एक और मंत्री हैं अर्जुन सिंह. पहले यह पढ़ लीजिये:
"I would like to put it on record that when I met Pandit Jawahar Lal Nehru in March 1960, I pledged my total loyalty to him and his family. This was the commitment which is an article of faith with me. For the past 48 years of my life, I have scrupulously adhered to it".
यह वह महान उदगार हैं जो इन सज्जन ने दुखी मन से प्रकट किए जब इस परिवार की मुखिया ने इन को एक तरफ़ कर दिया और इन के मंत्रालय में थोड़ा बहुत जो कुछ हुआ है उस का क्रेडिट भी मनमोहन सिंह को दे दिया. उस से पहले पार्टी के प्रवक्ता ने कहा था की हमारी पार्टी में चमचागिरी का कोई स्थान नहीं है. पर इस वीर और स्वाभिमानी पुरूष को देखिये, कि इतना अपमान होने पर भी अपनी बफादारी से बाज नहीं आ रहे हैं.
अफ़सोस की बात यह है कि एक परिवार के लिए समर्पित व्यक्ति को राष्ट्र की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है. किसी विकासशील देश में मानव संशाधन बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसी संशाधन को विकसित करने का काम इन बफदार सज्जन को दिया गया. जो व्यक्ति ख़ुद अपने विकास के लिए चमचागिरी का सहारा ले वह देश के किसी संशाधन का क्या विकास करेगा?
एक बात और, किसी परिवार के लिए बफदार होने की कीमत देश क्यों दे? यह सज्जन जिस परिवार के बफादार थे या हैं, बही परिवार इन्हे उसका ईनाम दे. परिवार में ही कोई काम इन्हें दिया जाना चाहिए था. जनता के पैसे का इस तरह दुरूपयोग करना इस परिवार के लिए शोभनीय नहीं है. न ही इस परिवार को इस तरह का कोई अधिकार है. भाई आपका बफदार है आप भुगतिए, देश क्यों भुगते आपके बफादारों को?
इन मंत्री महोदय को बिना कोई समय नष्ट किए दरबाजा दिखाया जाना चाहिए.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Tuesday, 13 May 2008
Wednesday, 16 April 2008
चमचागिरी की भर्त्सना या लगे रहो मुन्ना (अर्जुन) भाई
सीधी सी बात है. सब कुछ परिवार की छबि चमकाने के लिए हो रहा है. प्रियंका जेल मैं अपने पिता की कातिल से मिलने जाती हैं. कितनी महान हैं वह! मनमोहन जी राहुल से मंत्री बनने के लिए विनम्र प्रार्थना करते हैं और जबाब उनकी माता जी देती हैं. राहुल जी कितने महान हैं! मायावती के चलाये सारे तीर एक ही बार में बेकार कर दिए गए. अर्जुन की भर्त्सना के तीर ने आगे के लिए एक ब्रह्माश्त्र की रचना कर दी. महान परिवार और ज्यादा महान हो गया.
अगले चुनाव में कांग्रेस यदि जीती तब कोई भी प्रधान मंत्री बने, अर्जुन का मंत्री पद पक्का हो गया है. लगे रहो मुन्ना (अर्जुन) भाई. अब ऐसी चमचागिरी के प्रदर्शन और भी होंगें. देखते जाइये.
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