दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Thursday, 7 August 2008

सिमी पर पाबंदी और सरकार

मेरी पिछली पोस्ट में मैंने कहा था कि क्या सरकार आतंकवादियों के साथ है? अब सिमी पर पाबंदी के मसले पर जो हुआ उस से सरकार फ़िर एक बार कटघरे में खड़ी नजर आ रही है. यह अच्छा हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पाबंदी को बरकरार रखा बरना सरकार ने तो पाबंदी ख़त्म कराने का पूरा इंतज़ाम कर दिया था. लगता है सरकार की समय गणना गड़बड़ हो गई और ट्रिब्यूनल का फ़ैसला बंगलौर और अहमदाबाद में आतंकी हमलों के तुंरत बाद आया. सरकार को अपनी शर्म छिपाने के लिए अदालत में जाना पड़ा. किसी और वक्त यह फ़ैसला आया होता तो सिमी तो साफ़ छूट गई थी.

इस शक को इस बात से भी बल मिलता है कि सरकार की एक साझी पार्टी के नेता और सरकार में मंत्री लालू प्रसाद इस मसले पर वोट की घटिया राजनीति करने से नहीं चूके. उन्होंने इस मसले में आरएसएस, शिव सेना को घसीटने की कोशिश की है, और यह भी कहा है की वह सिमी पर पाबंदी के हक में नहीं हैं. अगर उन्हें सरकार के इस फैसले से ऐतराज है तो उन्हें सरकार से हट जाना चाहिये, पर ऐसा वह नहीं करेंगे क्योंकि उनका स्वार्थ सिर्फ़ ख़ुद को मुसलमानों का हमदर्द दिखाना भर है.

Sunday, 18 May 2008

भारतीय धर्म-निरपेक्षता

आज के अखबार में एक लेख छपा है भारतीय धर्म-निरपेक्षता के ऊपर। लेखक हैं एम् जे अकबर. वह कहते हैं:

"...... there is not a single instance of any Hindu writer having vilified the Prophet of Islam. Similarly, there is, to my knowledge, not a single Muslim writer who was abusive towards Lord Ram or Hanuman. Indian secularism is quintessentially different from that of the west. It is not the separation of state and religion, but space for the other: coexistence on the basis of mutual respect. I do not have to believe in Hanuman to respect my Hindu brother's right to believe in Ramayana; the Hindu does not need to believe in Allah to respect my belief in the miracle of Holy Koran...."

कितनी सही और सच्ची बात कही है. कितना अच्छा होता अगर यह पूर्ण वास्तविकता होती। कुछ तथाकतित बौद्धिक लेखक और आर्टिस्ट हर हिंदू विचार को ग़लत साबित करने में लगे रहते हें। घटिया राजनीतिबाजों और मजहब के सौदागरों ने भारतीय धर्म-निरपेक्षता को नफरत और मार-काट में बदल दिया है. वोट की ओछी राजनीति लोगों को धर्म के नाम पर बाँट रही है. इस नफरत के साए में बाहर से आए कुछ आतंकवादी आसानी से यहाँ पनाह पा जाते हैं और स्थानीय मदद से आसानी से जयपुर जैसे नर-संहार को अंजाम दे देते हैं.

Friday, 14 March 2008

यथा राजा तथा प्रजा


रघुकुल रीति सदा चली आई,
प्राण जाए पर वचन न जाई.
ऐसे होते थे राजा,
और ऐसी ही होती थी प्रजा,
अब न राजा ऐसे रहे, न प्रजा,
जो जितना बेईमान वह उतना अच्छा राजा,
जो जितनी बेईमान वह उतनी अच्छी प्रजा,
कहावत फ़िर चरितार्थ हुई,
यथा राजा तथा प्रजा.

प्रजा ने लिया उधार बैंक से,
राजा ने कहा वापस मत करना,
समझना वोट की कीमत है,
मदद के नाम पर रिश्वत,
देता है राजा प्रजा को,
प्रगति की नई परिभाषा है यह.

पहले राजा मानते थे प्रजा को पुत्रवत,
अब मानते हैं एक वोट वत,
बाँटते हैं नफरत, मांगते हैं वोट,
सच्चाई इमानदारी पर करते हैं चोट.

प्रजा ने टेक्स दिया राजा को,
राजा ने खर्च किया ख़ुद पर,
विकास कार्यों मैं पाँच पैसे,
पंचान्वें अपनी जेब मैं.

बना दिया बाज़ार राष्ट्र को,
भूल गए अपना इतिहास,
खेतों मैं फक्ट्री लगाईं,
फसलों को करके बरबाद.

जब बच्चे थे तब पढ़ते थे,
कृषि प्रधान देश है भारत,
अब बूढ़े हो कर पढ़ते हैं,
कंक्रीट का जंगल भारत.