शर्मा जी ने पूछा,
सरकार विज्ञापन क्यों देती है?
करोड़ों रूपए खर्च कर देती है,
किसे फायदा होता है इस से?
सरकार को या जनता को?
वर्मा जी ने समझाया,
फायदा न सरकार को न जनता को,
विज्ञापन में जो लिखा है,
और वह क्यों लिखा है,
सरकार और जनता दोनों जानते हैं,
फायदा होता है नेताओं और बाबुओं को,
मीडिया को, उनके एजेंटों को,
जनता का पैसा सरकार का है,
सरकार खर्च करती है,
या समझिये बाँट देती है,
सबको मिलता है उनका हिस्सा,
मेडम का फोटो छप जाता है,
उन की चमचागिरी हो जाती है,
यह असली फायदा है,
हल्दी लगे न फिटकरी,
रंग चोखा आ जाता है.
हर व्यक्ति कवि है. अक्सर यह कवि कानों में फुसफुसाता है. कुछ सुनते हैं, कुछ नहीं सुनते. जो सुनते हैं वह शब्द दे देते हैं इस फुसफुसाहट को. एक और पुष्प खिल जाता है काव्य कुञ्ज में.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो
दैनिक प्रार्थना
है आद्य्शक्ति, जगत्जन्नी, कल्याणकारिणी, विघ्न्हारिणी माँ,
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
सब पर कृपा करो, दया करो, कुशल-मंगल करो,
सब सुखी हों, स्वस्थ हों, सानंद हों, दीर्घायु हों,
सबके मन में संतोष हो, परोपकार की भावना हो,
आपके चरणों में सब की भक्ति बनी रहे,
सबके मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव हो,
सहानुभूति की भावना हो, आदर की भावना हो,
मिल-जुल कर शान्ति पूर्वक एक साथ रहने की भावना हो,
माँ सबके मन में निवास करो.
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Tuesday, 12 January 2010
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