उन्होंने साबित कर दिया अपने को,
नकारात्मक राजनीति का शिरमौर,
नफरत फैलाकर लोगों के बीच,
देसी परदेसी का मचाकर शोर.
'माटी के पूतों' की हित रक्षा मैं,
उन्होंने किया हिंसक आन्दोलन,
नष्ट की राष्ट्र संपत्ति,
पिटाई की बाहर वालों की,
और मार दिया,
एक माटी के पूत को.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Thursday, 7 February 2008
उच्च पदों पर आसीन लोग

उन्होंने भाषण देना था सो दे दिया,
उनका काम सिर्फ़ भाषण देना है,
आखिरकार वह राज्यपाल हैं.
पर भाषण मैं ऐसा कुछ कह दिया,
जो न कहते तब अच्छा रहता,
न कहने से कुछ नहीं बिगड़ता,
पर कहने से सब बिगड़ गया.
उत्तर भारत के लोग कानून तोड़ते हैं,
कानून तोड़ने मैं गर्व अनुभव करते हैं,
कानून तोड़ने पर उन्हें आपत्ति है,
पर वह ख़ुद समाज को तोड़ते हैं,
देश को तोड़ते हैं,
लोगों को बांटते हैं.
नफरत पैदा करते हैं.
उच्च पदों पर आसीन यह लोग,
अपनी जबान पर लगाम क्यों नहीं कसते?
क्यों इन पर कोई कार्यवाही नहीं होती?
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