

होली आई रे

होली के रंग गुझिया के संग,
भांग पी कर होली का हुड़दंग,
आओ मिलें गले,
भुला दें शिकवे गिले,
करें एक नई शुरुआत,
अब चलेंगे साथ साथ.

कल रात जलाई हम नें होली,
भस्म हो गई होलिका,
होलिका जो जलाती है दूसरों को,
पर जल जाती है स्वयं,
हर साल यह नाटक करते हैं हम,
पर सीखते नहीं कुछ भी,
पालते हैं अपने अन्तर मैं एक होलिका,
जलाने को दूसरों को,
पर जो जला डालती है हमें.

इस बार आई है होली,
ईद की खुशिओं के संग,
गुड फ़्राईडे का लेकर रंग,
त्यौहार मिल गए हैं जब,
क्यों न मिला लें अपने मन,
प्यार करें सब को,
नफरत न करें किसी को.