दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Saturday, 25 April 2009

शन्नो हमें माफ़ कर देना

हम तुम्हारे अपराधी हैं शन्नो,
पर हम क्या करें?
एक बड़े परिवार की बिटिया बीच में आ गई,
और हमारा बिगड़ा सोच और ज्यादा गड़बड़ा गया,
मैं मंत्री हूँ कोई कृष्ण नहीं,
जो पहुँच जाऊं विदुर के यहाँ,
तुम्हारे स्कूल के साथी अंग्रेजी नहीं बोलते,
स्कूल के दरवाजे पर मोमबत्ती नहीं जलाते,
अब कैसे जाये मीडिया तुम्हारे घर?
पुलिस को हमने सफारी दी है,
इतनी महंगी कार कैसे जायेगी?
तुम्हारे घर की टूटी-फूटी सड़क पर,
डाक्टरी रिपोर्ट अब आर्डर पर बनती है,
कैसे लिखें तुम्हारी मौत कैसे हुई?
अब इस आधार पर ही तो दे पायेगा,
शिक्षा विभाग क्लीन चिट टीचर को,
अब क्या-क्या सफाई दें तुमको,
शन्नो बस तुम हमें माफ़ करदो,
हाँ एक सलाह देनी है तुमको,
अगले जन्म में बड़े घर में जन्म लेना.

Thursday, 17 April 2008

क्या उन्हें दिखाई नहीं देता या .....

आज के अखबार मैं मुख्य प्रष्ठ पर न्यूज डाईज़ेसट मैं सात ख़बरों का सारांश है. इन सातों में से पाँच खबरें लूट-मार से संबंधित हैं. अखबार के अन्दर भी लूट-मार वाली और बहुत सी खबरें हैं. पूरे अखबार मैं तलाश करने पर भी कोई ऐसी ख़बर नहीं मिली जिसमें किसी अच्छी घटना का जिक्र हो. क्या अखबारवालों को अच्छी घटनाएं दिखाई नहीं देती या अच्छी घटनाएं घट्नी बंद हो गई हैं?

हम समाज में रहते हैं और समाज में अच्छा बुरा सब घटता है. हमारे आसपास ही अक्सर कुछ अच्छा घट जाया करता है. जो अच्छा हमें दिखाई देता है वह अखबारवालों को भी दिखाई देता होगा. तब वह उसे छापते क्यों नहीं? क्या अच्छी घटनाओं की कोई न्यूज वेल्यू नहीं है? क्या अखबार सिर्फ़ न्यूज वेल्यू के लिए हैं? या जनता अच्छी ख़बरों के बारे में जानना नहीं चाहती. यह जो कुछ भी हो रहा है वह अच्छा नहीं हो रहा है. बचपन में हमें सिखाया गया था की साहित्य समाज का दर्पण होता है. पर अब पता चला की इस दर्पण में केवल लूट-मार की घटनाएं ही दिखाई देती हैं.

मीडिया प्रजातंत्र का एक शक्तिशाली अंग है. अगर मीडिया कमजोर होगा या वह समाज के नकारात्मक रूप को ही दिखायेगा तब इस से समाज और जनता का नुकसान ही होगा.