दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.

Tuesday, 26 August 2008

मनमोहन जी के विडियो गेम

पति - अजी सुनती हो, मनमोहन जी के विडियो गेम बन गए हैं अब. इन में वह उछल उछल कर महंगाई, आतंकवाद जैसे दुश्मनों का मुकाबला करके उन्हें हराते हैं.
पत्नी - चलो अच्छा हुआ, असल जिंदगी में तो वह कुछ कर नहीं पाये.

पति - उमा भारती ने कहा है कि वीजेपी ने उन्हें मारने का षड़यंत्र किया है.
पति - यह वीजेपी है ही ऐसी. कुछ समय पहले इस ने मनमोहन को मारने के लिए हवन करवाया था.

पति -शबाना आजमी ने कहा है कि भारतीय प्रजातंत्र भारतीय मुसलमानों के ख़िलाफ़ है.
पत्नी - एक मकान दे दो उसे, तारीफ़ करने लगेगी.

पति - अदालत ने कहा हुसैन ने मां दुर्गा की नंगी तस्वीर बना कर कुछ ग़लत नहीं किया.
पत्नी - अच्छा होता हुसैन जज की मां की नंगी तस्वीर बनाता.

पति - अरुंधती ने कहा है कि कश्मीर पाकिस्तान को दे देना चाहिए.
पत्नी - मैं कहती हूँ अरुंधती को ही पाकिस्तान को दे देना चाहिए.

पति - शीला दीक्षित न कहा है, दिवाली तक दिल्ली की सड़कें ठीक हो जानी चाहियें.
पत्नी - ठीक ही तो है, गिफ्ट लाने वालों की सुविधा का ख्याल तो करना होगा.

पति - ख़बर है कि नई वोटर लिस्ट में शीला दीक्षित की तस्वीर में कुछ गड़बड़ हो गई है.
पत्नी - होना तो यह चाहिए कि हर वोटर के नाम के सामने शीला जी की फोटो होनी चाहिए. आखिरकार वह दिल्ली के सब नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं.

पति - ख़बर है कि औसतन हर दिन दिल्ली में तीन महिलाओं की चैन खींची जाती हैं.
पत्नी - इतना बड़ा शहर और सिर्फ़ तीन घटनाएं. लोग जबरदस्ती दिल्ली पुलिस को निकम्मा कहते हैं.

Sunday, 24 August 2008

कैसे बना चीन नंबर एक ओलंपिक्स में?

दुनिया के लगभग सभी देशों ने ओलंपिक्स में भाग लिया। मेजबान चीन नंबर एक पर रहा। ऐसा कैसे सम्भव हुआ? इस के लिए नीचे दी ख़बर को पढ़िये। क्या भारत में ऐसा कुछ होना सम्भव है?

१०८ साल में एक भारतीय ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता और वह भी अपने बलबूते पर। उसे ईनाम बाँट कर सारे प्रदेश सरकारें इस जीत को ख़ुद में बाँट रही हें. ख़ुद कुछ नहीं करेंगे पर अगर कोई अपने बलबूते पर जीत गया तो उसे हार पहनाकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा देंगे। ऐसी शर्मनाक स्थिति में भारत, एक राष्ट्र के रूप में, कभी कुछ नहीं कर पायेगा खेलों में।

Saturday, 23 August 2008

अतिथि देवता होता है

पति - अजी सुनती हो, कल दिल्ली के वकीलों ने हड़ताल की थी. किसी कोर्ट में काम नहीं हो सका.
पत्नी - शर्म आनी चाहिए इन वकीलों को. कितने बेचारे लोगों की तारीखें होगी मुकदमों की. भारत में न्याय ग़लत लोगों के हाथ में बंदी हो गया है. पर बात क्या थी?
पति - दिल्ली के दो वरिष्ट वकीलों ने एक मुकदमें के मुख्य गवाह को पैसे देकर तोड़ने की कोशिश की. एक वचाव पक्ष का वकील था और दूसरा सरकारी वकील, और दोनों माने-जाने वकील. अदालत ने इसे अदालत की अवमानना माना और इन वकीलों को सजा दे दी. इस पर वकीलों ने हड़ताल कर दी.
पत्नी - ग़लत किया अदालत ने. जैसे लोक सभा में एमपी रिश्वत ले सकता है बैसे ही वकील को भी अदालत में कुछ भी ग़लत कर सकने की आजादी होनी चाहिए. आख़िर सरकार ने जजों द्बारा भ्रष्टाचार पर कानून बनाने से तो मना कर ही दिया है. सरकारी बाबू के रिटायर होने के बाद भी उस पर भ्रष्टाचार का मुकदमा न चल पाये इस का बंदोबस्त भी सरकार ने कर दिया है. बेचारे वकीलों ने क्या जुर्म किया है कि वह गवाहों को भी नहीं तोड़ सकते.
पति - बात तो तुम ठीक कहती हो. भारत में प्रजा का तंत्र है इस लिए सजा भी प्रजा को ही मिलनी चाहिए. सरकारी नेता और बाबू, जज, वकील, पुलिस, नेताओं के घर वाले, यह सब तो प्रजातंत्र के अतिथि हैं और अतिथि देवता होता है.

Thursday, 21 August 2008

इस देश में सब असंतुष्ट हैं

शायद भारत ही एक ऐसा देश होगा जिस में भारत की प्रथम नागरिक से लेकर लाइन में सबसे पीछे खड़े आम नागरिक तक सब असंतुष्ट हैं. प्रथम नागरिक ने तो अपना असन्तोष प्रकट कर दिया अपने भाषण में जो उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिया. प्रधान मंत्री ने लाल किले की प्राचीर से अपना असंतोष प्रकट किया. यह लोग दूसरों से कहते हैं कि वह इनका असंतोष दूर करने के लिए काम करें. यह ख़ुद कुछ नहीं करते. यह इतना भी भी नहीं सोचते कि कुछ लोग इन के कामों से असंतुष्ट हो सकते हैं.

अभी पिछले कुछ दिनों में कुछ और लोगों ने भी असंतोष प्रकट करने की परम्परा निभाई. भारत सरकार में रेल मंत्री लालू प्रसाद ने सिमी पर भारत सरकार द्बारा पाबंदी लगाने पर असंतोष प्रकट किया. अब ऐसा कहते हुए इन्होनें यह भी नहीं सोचा कि यह ख़ुद भी इस पाबंदी के लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि यह उसी सरकार में मंत्री हैं. अगर पाबंदी ग़लत है तो यह सरकार में क्या कर रहे हैं? शराफत तो यह होती कि यह सरकार से इस्तीफा देते और सिमी में शामिल हो जाते. पर यह तो राजनीतिबाज हैं और राजनीति का शराफत से क्या लेना देना? इन की देखा देखी राम विलास पासवान और मुलायम सिंह ने भी सिमी की पाबंदी पर असंतोष प्रकट कर दिया. सिमी मुसलमानों का संगठन है और यह मुसलमानों के हमदर्द होने का नाटक करते हैं, इस लिए देश को एक तरफ़ करके इन्हें आतंकवाद का साथ देना जरूरी हो गया. इनकी इस हरकत से बहुत से आम नागरिक असंतुष्ट हैं, पर मीडिया उन के असंतोष को नहीं छापेगा.

शबाना आजमी एक अच्छी कलाकार हैं. उनके पति एक अच्छे शायर हैं. भारत के नागरिक उनकी बहुत इज्जत करते हैं, या यह कहिये कि उन्हें सर आंखों पर विठाते हैं. अभी पता लगा कि शबाना जी भी असंतुष्ट हैं और वह भी भारतीय प्रजातंत्र से. इन्हें असंतोष है कि भारतीय प्रजातंत्र मुसलमानों के ख़िलाफ़ है. मुंबई में एक मकान न मिलने पर यह इतनी असंतुष्ट हो गईं कि भारतीय प्रजातंत्र पर ही तोहमत लगा दी. एक असंतुष्ट अजहरुद्दीन थे जिन्होनें यह तोहमत दी थी कि उन्हें मुसलमान होने के कारण मेच फिक्सिंग में फंसाया गया.

अगर व्यक्तिगत असंतुष्टि कि बात की जाय तो लिस्ट बहुत लम्बी है. करात मनमोहन सिंह से असंतुष्ट हैं और सोमनाथ करात से. मायावती केन्द्र सरकार से असंतुष्ट हैं. मुलायम मायावती से असंतुष्ट है. आम नागरिक इन सबसे असंतुष्ट है. दिल्ली वाले शीला दीक्षित से असंतुष्ट हैं. कश्मीरी भारत से असंतुष्ट हैं. भारतीय नागरिक कश्मीरियों के अलगाववादी नेताओं से असंतुष्ट हैं. जम्मू वाले सरकार की मुस्लिमपरस्त नीतिओं से असंतुष्ट हैं. राज ठाकरे यूपी और बिहार वालों से असंतुष्ट हैं. मतलब यह कि असंतुष्ट होना तो एक तरह से राष्ट्रिय कर्तव्य हो गया है. सब अपना राष्ट्रिय कर्तव्य निभा रहे हैं.

में उन ब्लागर्स से असंतुष्ट हूँ जो मेरे ब्लाग पर तो आते हैं पर कमेन्ट पोस्ट नहीं करते. में चोखेरवालिओं की हर समय पुरुषों को कोसने की आदत से असंतुष्ट हूँ तो चोखेरवालियां इस बात पर मुझसे असंतुष्ट हैं कि में उन की हाँ में हाँ नहीं मिलाता. मेरे अपार्टमेंट्स के कुछ लोग इस बात पर मुझसे असंतुष्ट हैं कि में उनके द्वारा फैंके गए कचरे की फोटो खींच कर अपने ब्लाग पर पोस्ट कर देता हूँ. मन्दिर के पुजारी इस बात पर असंतुष्ट हैं कि मन्दिर प्रशासन उन्हें मोबाइल खरीद कर नहीं देता. अगर भारत के नागरिकों कि असंतुष्टि के बारे में विस्तार से लिखा जाय तो कई महाकाव्य बन सकते हैं. फिलहाल तो यह पोस्ट यहीं समाप्त करता हूँ.

Monday, 18 August 2008

मौसम गीला,मन भी गीला

कल अवकाश था,
पुराना बक्सा साफ़ करने बैठ गया,
बहुत सी यादें ताजा हो गईं,
कुछ खट्टी, कुछ मीठी, कुछ कड़वी,
फ़िर मिला एक बण्डल,
गोल लपेटे बेंड से बंधे प्रेम पत्रों का,
मौसम गीला था, मन भी गीला हो गया।

रात-रात जाग कर लिखे थे यह प्रेम पत्र,
पर दे नहीं पाया था तुम्हें,
जब उड़ा देती थी तुम दूसरे प्रेम पत्र,
टुकड़े -टुकड़े कर हवा में,
डर जाता था में,
क्या मेरे प्रेम पत्र का भी यही अंजाम होगा?
फ़िर पहुँच जाता वह नया प्रेम पत्र भी बक्से में कपड़ें के नीचे।

कालिज की पढ़ाई पूरी हुई,
सब साथी चले गए इधर-उधर,
धीरे-धीरे खबरें आना भी बंद हो गई,
माँ बाबा कहते रहे,
कहते-कहते चले भी गए,
प्रेम किसी से, शादी किसी से,
तैयार नहीं कर पाया था ख़ुद को,
सुना था तुम ने भी शादी नहीं की,
शायद किसी विशेष प्रेम पत्र की प्रतीक्षा में।

आज पुराने प्रेम पत्रों का बण्डल हाथ में लेते,
एक ख्याल आया मन में,
तन काँप गया, मन भीग गया,
कलेजा मुंह को आया,
इस बण्डल में तो नहीं है,
वह विशेष प्रेम पत्र!

Saturday, 16 August 2008

जीवन का कोरा पन्ना

अंतर्मन के श्वेत पत्र पर,
किसका नाम तुम्हें लिखना था?
मन का मीत, प्रीत का संगी,
यह सम्मान किसे मिलना था?
वूझ-वूझ कर हार गया मैं,
नहीं पहेली सुलझा पाया,
इतना ही अनुमान हुआ बस,
मेरा प्रेम तुम्हें भाया,
अमर, असीमित मेरे प्रेम को,
तुमने बार-बार ठुकराया,
अन्जाये सायों के पीछे,
इतना जीवन व्यर्थ गवांया।

जीवन का यह कोरा पन्ना,
अब मटमैला सा दिखता है,
में भी हारा, तुम भी हारी,
अजब हमारा यह रिश्ता है,
जीवन की संध्या समीप है,
आओ अपनी भूल सुधारें,
प्रेम बाँट कर प्रेम समेटें,
एक दूजे पर तन मन बारें।

जीवन के कोरे पन्ने पर,
हमने सही नाम लिखना है,
मन के मीत, प्रीत के संगी,
यह सम्मान हमें मिलना है,
अब तक जो खोया है हमने,
वह सब पाने की उमंग है,
जीवन के कोरे पन्ने को,
रंगने का रंग प्रेम-रंग है।

Friday, 15 August 2008

बोलो जय भारत माता की, बोलो बार बार जय हिंद

मैं बच्चा था एक वर्ष का,
जब पन्द्रह अगस्त आया था,
आधी रात सूरज निकला था,
मां ने मुझको बतलाया था,
आजादी के रंग में रंग कर,
नया तिरंगा फहराया था,

सुंदर सुंदर वस्त्र पहन कर,
हम सब विद्यालय जाते थे,
झंडा फहरा, राष्ट्र गान गा,
सब मिल कर लड्डू खाते थे,
अब सोते हैं, सुबह देर तक,
छुट्टी का आनंद लूटते,
लाल किले की प्राचीरों पर,
कुछ न कुछ हर साल भूलते.

आओ सोचें,
इतने वर्ष बिता कर हमने,
क्या खोया है क्या पाया है?
राष्ट्र मंच पर कहाँ खड़ें हैं,
नायक हैं या खलनायक हैं,
हैं सुपुत्र भारत माता के,
या उस के दुःख का कारण हैं?

आज़ादी की वर्षगाँठ पर,
न कोई उत्सव, न कोई मेला,
कुछ तो समय निकालो साथी,
मां का मन्दिर पड़ा अकेला,
भारत माता के चरणों में,
आओ चलो नमन कर आयें,
मरे नहीं कुछ प्राण शेष हैं,
आओ माता को बतलाएं,
पुत्रों का कर्तव्य निभा कर,
मां का वरद हस्त पा जायें,
फ़िर से बनें राष्ट्र का गौरव,
ऐसा कोई काम कर जाएँ.

लाल किले से राजनीति का भाषण देकर,
नेता तो कर्तव्य निभाते,
पर हम आम आदमी को तो,
इस प्यारे पन्द्रह अगस्त पर,
कितने नए वचन भरने हैं,
नया राष्ट्र निर्माण करंगे,
ऐसे कई काम करने हैं.
कर्मचारी हों या व्यापारी,
चाहे सैनिक या किसान हों,
शत, सहस्त्र, शत, शत वर्षों तक,
ऊंची राष्ट्र की आन बान हो.

बोलो जय भारत माता की,
बोलो बार बार जय हिंद.

Thursday, 14 August 2008

आम आदमी की सरकार का एक चहरा यह भी है

कारगिल युद्ध सभी को याद होगा। सरकार ने एलान किया था कि इस युद्ध में शहीद हुए फौजिओं के आश्रितों को पेट्रोल पम्प दिए जायेंगे. एक शहीद फौजी की मां ने भी आवेदन दिया। सरकार ने उस का आवेदन यह कह कर ठुकरा दिया कि वह मेट्रिक पास नहीं है।

ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने पर महाराष्ट्र सरकार ने बिंद्रा को दस लाख रुपए ईनाम देने का ऐलान किया। एक अखबार ने लिखा एक पहलवान के बारे में जिस ने भारत के लिए पहला पदक जीता था, हेलसिंकी ओलम्पिक में पहलवानी प्रतियोगिता में, कांस्य पदक। यह पहलवान जाधव महाराष्ट्र का था और बहुत गरीबी में इस ने जिंदगी गुजारी। हेलसिंकी जाने के लिए उस ने जो उधार लिया था उसे चुकाने में सारी जिंदगी लगा रहा और एक बेनाम मौत मर गया।

दिल्ली के तैमूर नगर में गैरकानूनी तौर पर रह रहे बांग्लादेशियों ने दिल्ली पुलिस की जम कर पिटाई की। पुलिस बेचारी स्व-रक्षा में भी गोली नहीं चला सकी। आखिरकार मामला मुस्लिम वोटों का है।