दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो


दैनिक प्रार्थना

है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Sunday, 19 October 2008

खोज

हम दो दोस्त,
निकले थे खोजने,
वह भगवान् को,
मैं इंसान को,
उसकी खोज पूरी हुई,
वह लौट आया,
मैं अभी भी खोज रहा हूँ,
इंसान को. 

Saturday, 18 October 2008

भगवान् और इंसान

भगवान् को मैंने कभी देखा नहीं,
बस उस के बारे में सुना है,
जो सुना है उस पर यकीन किया है,
कभी नाउम्मीद नहीं किया उसने.

इंसान को मैंने देखा है,
पहचाना है, जाना है, 
पर अक्सर किया है उसने,
नाउम्मीद.