दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Sunday, 4 January 2009

नव वर्ष का दर्द!!!

क्या सुनी तुमने,
एक दर्द भरी सिसकी,
मन की गहराइयों से उठती,
दर्द की आवाज?

कान बज रहे हैं तुम्हारे,
नव वर्ष के आगमन पर,
हो रहे इस शोर में,
सुन रहे हो तुम,
एक दर्द भरी सिसकी,
एक पैग और ले लो,
सब ठीक हो जायेगा. 

हँसी में मत उड़ाओ मेरी बात,
कोई बाकई सिसक रहा है,
मैं पहचानता हूँ इस दर्द की आवाज को,
अक्सर सुना है मैंने इसे,
आजादी की हर वर्षगाँठ पर,
होली, दिवाली, गुरु पर्व और ईद पर,
हर बार जब नया साल आता है,
यह दर्द की आवाज आती है. 

कौन है यह?
क्या दर्द है इसे?
देश आगे बढ़ रहा है,
हर और तरक्की हो रही है,
लोग खुश हैं, नाच रहे हैं, गा रहे हैं,
पर यह दर्द कम क्यों नहीं होता?
लोग इसे सुन क्यों नहीं पाते?
मैं सुन पाता हूँ,
पर कुछ कर नहीं पाता,
छुपाने को अपनी नपुंसकता,
एक पैग और लेता हूँ,
और फ़िर हो जाता हूँ शामिल,
नाच-गानों के शोर में. 

नया साल सब को मुबारक हो.