दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
Showing posts with label common man. Show all posts
Showing posts with label common man. Show all posts

Monday, 22 December 2008

जनता एक हो सकती है पर नेता नहीं

यह भारत का दुर्भाग्य है कि किसी भी विपत्ति में भारत की जनता एक हो सकती है, पर नेता कभी देश हित में एक नहीं हो सकते. उनके अपने निजी स्वार्थ हैं जिन्हें वह हमेशा देश हित से ऊपर रखते हैं. 

मुंबई हमलों के बाद देश की जनता एक होकर खड़ी हो गई, हर नागरिक एक ही बात कह रहा था, आतंकवाद के ख़िलाफ़ हम सब एक हैं, आतंकवाद को हम किसी धर्म से जोड़ कर नहीं देखते. उस समय इस एक राय का ऐसा तीव्र ज्वार उठा था कि सरकार और सारे राजनीतिबाज घबडा गए थे. उसी का असर है कि इतनी जल्दी केन्द्रीय जांच एजेंसी और कानूनों को सख्त बनाना सम्भव हो सका. 

लेकिन राजनीतिबाज ज्यादा दिन तक अपनी घटिया राजनीति से दूर नहीं रह सके. अंतुले ने जनता की इस राय के ख़िलाफ़ बिगुल बजा दिया, कि मेरी पार्टी आतंकवाद को धर्म से जोड़ कर देखती है, मेरी पार्टी यह मानती है कि मुसलमानों को आतंकवाद से जोड़ना पार्टी और सरकार के अस्तित्व के लिए आवश्यक है. धीरे-धीरे और राजनीतिबाज भी अंतुले के साथ खड़े होने लगे. दिग्विजय सिंह, लालू और अब कम्युनिस्ट, कुछ ही दिनों में स्थिति पहले जैसी हो जायेगी. सोनिया और मनमोहन ने अभी तक अंतुले के ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठाया, यह इस बात का सबूत है कि इस सारे मामले में यह दोनों और इनकी पार्टी कांग्रेस पूरी तरह शामिल हैं. मजबूरी में कुछ कदम उठाने पड़ रहे हैं. अंतुले के माध्यम से देश के मुसलमानों को यह समझाने की कोशिश हो रही है कि कांग्रेस की सोच और नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया है. दुःख की बात यह है कि यह राजनीतिबाज यह नहीं देख रहे कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग आतंकवाद को इस्लाम से अलग देखता है और उस के ख़िलाफ़ है. यह हमेशा से उन्हें धर्म के नाम पर भड़काते रहें हैं और अब भी यही कर रहे हैं. मुंबई हमलों के बाद जो एकता देश में नजर आई थी उसे बिगाड़ने के काम  में फ़िर से लग गए हैं यह घटिया देशद्रोही राजनीतिबाज.

देश के वह नागरिक, जो सोच सकते हैं, कह सकते हैं, अपना कर्तव्य पहचानें और इन घटिया देशद्रोही राजनीतिबाजों की इन चालों को सफल न होने दें. हिन्दी ब्लागजगत एक मुहिम चलाये जिसमें अलगाववाद के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला जाय. ज्यादा से ज्यादा लेख लिखे जाय और इन लेखों पर ज्यादा से ज्यादा टिपण्णी की जाय. आइये हम सब आम आदमी मिल कर अपने देश को बाहरी और इन अंदरूनी आतंकवादियों से बचाएँ.

Saturday, 15 November 2008

समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति कैसे हों?

ईश्वर ने जिसे प्रतिष्ठा दी हो, समाज ने जिसे अधिकार दिया हो, उसे सर्व-साधारण के लिए हर समय जागना चाहिए. 

जब पैर में काँटा चुभता है तब मष्तिष्क विश्राम नहीं कर पाता है. इसी तरह साधारण से साधारण जन के कष्ट में होने पर समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति तब तक न सोयें जब तक उनका कष्ट दूर न हो जाए. 

जो समाज का दुःख स्वयं ले लेते हैं, वह नीलकंठ बन कर पूजे जाते हैं. जो समाज का सुख छीनते हैं वह राहू की तरह दुर्दशा को प्राप्त होते हैं. 

Thursday, 7 February 2008

आम आदमी का बजट

लोकसभा के चुनाव समीप आ गए हैं,
इस से याद आया उन्हें,
रहता है इस देश मैं एक 'आम आदमी'
वित्त मंत्री गए पार्टी के दफ्तर,
मिले कार्यकर्ताओं से,
आखिरी बजट कैसा हो?
'बजट हो आम आदमी' का,
सबकी यही राय थी.
उसे हर हालत मैं करना है खुश,
जिताना है आम आदमी ने हमें,
एक बार जीत जायें,
फ़िर करना अपनी मनमानी,
खूब लगाना टैक्स,
करा देना आम आदमी को याद उसकी नानी,
पर अभी तो वह ही हमारा माई वाप है.