दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Sunday, 10 August 2008

ब्लागर भाइयों और बहनों

मुझे इ-मेल में एक काफ़ी मजाकिया मेसेज मिला। मैंने सोचा उसे आप सब से बांटूं। पर वह मेसेज अंग्रेजी में है, और उस का हिन्दी में अनुवाद करने से उस का मजा ही ख़त्म हो जाता। इसलिए उसे अंग्रेजी में ही लिखना पड़ा। अन्ज्रेजी में होने की वजह से चिटठा जगत ने उसे उठाया नहीं.

अगर आप उस का मजा लेना चाहते हें तो इस पर क्लिक करिए:

होटलों में मजाकिया नोटिस

होटलों में लगे मजाकिया नोटिस

होटलों में हर जगह नोटिस लगे होते हें, बेडरूम में, बार में। यह नोटिस अंग्रेजी में होते हें। अक्सर यह नोटिस आपको हंसा देते हें। आपभी इन्हें पढ़िये और हंसिये.

In the Hotel Bedroom:

1) Is forbidden to steal hotel towels please. If you are not person to do such thing please not to read notice.

2) Please to bathe inside the tub.

3) Please leave your values at the front desk.

4) You are invited to take advantage of the chambermaid.

5) Because of the impropriety of entertaining guests of the opposite sex in the bedroom, it is suggested that the lobby be used for this purpose.

In the Hotel Bar:

1) Special cocktails: For the ladies with nuts.

2) Ladies are requested not to have children in the bar.

3) Our wines leave you nothing to hope for.

4) Special today - no ice cream.

In the Hotel Shop:

1) For your convenience, we recommend courteous, efficient self-service.

2) If this is your first visit to Tokyo, you are welcome to it.

3) Order your summer suit. Because is big rush we will execute customers in strict rotation.

4) Specialist in women and other diseases

5) Teeth extracted by the latest Methodists.

From will & Guy

Friday, 8 August 2008

०८/०८/०८

आज की तारीख है ०८/०८/०८. यह तारीख़ अच्छी है या बुरी, इस पर लोगों में मतभेद है. भारत में नंबर ८ को ज्यादा लोगों द्बारा बुरा माना जाता है. चीन में इसे अच्छा माना जाता है. इसीलिए चीन में आज ओलम्पिक खेल प्रारम्भ हो रहे हैं. भारत में भी कुछ लोगों के अनुसार तीन ८ मिला कर २४ बनते हैं और यह नंबर अच्छा है.

देखिये क्या होता है आज?

Thursday, 7 August 2008

सिमी पर पाबंदी और सरकार

मेरी पिछली पोस्ट में मैंने कहा था कि क्या सरकार आतंकवादियों के साथ है? अब सिमी पर पाबंदी के मसले पर जो हुआ उस से सरकार फ़िर एक बार कटघरे में खड़ी नजर आ रही है. यह अच्छा हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पाबंदी को बरकरार रखा बरना सरकार ने तो पाबंदी ख़त्म कराने का पूरा इंतज़ाम कर दिया था. लगता है सरकार की समय गणना गड़बड़ हो गई और ट्रिब्यूनल का फ़ैसला बंगलौर और अहमदाबाद में आतंकी हमलों के तुंरत बाद आया. सरकार को अपनी शर्म छिपाने के लिए अदालत में जाना पड़ा. किसी और वक्त यह फ़ैसला आया होता तो सिमी तो साफ़ छूट गई थी.

इस शक को इस बात से भी बल मिलता है कि सरकार की एक साझी पार्टी के नेता और सरकार में मंत्री लालू प्रसाद इस मसले पर वोट की घटिया राजनीति करने से नहीं चूके. उन्होंने इस मसले में आरएसएस, शिव सेना को घसीटने की कोशिश की है, और यह भी कहा है की वह सिमी पर पाबंदी के हक में नहीं हैं. अगर उन्हें सरकार के इस फैसले से ऐतराज है तो उन्हें सरकार से हट जाना चाहिये, पर ऐसा वह नहीं करेंगे क्योंकि उनका स्वार्थ सिर्फ़ ख़ुद को मुसलमानों का हमदर्द दिखाना भर है.

Monday, 4 August 2008

क्या सरकार आतंकवादियों के साथ है?

जनता, सरकार और आतंकवाद - बराबर की लड़ाई नहीं है

आतंकवादियों के हमलों से भारत का कानून भारतवासियों को कितनी सुरक्षा देता है, काफ़ी समय से इस पर सवाल उठ रहे हैं. हत्या करने के ख़िलाफ़ कानून है, हत्या की जांच करने के लिए पुलिस भी है, अगर कोई आतंकवादी हत्यारा पकड़ा गया तो उस पर मुकदमा चलाने के लिए अदालतें हैं, सरकारी वकील है. पर क्या इन हत्यारों को सजा मिल पाती है? आज तक यह हत्यारे हजारों भारतवासियों की हत्या कर चुके हैं पर किसी हत्यारे को सजा नहीं दी सकी. सजा देने के इस लंबे रास्ते में किसी न किसी सीढ़ी पर इन हत्यारों को सुरक्षा मिल जाती है. कभी पुलिस, कभी वकील, कभी अदालत, कभी सरकार. यह लोग और संस्थायें जनता को तो कोई सुरक्षा नहीं दे पाते पर जनता के हत्यारों को सुरक्षा देने में नहीं हिचकिचाते. अदालत ने अफज़ल को सजा भी दे दी पर भारत सरकार ने इस आतंकवादी हत्यारे को अपनी सुरक्षा प्रदान कर दी. अब वह मजे से सरकारी मेहमान बना हुआ है और जिस जनता की उसने हत्या की थी उस जनता के पैसे पर ऐयाशी कर रहा है.

एक आतंकवादी हत्यारे पर एक आम हत्यारे की तरह मुकदमा चलाया जाता है. पहले निचले कोर्ट में, फ़िर हाई कोर्ट में, फ़िर सुप्रीम कोर्ट में, फ़िर कोर्ट की बेंचों में, फ़िर मर्सी पेटिशन. बहुत लंबा रास्ता है. सारी जिंदगी यह हत्यारा आराम से मेहमान जेलों या जमानत पर गुजार सकता है. कहीं न कहीं इसे मुक़दमे से बाहर निकलने का रास्ता भी मिल जाता है. इस के मुकाबले भारतवासियों को कोई वक्त नहीं लगता मरने में. एक बटन दबा, एक बम फटा, और सैकड़ों भारतवासियों को मौत की सजा मिल गई. आतंकवादियों की अदालत में कोई सुनवाई नहीं, सीधा फ़ैसला होता है. मौत दे दो, और यह भी पता नहीं किसे. कौन मरेगा कोई नहीं जानता. बेचारा मरने वाला भारतवासी और उसके परिवार वाले यह भी नहीं जानते कि उसे किस अपराध की सजा मिली.

क्या मरने वाले का अपराध यह है कि वह भारतवासी है? क्या उसका अपराध यह है कि आज देश में एक नपुंसक सरकार है जिसे अपनी कुर्सी से प्यार है, देश और देशवासियों से नहीं. जो वोट के लिए आतंकवाद विरोधी कानून को रद्दी की टोकरी में दाल देती है और कहती है, 'प्यारे मजे करो, खूब बम चलाओ, हम तुम्हारे साथ है, बस अपने धर्म वालों से कह देना कि हमें वोट दें'.

क्या करें भारतवासी? जिस देश की सरकार आतंकवादियों के साथ हो, क्या करें उस देश के नागरिक? कोई जवाब है किसी के पास?

Sunday, 3 August 2008

विश्व मित्रता दिवस पर सबको शुभकामनाएं

अपने दुश्मन को हजार मौके दो तुम्हारा दोस्त बनने के लिए, पर अपने मित्र को एक भी मौका मत दो तुम्हारा दुश्मन बनने के लिए.

F - Few
R - Relations
I - In
E - Earth
N - Never
D – Die

उन में से एक दोस्ती है.

Saturday, 2 August 2008

कुछ लोग ऐसे ही होते हैं .....

उनका नाम है संजीव चतुर्वेदी. वह भारतीय वन सेवा में अधिकारी हैं. आज कल उनके ऊपर बिभागीय अनुशाशन कार्यवाही चल रही है. इस कार्यवाही के चलते उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. उन्होंने दो अपराध किए. पहला, वन में वृक्ष काट कर नहर बनाई जा रही थी, उन्होंने इस की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को की. उनका तबादला कर दिया गया. पर वह नहीं माने. नई पोस्टिंग में उन्होंने पाया की एक व्यक्ति की निजी जमीन पर हो रही हर्ब्स की खेती का खर्चा सरकारी खजाने से जा रहा है. उन्होंने खर्चा स्वीकृत करने से इनकार कर दिया और उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट कर दी. इस दूसरे अपराध पर उन्हें मुअत्तल कर दिया गया और उन पर अनुशासन जांच बिठा दी गई. कुछ लोग होते ही ऐसे हैं. समझते ही नहीं.क्या करें इनका?

अभी कल ही मैंने प्रेमचंद के 'नमक के दारोगा' की बात की थी. आज यह नए दारोगा निकल आए. पर क्या प्रेमचंद के दारोगा की तरह इस दारोगा को भी कोई उनकी ईमानदारी का ईनाम देने सामने आएगा?

Friday, 1 August 2008

हवा से चलेगी टाटा की नई कार

तेल के दाम जब आसमान छू रहे हों, हवा से चलनी वाली कार की ख़बर रेगिस्तान में ठंडी हवा के झोंके जैसी लगती है. पहले आप तस्वीरें देखिये, फ़िर आगे की बात करेंगे.
६ सवारियों के लिए यह कार भारत में अगले साल मिलने की सम्भावना है. यह कार एक टेंक में भरी कंप्रेस्ड हवा से चलेगी. यह एयर कार, मिनिकेट, लगभग ३.५ लाख में आएगी और एक बार पूरी हवा लेकर ३०० किमी तक चल सकेगी. रुपए ५० खर्च होंगे १०० किमी चलने में. बाकी बातें अगली किसी पोस्ट में. आज से ही सपने देखने शुरू कर दीजिये.