हम दो दोस्त,
निकले थे खोजने,
वह भगवान् को,
मैं इंसान को,
उसकी खोज पूरी हुई,
वह लौट आया,
मैं अभी भी खोज रहा हूँ,
इंसान को.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो