किटी पार्टी में एक गर्मागर्म बहस चल रही थी, अगर परिवार के सब सदस्य घर की जिम्मेदारियों आपस में बराबर बाँट लें और उनका ईमानदारी से निर्वाह करें तो कोई समस्या न रहे.
आने वाले चुनाव में अध्यक्ष पद की उम्मीदवार निर्मला ने अपनी आवाज़ ऊंची करते हुए कहा, "बातें तो बहुत लोग करते हैं पर असल में काम कौन करता है? आप मेरे परिवार को लीजिये, हमने घर की सारी जिम्मेदारियां आपस में बाँट रखी हैं और पूरी ईमानदारी से उन्हें निवाहते हैं. यहाँ तक की कूड़ा फैंकने तक की जिम्मेदारी भी सबमें बंटी हुई है. हम लोग प्लास्टिक की थेलिओं में कूड़ा इकठ्ठा करते हैं और जो भी सदस्य घर से बाहर जाता है कूड़े की थेलिया अपने साथ ले जाता है और सड़क पर जहाँ मौका मिला वहां फैंक देता है."
कुछ महिलाओं ने कहा,'वाह' और कुछ ने कहा 'क्या?'.
निर्मला अपनी धुन में बोल रही थीं, "आप सब जानती हैं में एक टीचर हूँ और स्कूल की बस मुझे लेने आती है. सुबह सबसे पहले में घर से निकलती हूँ. कूड़े की थेलिया साथ लेकर निकलती हूँ और जहाँ बस खड़ी होती है वहीँ सड़क पर कूड़ा फैंक देती हूँ. मेरे पति सरकार में बड़े अफसर है, दफ्तर की कार उन्हें लेने आती है. वह कूड़े की थेलिया अपने साथ ले जाते हैं और जहाँ मौका मिला, कार रुकवा कर कूड़ा सड़क पर फैंक देते हैं."
"दफ्तर नहीं ले जाते", उर्मिला बड़बड़ाईं, वोह भी अध्यक्ष पद की उम्मीदवार हैं.
निर्मला का प्रवचन चालू था, "उसके बाद मेरा बेटा और बेटी अपने अपने कालेज जाते समय अपनी कूड़े की थेलिआं साथ ले जाते हैं और सड़क पर फैंक देते हैं. एक दिन तो कमाल हो गया. में जब सड़क पर कूड़ा फैंक रही थी तब मेरे क्लास का एक बच्चा, जो उसी बस से जाता है, कूड़े की थेलिया लेकर आया और मेरे कूड़े के पास फैंक दी. उस दिन मुझे कितनी खुशी और गर्व हुआ बता नहीं सकती".
शर्मिला, जिन्हें सब निर्मला की चमची कहते हैं, बोलीं, "हाँ यह बात तो सही है, जब बच्चे आप द्बारा स्थापित आदर्श अपनाते हैं तो खुशी और गर्व तो होता ही है".
निर्मला ने और उत्साह से अपनी बात कही, "में तो सोच रही हूँ की क्लास में एनाउंस कर दूँ कि जो बच्चा घर का कूड़ा सड़क पर फैंकेगा उसे में पाँच नंबर बोनस दूँगी इम्तहान में. भई टीचर्स की तो ड्यूटी बनती है बच्चों को अच्छी बाँतें सिखाने की".
उर्मिला फ़िर बड़बड़ाईं, "मुझे ताज्जुब है कि आप को अभी तक आदर्श टीचर का एवार्ड क्यों नहीं मिला?".
निर्मला ने उर्मिला को उपेक्षा से देखा और अपनी बात आगे बढ़ाई, "एक दिन मेरा बेटा बता रहा था कि जब वह कूड़ा सड़क पर फैंक रहा था तो उसकी जीऍफ़ ने उससे कहा,'डार्लिंग तुम बड़े कूल हो'. अब वह भी कूड़ा अपने साथ लाती है मेरे बेटे के साथ सड़क पर फैंकने के लिए. एक दिन मैंने उससे पुछा, 'इतना प्यार करता है तू उससे', उसने कहा, 'हां माम, हमने तय किया है, 'जियेंगे तो साथ, मरेंगे तो साथ, कूड़ा फेंकेंगे तो साथ', और मेरी बेटी ने तो साफ़ एलान कर दिया है, शादी करूंगी तो केवल ऐसे परिवार में जो घर का कूड़ा हमारी तरह सड़क पर फैंकते हैं".
महिलाओं की प्रतिक्रिया से ऐसा लग रहा था कि निर्मला चुनाव जरूर जीतेगी. उर्मिला को अपना दिल सिंक होता हुआ महसूस हुआ. साफ़ था की इस चुनाव का मुद्दा सड़क पर कूड़ा फैंकना बनेगा. जो जितना कूड़ा सड़क पर फैंकेगा उसे उतने ज्यादा वोट मिलेंगे. उर्मिला ने निश्चय किया कि वह घर पहुँचते ही कूड़ा सड़क पर फैंकने का काम शुरू करेगी. और वह अपना ही नहीं पड़ोसियों का कूड़ा भी इकठ्ठा करके सड़क पर फेंकेगी. "मैं भी देखती हूँ कि यह कैसे चुनाव जीतती है. कूड़े का अम्बार लगा दूँगी सड़क पर. कूड़ा ही कूड़ा कर दूँगी शहर में. अगर जरूरत पड़ी तो पास के शहरों का कूड़ा भी इंपोर्ट करूंगी", उर्मिला बड़बड़ाते हुए उठीं और घर की और चल दीं. उनके चेहरे पर एक अजीब चमक थी, महिलायें उन्हें चकित सी देख रही थीं और सोच रही थीं, लगता है इस बार चुनाव खूब कूड़ेदार होगा.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
Monday, 30 June 2008
Saturday, 28 June 2008
मैं समय हूँ, मेरी बात सुनो
तुम मुझे खरीद नहीं सकते,
न ही किराए पर ले सकते हो,
क्योंकि मेरी कोई कीमत नहीं है,
मैं अपनी रफ़्तार से चलता हूँ,
किसी के लिए अपनी रफ़्तार नहीं बदलता,
राजा, रंक कोई भी हो,
सबको मेरे साथ चलना है,
नहीं चलोगे तो पिछड़ जाओगे,
मेरी कमी तुम्हें हमेशा रहती है,
पर जितनी मर्ज़ी कोशिश कर लो,
मैं जितना हूँ उतना ही मिलूंगा,
कोई मुझे खींच कर बढ़ा नहीं सकता,
मैं गुजर कर पूरी तरह नष्ट हो जाता हूँ,
फ़िर वापस नहीं आता,
कोई मुझे स्टोर नहीं कर सकता,
न ही मेरी जगह कोई और ले सकता है,
तुम्हारे हर काम को मेरी जरूरत है,
तुम्हारे हर काम में मैं खर्च होता हूँ,
हर काम मुझ पर और मुझ से होता है,
तुम मेरी शक्ति जानते हो,
फ़िर भी मेरी परवाह नहीं करते,
मुफ्त मिलता हूँ न, शायद इसलिए,
कैसे बेबकूफ हो तुम.
न ही किराए पर ले सकते हो,
क्योंकि मेरी कोई कीमत नहीं है,
मैं अपनी रफ़्तार से चलता हूँ,
किसी के लिए अपनी रफ़्तार नहीं बदलता,
राजा, रंक कोई भी हो,
सबको मेरे साथ चलना है,
नहीं चलोगे तो पिछड़ जाओगे,
मेरी कमी तुम्हें हमेशा रहती है,
पर जितनी मर्ज़ी कोशिश कर लो,
मैं जितना हूँ उतना ही मिलूंगा,
कोई मुझे खींच कर बढ़ा नहीं सकता,
मैं गुजर कर पूरी तरह नष्ट हो जाता हूँ,
फ़िर वापस नहीं आता,
कोई मुझे स्टोर नहीं कर सकता,
न ही मेरी जगह कोई और ले सकता है,
तुम्हारे हर काम को मेरी जरूरत है,
तुम्हारे हर काम में मैं खर्च होता हूँ,
हर काम मुझ पर और मुझ से होता है,
तुम मेरी शक्ति जानते हो,
फ़िर भी मेरी परवाह नहीं करते,
मुफ्त मिलता हूँ न, शायद इसलिए,
कैसे बेबकूफ हो तुम.
Saturday, 21 June 2008
कनकलता को न्याय मिलेगा
आप में से जो लोग कनकलता के साथ हुए अन्याय के बारे में जानकारी रखते हैं उनके लिए एक खुशी की ख़बर है. अब यह उमीद हो चली है की कनकलता को न्याय मिलेगा. कनकलता के साथ खड़े हुए सभी साथिओं को वधाई.
Friday, 20 June 2008
नेताजी ज्ञान यज्ञ
नेताजी की महिमा अपार है. इस महिमा को एक आम हिन्दुस्तानी ने अच्छी तरह समझा है. आज देश में हर नागरिक नेता है. कहते हैं आदमी चुनाव जीत कर नेता बन जाता है. पर असलियत में चुनाव में जीते ही क्या नेता होते हैं? अरे जिन्होनें कोई चुनाव नहीं जीता वह भी तो नेता होते हैं. ऐसे नेता तो प्रधान मंत्री तक बन जाते हैं. और जो चुनाव में हार जाते हैं क्या वह नेता नहीं रहते? पाटिल और प्रफुल्ल चुनाव हारे पर गृह मंत्री और उड्डयन मंत्री बन कर घर और हवाई जहाज में नेतागिरी कर रहे हैं. अर्जुन बफादारी के नाम पर नेतागिरी कर रहे हैं. हर आदमी नेतागिरी कर रहा है. किसी की दूकान चल जाती है. जिस की नहीं चलती वह दूकान की पटरी पर बैठ कर चालू नेताजी के साए में नेतागिरी कर लेता है.
हिन्दी ब्लाग जगत में ही देखिये कितने नेता है? गिनती करेंगे तो दंग रह जायेंगे. पार्टियां बना रखी हैं सबने. कभी कभी जूतम-पैजार भी हो जाती है. देखी होंगी आप सबने. बात सही है पर विरोध करना है क्योंकि दूसरी पार्टी वाले ने लिखी है.
भारत नेताओं का देश है. जंगली घास की तरह उगते हैं नेता इस देश में. जो पत्थर उठाएंगे, उसके नीचे दो चार नेता धंदे की बात करते नजर आयेंगे. अगर आप से किसी का यह कह कर परिचय कराया जाए कि बहुत पढ़े-लिखे हैं, समझदार हैं, ईमानदार है, परोपकारी हैं, तो क्या कोई असर होगा आप पर? अगर मात्र इतना कह दिया जाए कि इनकी मंत्री जी से जान पहचान है तो आप आधे झुक जायेंगे उन्हें दंडवत करने में. मन ही मन गाली देंगे ख़ुद को कि फोटो खींचने का बंदोवस्त क्यों नहीं कराया.
नेता जी से ज्यादा बड़ा नेता उन का सचिव होता है. नेता जी के ड्राइवर की नेतागिरी के तो क्या कहने. बड़े-बड़े तीसमारखां उन्हें सलाम करते हैं. जो काम नेताजी नहीं करवा पाते वह यह लोग करा लेते हैं. कभी-कभी तो नेताजी ख़ुद इन की मदद लेते हैं. नेताओं में आपस में रंजिश हो सकती है, पर उनके सचिवों और ड्राइवरों में कभी रंजिश नहीं होती. नेताजी हर दरवाजा खुला रखते हैं.
लालू जी इतने सालों से असली नेतागिरी कर रहे हैं पर अब शाहरुख के साथ उस की ऐक्टिंग करना चाहते हैं. उनके आने से ब्लाग जगत में भी प्रजातंत्र आ गया है. उन्हें सेलिब्रिटी ब्लॉगर कहा जा रहा है. लिखता कोई और है पर नेताजी तो लालू हैं, इसलिए ब्लॉगर तो उन्हें ही कहा जायेगा, और क्योंकि वह एक सेलिब्रिटी हैं इस लिए मात्र ब्लॉगर कहना उनकी तौहीन होगी. उनके आने से ब्लाग जगत में चमचागिरी का प्रवेश हो गया है.
नेता पर जितना लिखा जाए उतना कम है. बहुत कठिन विषय है यह. पर एक कोशिश की है मैंने.
हिन्दी ब्लाग जगत में ही देखिये कितने नेता है? गिनती करेंगे तो दंग रह जायेंगे. पार्टियां बना रखी हैं सबने. कभी कभी जूतम-पैजार भी हो जाती है. देखी होंगी आप सबने. बात सही है पर विरोध करना है क्योंकि दूसरी पार्टी वाले ने लिखी है.
भारत नेताओं का देश है. जंगली घास की तरह उगते हैं नेता इस देश में. जो पत्थर उठाएंगे, उसके नीचे दो चार नेता धंदे की बात करते नजर आयेंगे. अगर आप से किसी का यह कह कर परिचय कराया जाए कि बहुत पढ़े-लिखे हैं, समझदार हैं, ईमानदार है, परोपकारी हैं, तो क्या कोई असर होगा आप पर? अगर मात्र इतना कह दिया जाए कि इनकी मंत्री जी से जान पहचान है तो आप आधे झुक जायेंगे उन्हें दंडवत करने में. मन ही मन गाली देंगे ख़ुद को कि फोटो खींचने का बंदोवस्त क्यों नहीं कराया.
नेता जी से ज्यादा बड़ा नेता उन का सचिव होता है. नेता जी के ड्राइवर की नेतागिरी के तो क्या कहने. बड़े-बड़े तीसमारखां उन्हें सलाम करते हैं. जो काम नेताजी नहीं करवा पाते वह यह लोग करा लेते हैं. कभी-कभी तो नेताजी ख़ुद इन की मदद लेते हैं. नेताओं में आपस में रंजिश हो सकती है, पर उनके सचिवों और ड्राइवरों में कभी रंजिश नहीं होती. नेताजी हर दरवाजा खुला रखते हैं.
लालू जी इतने सालों से असली नेतागिरी कर रहे हैं पर अब शाहरुख के साथ उस की ऐक्टिंग करना चाहते हैं. उनके आने से ब्लाग जगत में भी प्रजातंत्र आ गया है. उन्हें सेलिब्रिटी ब्लॉगर कहा जा रहा है. लिखता कोई और है पर नेताजी तो लालू हैं, इसलिए ब्लॉगर तो उन्हें ही कहा जायेगा, और क्योंकि वह एक सेलिब्रिटी हैं इस लिए मात्र ब्लॉगर कहना उनकी तौहीन होगी. उनके आने से ब्लाग जगत में चमचागिरी का प्रवेश हो गया है.
नेता पर जितना लिखा जाए उतना कम है. बहुत कठिन विषय है यह. पर एक कोशिश की है मैंने.
Thursday, 19 June 2008
या गुंडई तेरा ही आसरा
एक आन्दोलन हुआ. राष्ट्र की संपत्ति नष्ट की गई. रेल की पटरियाँ उखाड़ी गईं. आवागमन ठप्प कर दिया गया. आम आदमियों को जम कर तकलीफ पहुंचाई गई. करीब चालीस आदमी मारे गए. व्यापार को नुक्सान हुआ. फ़िर बातचीत शुरू हुई और समझौता हो गया. सब खुश हो गए. एक दूसरे को धन्यवाद दिए गए, तारीफ़ की गई. गुंडई का मीठा फल मिला. कुछ और ने धमकी दी कि अगर इन्हें मीठा फल दिया गया तो हम भी गुंडई करेंगे. सो समझोते में उन्हें भी मीठा फल दे दिया गया. वह भी खुश हो गए.
गुंडई देवी की जय.
गुंडई देवी की जय.
Sunday, 15 June 2008
एक नए कूड़ेदान का उदघाटन
कल शनिवार, १४ जून २००८ को मनमोहन जी की सब से हरी-भरी, साफ-सुथरी और सुंदर दिल्ली के पश्चिम विहार, बी जी ३ ब्लाक में एक नए कूड़ेदान का उदघाटन हुआ. यह उदघाटन किसी नेता के कर-कमलों द्वारा नहीं हुआ. बस इस ब्लाक के निवासी एक वरिष्ट नागरिक के मन में आया की सामने सरक पर एक नए कूड़ेदान का उदघाटन कर दिया जाए. बस वह उठे, घर का सारा कूड़ा दो प्लास्टिक की थेलिओं में समेटा और चल पड़े इस महान कार्य को सम्पन्न करने.
उदघाटन समारोह में तीन गायें और एक कौवा थे. मैं पार्क से सैर करके लौट रहा था. मैंने जब इस महान कार्य को देखा तो इस की फोटो खींचने के लिए अपना केमरा निकाला. पर तब तक वह वरिष्ट नागरिक अपना कार्य संपन्न कर अपने घर में घुस चुके थे. फोटो में आए सिर्फ़ मेहमान नाश्ता करते हुए।
आज रविवार की फोटो देखिये. कूड़ेदान खूब तरक्की कर रहा है।

उदघाटन समारोह में तीन गायें और एक कौवा थे. मैं पार्क से सैर करके लौट रहा था. मैंने जब इस महान कार्य को देखा तो इस की फोटो खींचने के लिए अपना केमरा निकाला. पर तब तक वह वरिष्ट नागरिक अपना कार्य संपन्न कर अपने घर में घुस चुके थे. फोटो में आए सिर्फ़ मेहमान नाश्ता करते हुए।
आज रविवार की फोटो देखिये. कूड़ेदान खूब तरक्की कर रहा है।
Saturday, 14 June 2008
औरत क्यों रोती है?
एक बच्चे ने अपनी माँ से पूछा, "माँ आप रोती क्यों हैं?",
"क्योंकि मैं एक औरत हूँ", माँ ने कहा,
"मैं समझा नहीं", बच्चा बोला,
माँ ने उसे बाहों में समेट कर प्यार किया और बोली, "तुम नहीं समझोगे, पर चिंता मत करो सब ठीक है".
बच्चे ने पिता से पूछा, "माँ बिना बात के क्यों रोती है?",
पिता ने कहा, "सब औरतें बिना बात के रोती हैं",
बच्चा बड़ा हो गया पर यह नहीं समझ पाया कि माँ क्यों रोती है.
परेशान एक दिन उस ने भगवान् से पूछा, "है भगवन, औरतें अक्सर रोती क्यों हैं?",
भगवन ने जवाब दिया, "मैंने जब औरत को बनाया तो सोचा इसे स्पेशल होना चाहिए. मैं पुरूष बना कर गलती कर चुका था. अब उस गलती को ठीक करना था. इसलिए मैंने औरत को वह सब कुछ दिया जो पुरूष को नहीं दिया था. मैंने औरत को एक अंदरूनी ताकत दी जिससे वह मेरी स्रष्टि को आगे बढ़ा सके. और फ़िर मैंने उसे दिया एक आंसू, जिसे वह बहा सके जब जरूरत हो. जब तुम किसी औरत को रोते हुए देखो तब यह सोचना कि यह तुम्हारी कमजोरी है जो उस की आंखों से बाहर आ रही है. औरत कभी अपने लिए नहीं रोती. वह हमेशा तुम्हारे लिए रोती है. और यह वह अंदरूनी ताकत है जो मैंने उसे दी है. औरत के बिना पुरूष अधूरा है, उस की कोई हैसियत नहीं है. वह ख़ुद को पूर्ण और ताकतवर समझता है और यही उस की कमजोरी है."
"क्योंकि मैं एक औरत हूँ", माँ ने कहा,
"मैं समझा नहीं", बच्चा बोला,
माँ ने उसे बाहों में समेट कर प्यार किया और बोली, "तुम नहीं समझोगे, पर चिंता मत करो सब ठीक है".
बच्चे ने पिता से पूछा, "माँ बिना बात के क्यों रोती है?",
पिता ने कहा, "सब औरतें बिना बात के रोती हैं",
बच्चा बड़ा हो गया पर यह नहीं समझ पाया कि माँ क्यों रोती है.
परेशान एक दिन उस ने भगवान् से पूछा, "है भगवन, औरतें अक्सर रोती क्यों हैं?",
भगवन ने जवाब दिया, "मैंने जब औरत को बनाया तो सोचा इसे स्पेशल होना चाहिए. मैं पुरूष बना कर गलती कर चुका था. अब उस गलती को ठीक करना था. इसलिए मैंने औरत को वह सब कुछ दिया जो पुरूष को नहीं दिया था. मैंने औरत को एक अंदरूनी ताकत दी जिससे वह मेरी स्रष्टि को आगे बढ़ा सके. और फ़िर मैंने उसे दिया एक आंसू, जिसे वह बहा सके जब जरूरत हो. जब तुम किसी औरत को रोते हुए देखो तब यह सोचना कि यह तुम्हारी कमजोरी है जो उस की आंखों से बाहर आ रही है. औरत कभी अपने लिए नहीं रोती. वह हमेशा तुम्हारे लिए रोती है. और यह वह अंदरूनी ताकत है जो मैंने उसे दी है. औरत के बिना पुरूष अधूरा है, उस की कोई हैसियत नहीं है. वह ख़ुद को पूर्ण और ताकतवर समझता है और यही उस की कमजोरी है."
Friday, 13 June 2008
ऐसे बेटे सब नेताओं को दो भगवान
नेताजी की पत्नी ने कहा, "आपका बेटा बिगड़ रहा है. अजीब बातें करता है. कहता है इस देश में सारी समस्याएं नेताओं के कारण हैं, और यदि नेताओं को ख़त्म कर दिया जाए तो समस्याएं ख़त्म हो जायेंगी. यह भी कहता है, पिताजी की भ्रष्टाचार की कमाई को हाथ भी नहीं लगाऊँगा"।
"यह तो चिंता की बात है", नेताजी ने कहा, "लगता है हिरणयकश्यपू के घर में प्रहलाद पैदा हो गया है".
"अरे तो कुछ करो न", पत्नी ने चिंता भरे स्वर में कहा, "क्यों नहीं उसे राजनीति की शिक्षा देते?.
नेताजी ने सर हिलाया, बेटे को बुलाया और पहला पाठ शुरू हुआ.
उन्होंने पूछा, "प्रजातंत्र क्या है".
जवाब मिला, "जनता में भेद करने का तंत्र".
"में समझा नहीं", उन्होंने कहा.
जवाब मिला, "आप समझेंगे भी नहीं. क्योंकि भेद तो आप ही करते हैं".
"तो समझाओ न", उन्होंने कहा गुस्से से.
जवाब मिला, "तो गिनिए".
आम आदमी, वीआईपी, वीवीआईपी
हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध (भारतीय कोई नहीं)
बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक
एससी, एसटी, ओबीसी, ओबीसी में ओबीसी, सूखी लेयर, क्रीमी लेयर
सेकुलर, कम्युनल
आम आदमी का बेटा, नेताजी का बेटा.
"बस बकबास बंद करो", नेताजी चिल्लाए, "इसे बंद करो वरना यह मुझे बाहर कर देगा".
घर का नौकर (एक आम आदमी) यह सब देख रहा था. उसनें मन ही मन भगवान से प्रार्थना की, "ऐसे बेटे सब नेताओं को दो भगवान्".
"यह तो चिंता की बात है", नेताजी ने कहा, "लगता है हिरणयकश्यपू के घर में प्रहलाद पैदा हो गया है".
"अरे तो कुछ करो न", पत्नी ने चिंता भरे स्वर में कहा, "क्यों नहीं उसे राजनीति की शिक्षा देते?.
नेताजी ने सर हिलाया, बेटे को बुलाया और पहला पाठ शुरू हुआ.
उन्होंने पूछा, "प्रजातंत्र क्या है".
जवाब मिला, "जनता में भेद करने का तंत्र".
"में समझा नहीं", उन्होंने कहा.
जवाब मिला, "आप समझेंगे भी नहीं. क्योंकि भेद तो आप ही करते हैं".
"तो समझाओ न", उन्होंने कहा गुस्से से.
जवाब मिला, "तो गिनिए".
आम आदमी, वीआईपी, वीवीआईपी
हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध (भारतीय कोई नहीं)
बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक
एससी, एसटी, ओबीसी, ओबीसी में ओबीसी, सूखी लेयर, क्रीमी लेयर
सेकुलर, कम्युनल
आम आदमी का बेटा, नेताजी का बेटा.
"बस बकबास बंद करो", नेताजी चिल्लाए, "इसे बंद करो वरना यह मुझे बाहर कर देगा".
घर का नौकर (एक आम आदमी) यह सब देख रहा था. उसनें मन ही मन भगवान से प्रार्थना की, "ऐसे बेटे सब नेताओं को दो भगवान्".
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