मुंबई हमले के बाद सारा भारत आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक हो गया (कांग्रेस के अंतुले और कुछ राजनीतिबाजों को छोड़ कर). शुरू में अंतर्राष्ट्रीय विचारधारा भी भारत के पक्ष में बहुत मजबूत नजर आई पर समय के साथ उस में कुछ नरमी नजर आने लगी. कुछ देश पाकिस्तान के पक्ष में भी दलील देने लगे. अमरीकी भारत में कुछ और पाकिस्तान में कुछ और बयान देते. फ़िर आए ब्रिटेन के विदेश सचिव. इन महाशय ने तो भारत के पक्ष की धज्जियाँ उड़ा दीं.
भारत - मुंबई हमले में पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों का हाथ है.
ब्रिटेन के विदेश सचिव - नहीं यह ग़लत है, मैं ऐसा नहीं मानता.
भारत - पाकिस्तान मुंबई हमलों के दोषियों को भारत के सौंपे.
ब्रिटेन के विदेश सचिव - नहीं, पाकिस्तान मुंबई हमलों के दोषियों को भारत नहीं सौपेंगा. उन पर पाकिस्तान में ही मुकदमा चलाया जायेगा.
भारत - पाकिस्तान की जमीन से आतंकवाद पनप रहा है.
ब्रिटेन के विदेश सचिव - नहीं, मुंबई हमलों का सम्बन्ध कश्मीर से है.
कोई भी भारतीय नागरिक इन महोदय को बर्दाश्त नहीं करेगा. मगर कांग्रेस का व्यवहार बहुत ही अजीब रहा. कांग्रेस जिसे भारत के प्रधान मंत्री के रूप में इस देश पर थोपने की कवायद कर रही है, वह ब्रिटेन के विदेश सचिव को अपने चुनाव छेत्र में पिकनिक पर ले जाता है और उसकी खूब खातिर करता है.
न तो कांग्रेस को, न कांग्रेस सरकार को, न ही इस व्यक्ति को ब्रिटेन के विदेश सचिव के इन भारत विरोधी बयानों में कोई ग़लत बात नजर आती है, न ही कोई अपमान अनुभव होता है. वह देश का अपमान करता है और यह उसे घुमाने ले जाता है और उसकी खातिर करता है. क्या ऐसे लोगों को भारतीय कहा जा सकता है?