मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत का हर नागरिक एक स्वर में बोल रहा है आतंकवाद के ख़िलाफ़ (उनको छोड़ कर जिनके ईमान में देश के लिए बफादारी नहीं). इस अप्रत्याशित एकता को संजोये रखने के लिए और इस विचारधारा को सही दिशा देने के लिए आज देश को एक नेता की जरूरत है.
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी के बाद इस देश में कोई नेता पैदा नहीं हुआ. कहते तो बहुत हैं ख़ुद को नेता पर कहने से क्या होता है, हकीकत में तो यह सब मात्र राजनीतिबाज हैं जो राजनीति का व्यवसाय करते हैं. चुनाव में पैसा लगाते हैं और जीत जाने पर हजारों गुना नफा कमाते हैं. इनका मजहब पैसा है. इनका ईमान पैसा है.
देश को एक ऐसा नेता चाहिए जिसका धर्म, ईमान सब कुछ देश हो, जिसके मन, वचन और कर्म में जनता की सेवा ही एकमात्र उद्देश्य हो. जो शासक नहीं सेवक हो. काश एक ऐसा नेता मिले इस देश को.