बढ़ रहा है,
गुस्सा आदमी का,
या छोटी हो रही है,
हद बर्दाश्त की?
भटक रहा है,
स्वार्थ के अंधेरों में,
या लौट रहा है,
क्या कहते हैं,
बैक टू स्कुँयर वन?
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो