नाम से तो यह लगता है कि यह परिषद् राष्ट्रीय एकता के लिए काम करती है, पर हकीकत में यह एक राजनीतिक अखाड़ा है जिस में अलग-अलग पार्टियों के पहलवान एक दूसरे पर गालियों का प्रहार करते हैं और अपने-अपने वोट बेंक को यह दिखाते हैं कि देखो 'वोट जी' हम आपके लिए किस तरह युद्ध कर रहे हैं, मेहरबानी करके हमें ही वोट देना. कल सोमवार को इस परिषद् की मीटिंग होगी, पर गाली-गलौज का एजेंडा पहले ही तय हो गया है. कांग्रेस को शायद लगा कि उस के पास गालीबाजों की कमी है तो उस ने एक चैम्पियन गालीबाज को इस परिषद् में मनोनीत कर दिया. अब देखियेगा इस गालीबाज का कमाल.
इस परिषद् को काम तो जोड़ने का करना चाहिए पर यह काम करती है तोड़ने का. आतंकवाद, मजहबी दंगे, और ऐसे बहुत से मुद्दे हैं जिन पर इस परिषद् को बैठकर, ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए और इस समस्याओं का हल तलाशना चाहिए. पर यह सारे पहलवान करंगे आग में घी डालने का काम. शुरुआत करेंगे मनोनीत प्रधान मंत्री जी. सामने का मोर्चा संभालेंगे विपक्ष के नेता. बाकी सारे पहलवान अपनी-अपनी तरफ़ से आग में आहुतियाँ देंगे. एक दूसरे पर इल्जाम लगायेंगे. दूसरों को 'नफरत के सौदागर' और ख़ुद को 'मोहब्बत का मसीहा' साबित करेंगे. पुलिस और सुरक्षा एजेंसिओं को खूब गालियाँ देंगे. अगर नफरत नापने का कोई यंत्र होता तो बैठक से पहले और बैठक के बाद में नफरत कई गुना ज्यादा हो गई है यह साबित होता.
मजेदार बात यह है कि इन सबको और जनता को भी यह पता है कि किस पहलवान ने क्या दांव लगाना है, किस ने किस पर क्या इल्जाम लगाना है, किसने किस को क्या गाली देनी है. सब के भाषण पहले से तैयार हैं, हर हालत में इन्होनें अपने-अपने भाषण सुना देने है. मुकाबला होगा कौन कितना ज्यादा चिल्लाता है. 'एकता' की अर्थी जलाएंगे और 'विभाजन' को और मजबूत करेंगे यह लोग अपने भाषणों से. बेचारे असहाय 'वोट जी' को लगेगा कि इस परिषद् का नाम 'राष्ट्रिय एकता परिषद्' से बदल कर 'राष्ट्रिय एकता-विध्वंस परिषद्' रख देना चाहिए.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Sunday, 12 October 2008
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