दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Monday, 12 May 2008

दरबाजा दिखाओ इन मंत्रियों को

भारत के प्रथम मनोनीत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्री परिषद् में ऐसे अनेक मंत्री हैं जिन्हें वहाँ नहीं होना चाहिए. कांग्रेस पार्टी ने सरकार बनाईं. परिवार के बफादारों को कुर्सी दी गई. जो चुनाव में हार गए थे उन्हें भी मंत्री बना दिया गया. समर्थक दलों ने जो समर्थन दिया उस की कीमत बसूल की उन्होंने. बाहर से एक सरकार पर अन्दर से कई सरकारें.

आइये बात करें स्वास्थ्य मंत्री अम्बुमानी रामादोस की. यह सज्जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ नहीं कर पाये. बस फिल्मों में धूम्रपान और शराब पीने के पीछे पड़े रहे. असली जिन्दगी में क्या हो रहा है उसके बारे में उन्हें कुछ पता नहीं. एक ग्लोबल रिपोर्ट कार्ड के अनुसार भारत में ५३ प्रतिशत से ऊपर बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध नहीं है. प्रति वर्ष दस लाख बच्चे एक वर्ष पूरा होने से पहले ही मर जाते हैं. पर यह सज्जन एम्स के निदेशक के पीछे लगे रहे. अपनी इस व्यक्तिगत दुश्मनी में, समर्थन का दबाब दाल कर इन्होनें सरकार को भी शामिल कर लिया. सरकार ने सदन में बहुमत का ग़लत इस्तेमाल करके एम्स के कानून में ऐसा संशोधन करवा दिया जिस से एम्स के निदेशक को तुरंत नौकरी से निकाला जा सके. इस संशोधन पर राष्ट्रपति के तुरंत हस्ताक्षर करवाए गए और एम्स के निदेशक को तुरंत दरबाजा दिखा दिया गया. न तो इस मंत्री ने और न ही सरकार, सदन, राष्ट्रपति ने इस बात की चिंता की की सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के निदेशक की याचिका स्वीकार कर ली है और एक तारीख भी तय कर दी है मुकदमा सुनने के लिए. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधन को नाजायज करार दे दिया है. एम्स के निदेशक फ़िर अपने पद पर आ गए हैं. एक मंत्री की व्यक्तिगत दुश्मनी ने सरकार, सदन और राष्ट्रपति सबको शर्मिंदा किया है (मैं ऐसा मान रहा हूँ, पता नहीं इनमें से कोई शर्मिंदा हुआ भी है या नहीं).

क्यों नहीं ऐसे मंत्रियों को दरबाजा दिखाया जाता? क्या इन के बिना देश नहीं चल सकता? क्या किया है इन्होने देश और जनता के लिए? एक एम्स था उसे ख़त्म करने में सारी ताकत लगा दी. और जो नए एम्स खोले जाने थे उस प्लानिंग का तो पता नहीं क्या हुआ?